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इराक़ और सीरिया के टुकड़े करने के लिए अमरीका की नई साज़िश

इराक़ और सीरिया के टुकड़े करने के लिए अमरीका की नई साज़िश

दाइश की पराजय के समय से ही सीरिया में अमरीका और इस्राईल की ख़ुफ़िया एजेंसियों की कार्यवाहियां तेज़ हो गईं और पूर्वोत्तरी सीरिया में अमरीका के आतंकी सैनिकों ने दाइश के आतंकियों की जगह ले ली।

कुछ समय पहले कुछ जानकार सूत्रों ने बताया कि अमरीका व इस्राईल के सैन्य मनोचिकित्सक और जासूस कुछ समय से पूर्वोत्तरी सीरिया के हसका प्रांत के अलहौल कैम्प में दाइश गुट के आतंकियों व उनके परिवार वालों की ट्रेनिंग कर रहे हैं और उनके लिए जीवन की उचित संभावनाएं प्रदान कर रहे हैं।इसी के साथ उन्हें अलमुक़द्दसी की लिखी हुई किताब मिल्लते इब्राहीम या इब्राहीम का समुदाय भी पढ़ने की दी जा रही है। यह वह किताब है जो इराक़ की बूका जेल में भी मौजूद थी और इसी के कारण तकफ़ीरियों की एक नई पीढ़ी पैदा हो गई थी। यही लोग आगे चल कर अमरीका व इस्राईल के सैन्य प्रशिक्षण के चलते दाइश के सरग़ना बने थे।

 

राजनैतिक टीकाकारों का कहना है कि इस समय जो कुछ सीरिया के अलहौल कैम्प में और इसी तरह उन जेलों मेें, जिनमें दाइश के आतंकी क़ैद हैं, जो कुछ हो रहा है, वह इराक़ की अमरीकी जेलों विशेष कर बूका जेल में जो कुछ पहले हो चुका है, उसी की पुनरावृत्ति है। साक्ष्यों से पता चलता है कि अमरीका, इस्राईल व ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसियां, तकफ़ीरियों की एक नई पीढ़ी तैयार करने की कोशिश कर रही हैं जिसे शायद दाइश-2 के नाम से क्षेत्र में उतारा जाएगा और उसका मिशन भी दाइश से अलग होगा। क्षेत्र में अमरीका व उसके घटकों की नई साज़िश का फ़र्क़ यह है कि इस बार वे अधिक दाइशी महिलाओं और युवाओं को अपने षड्यंत्रों को पूरा करने के लिए इस्तेमाल करेंगे।

 

इस समय सीरिया के हसका प्रांत के ग़ुवैरान क्षेत्र की सनाआ जेल में दाइश के लगभग 12 हज़ार आतंकी क़ैद हैं। जेल का नियंत्रण कुर्द डेमोक्रेटिक फ़ोर्स के हाथ में है। इन बारह हज़ार दाइशी आतंकियों में 4 हज़ार पश्चिमी व अरब देशों के हैं। इसी तरह हसका की सीना जेल में भी लगभग दस हज़ार दाइशी आतंकी क़ैद हैं। पिछले दो बरसों में दाइश के बहुत से आतंकियों को या तो छोड़ दिया गया है या वे जेल से फ़रार हो गए हैं। जारी साल के अक्तूबर महीने में ही दाइश के 600 सीरियाई आतंकियों को जेल से छोड़ा गया जिसका अमरीका ने भरपूर स्वागत किया।

 

क्षेत्रीय मामलों के समीक्षकों व टीकाकारों का कहना है कि दाइश के आतंकियों को रिहा करने या उन्हें जेल से फ़रार करवाने का काम अमरीका के इशारे पर बल्कि उसके आदेश पर हो रहा है क्योंकि वह इस तरह आतंकवाद से संघर्ष के नाम पर सीरिया में अपनी ग़ैर क़ानूनी उपस्थिति का औचित्य दर्शाने की कोशिश कर रहा है। जिस बात का ख़तरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है वह यह है कि अमरीका, दाइश के आतंकियों को पुनः संगठित करके और उन्हें इराक़ भेज कर इस देश को सन 2014 के हालात की ओर लौटाना चाहता है ताकि इस देश के साथ एक नया सुरक्षा समझौता कर सके। इस समझौते के अंतर्गत वह बग़दाद को इस बात के लिए बाध्य करेगा कि वह अपनी धरती में अमरीकी सैनिकों को बाक़ी रखे, जिन्हें निकालने का बिल इराक़ी संसद इसी साल जनवरी में पारित कर चुकी है जब आतंकी अमरीकी सैनिकों ने जनरल क़ासिम सुलैमानी और जनरल अबू महदी अलमुहंदिस को बग़दाद हवाई अड्डे के क़रीब शहीद कर दिया था।

 

यहां पर अहम बात यह है कि दुनिया विशेष कर पश्चिमी एशिया में अमरीका की आपराधिक नीतियां, इस देश में राष्ट्रपति के बदलने से बदलने वाली नहीं हैं और डोनल्ड ट्रम्प या जो बाइडन जैसे लोग ख़ुद ही ज़ायोनियों के आदेशों के पालनकर्ता हैं।


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