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इराक़ में आतंकवादी हमले करवाकर क्या अमरीका अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है?

इराक़ में आतंकवादी हमले करवाकर क्या अमरीका अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर सकता है?

इराक में हालिया दिनों के भीतर दाइश के आतंकवादी हमलों के एकदम से तेज़ी आई है। आइए देखते हैं कि इराक़ में क्यों बढ़ रहे हैं दाइश के आतंकी हमले? क्या है इसकी हक़ीक़त?

दाइश के आतंकी तत्वों ने इराक़ के सलाहुद्दीन प्रांत में कल रात इस देश के स्वयंसेवी बल, हश्दुश्शाबी के मुख्यालय पर हमला किया।  इस आतंकी हमले में हश्दुश्शाबी के 11 जवान शहीद और 8 जवान घायल हुए।  इससे पहले गुरूवार को भी इराक़ की राजधानी बग़दाद के चहल-पहल वाले क्षेत्र में आत्मघाती हमले किये गए थे जिनमें 35 लोग मारे गए और 110 अन्य घायल हो गए।  बाद में दाइश ने एलान करके इन हमलों की ज़िम्मेदारी स्वीकार की।

यहां पर यह बिंदु ध्यानयोग्य है कि अमरीका में बाइडन के राष्ट्रपति बनने के साथ ही इराक़ में इस प्रकार की हिंसक कार्यवाहियां की गईं।  यह हमले अमरीकी के नए प्रशासन को संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं कि इराक़ में इस समय सुरक्षा की स्थिति कमज़ोर है अतः इस देश में मौजूद अमरीकी सैनिकों को यहीं पर बाक़ी रहना चाहिए।

इस बीच हमें यह बात भी याद रखनी चाहिए कि पिछले साल बग़दाद में जनरल सुलैमानी और उनके साथियों पर अमरीका की ओर से किये गए कायराना हमले के बाद इराक़ की संसद ने इस देश के अमरीकी सैनिकों के निष्कासन का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया था।  इस घटना को एक वर्ष का समय होने को है किंतु इराक़ में पाए जाने वाले आंतरिक मतभेदों के कारण यह अभी तक व्यवहारिक नहीं हो पाया।  ्इराक़ी प्रतिरोधकर्ता अपने देश के अमरीकी सैनिकों की तत्काल वापसी के पक्षधर हैं जबकि इराक़ में कुछ एसे गुट एवं लोग हैं जो इस देश में अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी का समर्थन करते हैं जिनमें से कुछ सरकार में भी मौजूद हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण बात यह है कि इराक़ के सुरक्षा मामलों के एक विशेषज्ञ "सबाह अलअकीली" ने बताया है कि अमरीकी सैनिकों ने सन 2020 के अंत तक दाइश के लगभग चार हज़ार आतंकवादियों को अपने वाहनों के माध्यम से इराक़ पहुंचा दिया है।  उन्होंने बताया कि हमारे पास इस बात के पुष्ट प्रमाण मौजूद हैं कि अमरीकी सैन्य वाहनों के ज़रिये सीरिया की सीमा से दाइश के कम से कम 4 हज़ार आतंकवादियों को इराक़ पहुंचाया गया है।

याद रहे कि इराक़ के स्वयंसेवी संगठन नोजबा आंदोलन के प्रवक्ता ने इससे पहले कहा था कि बग़दाद के हालिया आतंकी हमले में लिप्त एक आत्मघाती हमलावर, सीरिया की सीमा से उसी स्थान से इराक़ में दाख़िल हुआ था जहां से इराक़ी सैनिकों को हटाया जा चुका है।  उन्होंने बताया कि विशेष बात यह है कि इराक़ के सुरक्षाबलों को अमरीका के सैन्य वाहनों की जांच करने या उनकी तलाशी लेने की बिल्कुल भी अनुमति नहीं है।

वास्तविकता यह है कि इराक़ से दाइश का सफाया किया जा चुका है किंतु अब भी वहां पर उसके कुछ आतंकी भूमिगत होकर कार्यवाहियां करते रहते हैं जिनको विदेश से समर्थन प्राप्त है।  इराक़ में जारी राजनैतिक अस्थिरता का दुरूपयोग करते हुए यह आतंकी संगठन वहां पर अपनी हिंसक गतिविधियां बढ़ाना चाहता है।  इराक़ी सूत्रों का कहना है कि आतंकी गतिविधियों में लिप्त, गिरफ़्तार किये गए एक दाइशी ने पूछताछ के दौरान बताया है कि इराक़ में दाइश के कई आत्मघाती, हमले करने के लिए तैयार बैठे हैं।  इस आतंकी ने बताया कि वे केवल आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  एक इराक़ी रक्षा विशेषज्ञ ने यह स्पष्ट किया कि देश में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के कारण इराक़ी, चाहते हुए भी दाइश के आतंकवादियों का सफ़ाया नहीं कर सकते।  एसे में इराक़ी स्वयंसेवी बलों पर हमले बढ़ने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता। 

यहां पर एक ध्यान योग्य बिंदु यह है कि पिछली रात इराक़ में इस देश के स्वयंसेवियों के ठिकाने पर दाइश के हमले के समय  उन्होंने जिस हिम्मत और दृढ़ता का परिचय दिया उससे पता चलता है कि विदेशी विशेषकर अमरीकी दबाव के बावजूद हश्दुश्शाबी अब भी इराक़ की एकता एवं संप्रभुता की रक्षा करने में पूरी तरह से सक्षम है। 


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