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इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर क्यों अचानक तेज़ हो गए हमले? एनुल असद छावनी पर गिरने वाले मिसाइलों का बग़दाद पहुंची अमरीकी टीम के लिए क्या है संदेश?

इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर क्यों अचानक तेज़ हो गए हमले? एनुल असद छावनी पर गिरने वाले मिसाइलों का बग़दाद पहुंची अमरीकी टीम के लिए क्या है संदेश?

यह महसूस होता है कि इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के विरोधी संगठनों ने अफ़ग़ानिस्तान के तालेबान की तरह अमरीकी सैनिकों को ताक़त का इस्तेमाल करके इराक़ से मार भगाने का फ़ैसला कर लिया है।

इराक़ी संसद जनवरी 2020 में एक प्रस्ताव पारित करके इराक़ से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन की मांग कर चुकी है।

यह ख़बर आई है कि एनुल असद छावनी पर तीन दिन के भीतर तीन हमले हुए और हमले तब हुए जब अमरीका के मध्यपूर्व के मामलों के दूत ब्रेट मैक गोर्क एक प्रतिनिधिमंडल के साथ बग़दाद की यात्रा पर पहुंचे हैं। वह इराक़ की मुसतफ़ा अलकाज़ेमी सरकार से इराक़ से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन के मुद्दे पर बात करेंगे।

हालिया हमला जिसमें किसी की जान नहीं गई, बाइडन के सत्ता संभालने के बाद से अब तक का 30वां हमला था। शायद सबसे ख़तरनाक हमला वह था जो उत्तरी इराक़ के शहर अरबील में अमरीकी छावनी पर ड्रोन विमान से किया गया था। इस हमले में दो विदेशियों सहित 11 लोगों की जानें गई थीं।

यह भी ध्यान योग्य है कि यह तनाव तब बढ़ रहा है जब अमरीकी मीडिया में यह ख़बरें आ रही हैं कि वियेना में परमाणु मुद्दे पर वार्ता कठिन दौर से गुज़र रही है।

बाइडन प्रशासन इराक़ से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन के लिए तैयार नहीं है। इराक़ी फ़ोर्सेज़ की ट्रेनिंग जैसे बहानों से वह इराक़ में अपने सैनिकों को बाक़ी रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अगर हमले इसी तरह जारी रहे तो अमरीका के लिए इराक़ में रुक पाना असंभव हो जाएगा।

अमरीकी कहते हैं कि वह इराक़ से अपने सैनिकों को निकाल लेंगे लेकिन शर्त यह है कि सद्दाम शासन को गिराने में और उसके बाद इराक़ पर क़ब्ज़े में अमरीका ने जो रक़म ख़र्च की है वह इराक़ी सरकार अदा करे। यह रक़म सैकड़ों अरब डालर बताई जाती है।

इराक़ियों को इस मांग पर सीधे अंतर्राष्ट्रीय अदालत में अमरीका के ख़िलाफ़ मुक़द्दमा दायर करना चाहिए कि उसने इराक़ पर जंग थोप कर और उसके बाद इस देश पर क़ब्ज़ा करके जो महाविनाश के हथियारों के झूठे दावे के साथ अंजाम पाया उससे इराक़ को भारी नुक़सान पहुंचा है। इसके नतीजे में बीस लाख से अधिक इराक़ी मारे गए। इसके हर्जाने के तौर पर अमरीका को कई ट्रिलियन डालर की रक़म अदा करनी होगी।

इराक़ से अमरीका को शर्मनाक तरीक़े से निकलना पड़ेगा जिस तरह 2011 में इराक़ियों के हमले से डरकर उसे भागना पड़ा था।

स्रोतः रायुल यौम


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