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इमारात की एक और ग़द्दारी, मस्जिदुल अक़सा की स्थिति में बदलाव के लिए इस्राईल से समझौता किया, जाॅर्डन की कड़ी आपत्ति

इमारात की एक और ग़द्दारी, मस्जिदुल अक़सा की स्थिति में बदलाव के लिए इस्राईल से समझौता किया, जाॅर्डन की कड़ी आपत्ति

जाॅर्डन के विदेश मंत्रालय ने इस प्रकार की रिपोर्टें सामने आने के बाद कि इमारात व ज़ायोनी शासन ने मस्जिदुल अक़सा की वर्तमान स्थिति में बदलाव के लिए समझौता किया है, कड़ी प्रतिक्रिया जताई है।

जाॅर्डन के विदेश मंत्रालय ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि इस देश का वक़्फ़ विभाग वह एकमात्र पक्ष है जिसे मस्जिदुल अक़सा की निगरानी व संचालन का अधिकार हासिल है। अरबी-21 वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार जाॅर्डन के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि मस्जिदुल अक़सा मुसलमानों की है और सिर्फ़ मुसलमान ही इस मस्जिद में नमाज़ पढ़ सकते हैं या उपासना कर सकते हैं। जाॅर्डन के विदेश मंत्रालय ने इसी तरह कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय क़ानून, अवैध क़ब्ज़ा करने वाले ज़ायोनियों को मस्जिदुल अक़सा की वर्तमान स्थिति में बदलाव की अनुमति नहीं देते।

 

इससे पहले मस्जिदुल अक़सा के ख़तीब शैख़ अकरमा सबरी ने भी बल देकर कहा था कि संयुक्त अरब इमारात को मस्जिदुल अक़सा के मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है। ज्ञात रहे कि इससे पहले कुछ संचार माध्यमों ने रिपोर्ट दी थी कि संयुक्त अरब इमारात और ज़ायोनी शासन के बीच संबंध स्थापना के समझौते के बाद अब अबू धाबी और तेल अवीव ने मस्जिदुल अक़सा की स्थिति में बदलाव और इस्लाम के पहले क़िब्ले में मुसलमानों की उपस्थिति को सीमित करने का भी समझौता किया है।


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