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इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस के शुभअवसर पर विशेष कार्यक्रम

इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस के शुभअवसर पर विशेष कार्यक्रम

दोस्तो पैग़म्बरे इस्लाम ने लोगों के मार्गदर्शन में अपने पवित्र परिजनों की भूमिका पर बहुत बल दिया है।

उनका यह बल दिया जाना हर प्रतिबद्ध मुसलमान को इस बात के प्रेरित करता है कि वह पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों को पहचाने और उनकी पावन जीवनी को अपने जीवन का आदर्श करार दे। इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के पैदा होने से 200 साल से पहले ही इसकी शुभसूचना पैग़म्बरे इस्लाम ने दी थी। पैग़म्बरे इस्लाम ने फरमाया था कि इमाम मोहम्मद तक़ी के वंश से एक पवित्र बेटा पैदा होगा जिसका नाम अली बिन मोहम्मद होगा। यानी इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम जिनकी सबसे प्रसिद्ध उपाधि हादी है। पैग़म्बरे इस्लाम की यह शुभसूचना सन् 212 हिजरी कमरी में व्यवहारिक हुई और इमाम नक़ी अलैहिस्सलाम के पैदा होने पर उनके पिता इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम बहुत प्रसन्न हुए थे।

इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम भी दूसरे इमामों की भांति समस्त सद्गुणों से सुसज्जित थे। इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम ने लोगों के मार्गदर्शन की ज़िम्मेदारी उस वक्त संभाली जब गुमराही व्याप्त थी। व्यक्तित्व की दृष्टि से इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम का बहुत ऊंचा व विशेष मकाम है। आज के कार्यक्रम हम उनके जीवन के कुछ पहलुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास करेंगे।

पैग़म्बरे इस्लाम का प्रसिद्ध कथन है कि हमारे अहले बैत की मिसाल नूह की नाव जैसी है जो भी इस पर सवार हो गया वह कामयाब हो गया और जिसने भी उससे मुंह मोड़ा वह डूब जायेगा।"

वास्तव में पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों का सदाचरण समस्त मानवता के लिए उत्कृट आदर्श है और जिन लोगों ने पैग़म्बरे इस्लाम की उस हदीस पर अमल किया जिसमें आपने फरमाया है कि हमारे अहले बैत नूह की नाव की भांति हैं जो भी इस नाव पर सवार हो गया वह कल्याण पा गया और जो भी इनसे मुंह मोड़ेगा वह बर्बाद हो जायेगा। इसी प्रकार पैग़म्बरे इस्लाम ने एक अन्य स्थान पर फरमाया है कि मैं तुम लोगों के मध्य दो मूल्यवान चीज़ें छोड़कर जा रहा हूं एक कुरआन और दूसरे अहले बैत।  अगर तुम इन दोनों से जुड़े रहोगे तो कभी भी गुमराह नहीं होगे यहां तक कि दोनों एक साथ मेरे साथ हौज़े कौसर पर आयेंगे।

इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम का काल क्रांति का काल था। यह वह काल था जब पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों और उनसे प्रेम करने वालों को यातना दिया जाना अपने चरम पर थी। इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम की इमामत 33 वर्षों तक थी।  इस दौरान 6 अब्बासी शासकों ने शासन किया। अब्बासी शासकों ने इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम को बहुत यातनाएं दीं। ये यातनाएं मुतवक्किल अब्बासी के काल में अधिक हो गयी थीं। मुतवक्किल अब्बासी के काल में पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों और उनसे श्रृद्धा रखने और प्रेम करने वालों को इतना अधिक प्रताड़ित किया जाने लगा कि इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम ने अपने अनुयाइयों से तक़य्या करने के लिए कहा था।  

सरकार की ओर से इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम पर कड़ी नज़र रखी जाती थी इसलिए इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम पत्राचार के माध्यम से अपने अनुयाइयों से संपर्क करते और उनकी धार्मिक समस्याओं का समाधान बताते थे।  वे कठिन से कठिन परिस्थिति में भी लोगों का मार्गदर्शन करते थे। क़ुम, हमदान, मक्का और मदीना और इसी प्रकार इराक, मिस्र और यमन जैसे विभिन्न स्थानों पर आपके प्रतिनिधि थे और वे इमाम के संदेशों को उनके अनुयाइयों तक पहुंचाते थे।

ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई, इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के जीवन की कठिन परिस्थिति की ओर संकेत करते हुए कहते हैं। "इमाम हादी अलैहिस्सलाम 42 वर्षों तक ज़िन्दा रहे जिसमें 20 साल वह सामर्रा में रहे। वहां पर उनके पास खेत थे वहां वह कार्य करते और ज़िन्दगी गुज़ारते थे। इसी शहर में कुछ ध्यानयोग्य शीया इकट्ठा हुए और उन्हीं के माध्यम से इमाम अपने संदेशों को इस्लामी जगत के दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचाते थे, पत्राचार के माध्यम से लोगों से संपर्क स्थापित करते थे। संपर्क का यह नेटवर्क कुम, खुरासान, रैय, मदीना, यमन और इसी प्रकार दूरस्थ क्षेत्रों में स्थापित था। दिन- प्रतिदिन इमाम के चाहने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही थी। इमाम हादी अलैहिस्सलाम ने यह कार्य उस कठिन स्थिति में अंजाम दिया जब 6 अब्बासी शासकों का शासन था और उन्होंने इमाम और उनके चाहने वालों पर किसी प्रकार की यातना में संकोच से काम नहीं लिया।  रोचक बात यह है कि इमाम ने कड़ी निगरानी के बावजूद बहुत सारे शीयों का प्रशिक्षण किया और अब्बासी शासकों को इसकी भनक भी न लगी।

इमाम हादी यानी इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के काल में बनी अब्बासी शासक विशेषकर मुतवक्किल, राजकोष का प्रयोग अपने एश्वर्य के लिए करते थे। इसी प्रकार अब्बासी शासक राजकोष का प्रयोग महलों के निर्माण और विलासितापूर्ण जीवन के लिए करते थे। इसी प्रकार जो लोग अब्बासी शासकों की चाटुकारिता करते थे वे उन्हें उपहार देते थे जबकि जो लोग परेशान व ज़रूरतमंद होते थे वे उनकी मदद नहीं करते थे। अब्बासी शासकों में सबसे बुरा व भ्रष्ट मुतवक्किल था जो पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों से प्रेम करने वालों के साथ बड़ी कड़ाई से पेश आता था। वह किसी प्रकार के संकोच के बिना उनके मृत्युदंड का आदेश देता और उनकी संपत्तियों को ज़ब्त कर लेता था। वह सबसे अधिक इमाम अली नक़ी से डरता था और कई बार उसने इमाम को शहीद करने की चेष्टा की।

इसी भय की वजह से उसने इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम को पवित्र नगर मदीना से सामर्रा निष्कासित कर दिया। सामर्रा उस समय एक एसा नगर था जहां सैनिक छावनी थी ताकि वह इमाम पर नज़र रख सके परंतु अत्याचार से संघर्ष की भावना बचपने से ही इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम के अस्तित्व में मौजूद थी और बड़े होने पर उन्होंने कभी भी अत्याचार के समक्ष मौन धारण नहीं किया। जब भी उचित अवसर हाथ आता था इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम अब्बासी सरकारों की वास्तविकता से पर्दा उठाते और उनके साथ सहयोग करने के प्रति चेतावनी देते थे। इस प्रकार इमाम, अब्बासी शासकों का अत्याचारी चेहरा लोगों के लिए अधिक स्पष्ट करते थे। अत्याचारी अब्बासी शासक मुतवक्किल ने कई बार आदेश दिया कि इमाम के घर की कड़ाई के साथ तलाशी ली जाये। उसकी वजह यह थी कि वह डरता था कि कहीं इमाम अपने अनुयाइयों के साथ उसकी सरकार के खिलाफ आंदोलन न कर दें।

एक दिन मुतवक्किल ने इमाम के घर कुछ लोगों को भेजा और उन लोगों ने रात को इमाम के घर पर हमला कर दिया परंतु उन सबको कुछ भी न मिला। उन सबने इमाम को एक कमरे में देखा जो दरवाज़ा बंद किये हुए हैं और एक ऊनी कपड़ा उनकी शरीर पर है।  वे ज़मीन पर बैठे महान ईश्वर की उपासना और पवित्र कुरआन की तिलावत कर रहे हैं। मुतवक्किल के कारिन्दें उसी हालत में इमाम को उसके पास ले गये और उससे कहा कि इनके घर में कुछ नहीं मिला है और हमने इस हालत में देखा कि इमाम का चेहरा किबले की ओर था और वह कुरआन की तिलावत कर रहे थे।

मुतवक्किल भोग-विलास और एश्वर्य में मस्त रहता था। उस समय शराब का जाम उसके हाथ में था उसने बड़ी निर्लज्जता के साथ इमाम के सामने भी शराब पेश की। इमाम ने शपथ खायी और कहा कि हमारा मांस और खून इस प्रकार की चीज़ों से नहीं बना है। मुझे माफ करना! इस पर भी उसने इमाम का पीछा नहीं छोड़ा और कहा तो शेर पढ़िये। इमाम ने कहा कि कम ही शेर पढ़ता हूं पर मुतवक्किल ने आग्रह किया तो इमाम ने विवश होकर उसके लिए शेर पढ़ा जो मौत और परलोक के बारे में था। इमाम ने जो शेर पढ़ा उसका अर्थ यह था कि एक दिन महल गिर जायेंगे और क़ब्रें इंसान का ठिकाना होंगी। इमाम ने जो शेर पढ़ा उसका मुतवक्किल पर बहुत प्रभाव हुआ इस प्रकार से कि वह रो पड़ा। उसके बाद उसने आदेश दिया कि शराब को बंद कर दिया जाये और उसने बड़े सम्मान से इमाम को उनके घर वापस पहुंचवाया।  

रिवायत में है कि बुरैह अब्बास नाम का व्यक्ति पवित्र नगर मदीना का इमामे जमाअत था। उसने अब्बासी ख़लीफा को पत्र लिखा कि अगर तू मक्का और मदीना चाहता है तो इमाम अली नक़ी को इन दोनों नगरों से दूर रख। क्योंकि वह लोगों को अपनी ओर आमंत्रित कर रहे हैं और बहुत से लोग अली बिन मोहम्मद से जुड़ भी गये हैं जो उनका अनुसरण कर रहे हैं।" इस प्रकार इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम को निष्कासित करने का आदेश जारी हो गया। बुरैह इमाम के पास आया और कहा मैं जानता हूं कि आप जानते हैं कि आपके निष्कासन का कारण मैं हूं। हे अली बिन मोहम्मद! ईश्वर की सौगन्ध अगर आपने ख़लीफा से मेरी शिकायत की तो मदीना में आपके जो पेड़ हैं उनमें मैं आग लगा दूंगा और आपके सेवकों की हत्या कर दूंगा और आपके खेतों के जो पानी के स्रोत हैं उन्हें बर्बाद कर दूंगा। जान लीजिये कि मैं अपने फैसले में पक्का हूं।

इमाम ने कहा कि तेरी शिकायत का सबसे निकट रास्ता यह था कि कल रात ही महान ईश्वर से तेरी शिकायत करता और जो शिकायत मैंने ईश्वर से कर दी है उसे ईश्वर के अलावा उसके बंदों से नहीं करूंगा। इमाम की इस बात को सुनकर बुरैह कांपने लगा और उसने जो ग़लत कार्य किया था उससे शर्मिन्दा होकर इमाम के पैरों पर गिर पड़ा और उसने इमाम से माफी मांगी। इमाम ने फरमाया मैंने तुझे माफ किया।

यह है महान ईश्वर के बंदों का व्यवहार। इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम अपने पूर्वज हज़रत अली अलैहिस्सलाम की भांति बहुत ही सादा जीवन व्यतीत करते और ग़रीबों व निर्धनों की सहायता करते थे। इमाम अली नक़ी अलैहिस्सलाम ने पवित्र कुरआन की जो व्याख्या की है उनमें से कुछ आयतों की व्याख्या हम तक पहुंची है। आप पवित्र कुरआन के बारे में फरमाते हैं। “ महान ईश्वर ने क़ुरआन को किसी विशेष समय और विशेष लोगों के लिए नहीं भेजा है इस आधार पर प्रलय तक कुरआन हर ज़माने में नया और हर क़ौम व समुदाय के लिए ताज़ा है।“


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