?>

इलाक़े से बड़ी ख़बर, इस्राईल और तुर्की में ठनी, अपना पलड़ा भारी करने की लगी होड़, बारूद के ढेर पर है पूरा इलाक़ा...

इलाक़े से बड़ी ख़बर, इस्राईल और तुर्की में ठनी, अपना पलड़ा भारी करने की लगी होड़, बारूद के ढेर पर है पूरा इलाक़ा...

तुर्की के घर आंगन में इस्राईल के हथियारों के लेनदेन ने अंकारा को क्रोधित कर दिया है और इस देश का मक़सद, बाकू और क्षेत्र की अन्य सरकार के हथियारों के व्यापार में इस्राईल की जगह को भरना है।

प्रसिद्ध टीकाकार सईद पीर मुहम्मदी लिखते हैं कि क्षेत्र में ड्रोन युद्ध का नया समीकरण बन गया है जिसकी वजह से दुनिया और क्षेत्र में नया समीकरण तेज़ी से अस्तित्व में आ रहा है और यही चीज़ अब दुनिया और क्षेत्र का भविष्य निर्धारण करेगी। फ़्रांसिस फ़ोकोयामा का कहना है कि सरकारों के बीच ड्रोन तकनीक में विस्तार और ड्रोन झड़पों की प्रवृत्ति तेज़ी से बदल रही है।

हमारे सामने सीरिया,इराक़, लीबिया और यमन के संकट की मिसाल है जहां पर ड्रोन विमान निर्णायक भूमिका अदा कर रहे हैं और शक्ति का नया संतुलन अस्तित्व में आ रहा है।

ईरान भी इस क्षेत्र में नयी उभरती हुई शक्ति है और उसने ड्रोन विमानो के निर्माण और उनको विकसित करने में नवीन तकनीक का ज़बरदस्त प्रयोग किया है। यही नहीं रियाज़ और अबूधाबी ने चीन से बड़ी मात्रा में वेंग लांग ड्रोन विमान ख़रीदे हैं और यह देश यमन तथा लीबिया की झड़पों में उनको धड़ल्ले से प्रयोग कर रहे हैं। इस्राईल और तुर्की ने भी ड्रोन विमानों के निर्माण और उसको विकासित करने में अपनी पहचान बना रखी है।

अंकारा ने वर्ष 2006 में इस्राईल से हैरून नामक दस असैनिक ड्रोन विमान ख़रीदने आडर दिया लेकिन 2010 के मध्य तक अमरीका द्वारा प्रिडेटर और रैपर नामक ड्रोन विमानों को बेचने से मना दिया उसके बाद से तुर्की ने ड्रोन विमानों के निर्माण और विकसित करने का काम शुरु किया। तुर्की ने इसी परिधि में टीबी-2 नामक ड्रोन बना लिया जो तुर्की के हवाई आप्रेशन में रीढ़ की हड्डी का काम करता है और पोलैंड, यूक्रेन और अलबानिया जैसे यूरोपीय देश तुर्की से ड्रोन ख़रीदने वालों की सूची में शामिल हैं।  

रिपोर्टों में बताया गया है कि तुर्की में कम से कम ड्रोन विमानों की 9 छावनियां हैं। ड्रोन विमानों के क्षेत्र में तुर्की में इतनी ज़्यादा तरक़्क़ी के बावजूद अंकारा, अमरीका, रूस, चीन और इस्राईल के हथियारों के बाज़ार में भी हाथपैर मार रहा है और जिसके बाद इस्राईल और तुर्की के बीच ड्रोन प्रतिस्पर्धा शुरु हो गयी है जो क्षेत्र के लिए ख़तरनाक साबित हो सकती है। 


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*