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इमारात ने सऊदी अरब को दिखाई आंख और अपनी ताक़त का कराया एहसास, मामला क्या है?

इमारात ने सऊदी अरब को दिखाई आंख और अपनी ताक़त का कराया एहसास, मामला क्या है?

ब्रिटिश अख़बार फ़ायनैन्शियल टाइम्ज़ ने ख़ुलासा किया कि वियेना में गत शुक्रवार को ओपेक प्लस की बैठक में सऊदी अरब और इमारात का विवाद बिल्कुल खुलकर सामने आ गया। विवाद आने वाले महीनों में धीरे धीरे तेल उत्पादन बढ़ाने के मुद्दे पर है।

अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि कई साल पहले सऊदी अरब और इमारात आपसी सहयोग में इस हद तक आगे पहुंच गए कि दोनों ने ख़ुफ़िया राजनैतिक एलायंस बना लिया। दोनों ने मिलकर यमन युद्ध लड़ा, क़तर के बायकाट का मामला आया तो दोनों देश पूरी तरह साथ नज़र आए। मगर हालिया दिनों यह देखने में आया कि दोनों के बीच कड़वाहट लगातार बढ़ रही है। दोनों के हितों में तेल उत्पादन से लेकर यमन युद्ध, कोरोना संकट और इस्राईल से संबंध तक कई मुद्दों में गहरे मतभेद पैदा हो गए हैं।

शुक्रवार को वीडिया कान्फ़्रेन्स के माध्यम से होने वाली ओपेक प्लस की बैठक बेनतीजा रही। सऊदी अरब और रूस ने सदस्य देशों से कहा कि धीरे धीरे उत्पादन बढ़ाएं ताकि तेल की क़ीमतों में वृद्धि की प्रक्रिया धीमी पड़े और बाज़ार में स्थिरता आए क्योंकि कोरोना वायरस के संकट के बाद दुनिया के बाज़ार कठिनाइयों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। इमारात ने इसका विरोध किया और अपने ख़ास शेयर की बात की। उसका कहना था कि उसको जो हिस्सा दिया गया वह न्यायसंगत नहीं है।

वर्तमान विवाद को देखते हुए लगता है कि ओपेक प्लस की वर्तमान एकता ज़्यादा समय जारी नहीं रह पाएगी। इमारात का कहना है कि तेल उत्पादन के बारे में वह ओपेक प्लस के समझौते को अप्रैल 2022 तक बढ़ाने के लिए तैयार है लेकिन उसका हिस्सा न्यायसंगत रूप से मिलना चाहिए।

इमाराती प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार मरवान बलोची का कहना है कि इमारात और सऊदी अरब के बीच वैसे तो एक दशक से स्ट्रैटेजिक एलायंस है लेकिन दोनों के बीच आर्थिक मामलों में टकराव लगातार बढ़ रहा है। इमारात ने 2019 में यमन से अपने सारे सैनिक निकाल लिए और सऊदी अरब को अकेला छोड़ दिया। यही नहीं इमारात द्वारा समर्थित यमनी संगठन सऊदी अरब द्वारा समर्थित संगठनों से कई जगह भिड़ गए।

कोरोना वायरस की महामारी से निपटने की शैली को लेकर भी दोनों देश आपस में उलझते दिखाई दिए। रियाज़ ने रविवार से इमरात से यात्रियों की आवाजाही पर रोक लगा दी। सऊदी अरब यह क़दम भी उठाने जा रहा है कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामने शर्त रख रहा है कि उनके साथ व्यापार तभी होगा जब वह अपना हेड आफ़िस रियाज़ में बनाएं। यह दुबई पर हमला करने के समान है। इस समय इन कंपनियों के हेड क्वार्टर दुबई में हैं।

दुबई स्थित इमारात के राजनैतिक मामलों के विशेषज्ञ अब्दुल ख़ालिक़ अब्दुल्लाह का कहना है कि पिछले चालीस साल से इमारात ने हमेशा सऊदी अरब के फैसलों का सम्मान किया मगर अब इमारात तेल व्यापार में अधिक हिस्सा चाह रहा है और अपनी ताक़त भी दिखा रहा है।

ऊर्जा के क्षेत्र की सलाहकार कंपनी एनर्जी स्पेक्टस की अमृतासेन ने कहा कि सऊदी अरब और इमारात के बीच कई मुद्दों पर मतभेद के कारण भविष्य में ओपेक प्लस की वार्ता बहुत जटिल हो जाएगी। इमारात के ऊर्जा मंत्री सुहैल मज़रूई ने कहा कि इमारात ने अब तक क़ुरबानी दी है और इस देश को अधिकार है कि संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखे।

स्रोतः अलमयादीन


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