?>

इस्राईल अपनी जलाई आग में ख़ुद भस्म हो जाएगा

इस्राईल अपनी जलाई आग में ख़ुद भस्म हो जाएगा

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर इस्राईल के आतंकी हमले, इस कार्यक्रम में रुकावट नहीं डाल सकते, जैसा कि इससे पहले स्टक्सनेट का वायरस हमला भी इसमें रुकावट नहीं डाल सका था, अलबत्ता इस तरह के हमले संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के अनुच्छेद नंबर 51 के अनुसार क़ानूनी प्रतिरक्षा के सिद्धांत के आधार पर प्रतिक्रिया दिखाने के लिए ईरान के हाथ खोल देंगे।

रविवार को मीडिया में ईरान के नतंज़ एनरिचमेंट प्लांट पर साइबर हमले की ख़बरें आईं। रिपोर्टों के मुताबिक़ इस हमले से इस संवर्धन प्लांट की बिजली कट गई और आईआर-1 सेंट्रीफ़्यूज मशीनों ने काम करना बंद कर दिया। इस हमले के बाद रेडियो इस्राईल ने गुप्तचर सूत्रों के हवाले से बताया कि मूसाद ने नतंज़ में साइबर हमला किया है। ज़ायोनी प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू ने भी कहा कि ईरान से मुक़ाबला एक बड़ा मिशन है और आज जो अवसर मिला है, शायद वह आगे न मिले।

 

अहम सवाल यह है कि क्या इस तरह की कार्यवाहियां, ईरान के प्रतिरोध को कमज़ोर कर सकती हैं? इस सवाल के जवाब में कहा जाना चाहिए कि इससे पहले की जाने वाली कार्यवाहियां भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम में कोई रुकावट नहीं डाल सकी थीं और अब भी जब देश के अधिकारियों ने कहा है कि नतंज़ में नई सेंट्रीफ़्यूज मशीनें लगाई जाएंगी और पहाड़ों में मज़बूत सुरंगें बनाई जाएंगी तो इस बात की आशा है कि नतंज़ के संवर्धन प्लांट की ताक़त पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगी और वह बहुत कम समय में यूरेनियम का संवर्धन करने लगेगा। इसके अलावा यह भी कहना चाहिए कि ईरान, अमरीका के प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए चीन के साथ हुए 25 वर्षीय समझौते और रूस जैसे देशों के साथ भी इसी तरह के समझौते करके अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकता है और यह अमरीका होगा जो अपनी कार्यवाहियों से चीन को नियंत्रित करने के बजाए उसे इस बात का अवसर दे देगा कि वह मध्यपूर्व में अपनी पोज़ीशन मज़बूत बना ले।

 

जहां तक इस दावे की बात है कि इस तरह की कार्यवाहियों से ईरान की ताक़त पर प्रश्न चिन्ह लगता है और तेहरान इन हमलों का जवाब नहीं दे सकता तो इस बारे में दो बिंदुओं पर ध्यान देना ज़रूरी है। पहला यह कि ज़ायोनी शासन इस तरह की कार्यवाहियों से सोचता है कि वह अपनी ताक़त और ईरान की कमज़ोरी का प्रदर्शन कर रहा है जबकि यह नेतनयाहू की ओर से समीकरण की खुली हुई ग़लती है जिन्हें आंतरिक संकट का सामना है और निश्चित रूप से ईरान इस तरह की कार्यवाहियों का सही समय व स्थान पर जवाब देगा और यह हक़ उसे संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणापत्र के अनुच्छेद नंबर 51 से मिलता है जिसके अंतर्गत उसे अपनी प्रतिरक्षा का क़ानूनी हक़ हासिल है। दूसरा बिंदु यह कि जिस दिन ज़ायोनी शासन की आग भड़काने की कार्यावहियों के सिलसिले में ईरान का संयम ख़त्म हो जाएगा उस दिन लड़ाई का मोर्चा केवल डिमोना के परमाणु प्लांट को उड़ाने तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि उस दिन इस्राईल उस आग में जल जाएगा, जो उसने ख़ुद भड़काई है।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*