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ईदे नौरोज़ और नए ईरानी साल की शुरुआत पर जनता के नाम ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई का संदेश

आसानियां ईरानी राष्ट्र की प्रतीक्षा में हैं, नए साल का नारा है ‘उत्पादन में तेज़ विकास'

आसानियां ईरानी राष्ट्र की प्रतीक्षा में हैं, नए साल का नारा है ‘उत्पादन में तेज़ विकास'

नए हिजरी शम्सी साल 1399 की शुरुआत और ईदे नौरोज़ पर इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने देश की जनता के नाम संदेश जारी किया। इस वीडियो संदेश में इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने बीते हुए हिजरी शम्सी साल 1398 (21 मार्च 2019 से 20 मार्च 2020 तक) की घटनाओं की समीक्षा और नए साल का एजेंडा निर्धारित करते हुए कहा कि नए साल का नारा है उत्पादन में तेज़ विकास।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का संदेश इस प्रकार हैः

बिस्मिल्लाह अर्रहमान अर्रहीम

हे दिलों और दृष्टियों को पलटने वाले! हे रात और दिन का संचालन करने वाले! हे साल और हालात को बदलने वाले! हमारी हालत को बेहतरीन हालत में बदल दे।

इस साल नौरोज़ (पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र) हज़रत इमाम मूसा काज़िम अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस पर आया है अतः उचित होगा कि अपनी गुफ़तुगू के शुरू में इस महान हस्ती की विशेष सलवात पढ़ूं

हे पालनहार! जाफ़र के पुत्र मूसा पर सलाम भेज, जो नेक लोगों के वारिस, भले लोगों के मार्गदर्शक, ज्योतियों के धारक, लंबे सजदे करने वाले, आंसू बहाने वाले और बहुत अधिक दुआएं करने वाले हैं। हे पालनहार! उन पर कृपा कर, उनके पवित्र, सदाचारी और गुनाहों से परे पूर्वजों और उनके वंशजों पर दया कर। उन पर ईश्वर की दया व कृपा हो।

मैं पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी के एलान की ईद और ताज़गी से भरी ईदे नौरोज़ की मुबारकबाद पेश करता हूं समूचे ईरानी राष्ट्र, विशेष रूप से शहीदों के आदरणीय परिजनों, देश की रक्षा में घायल होकर शारीरिक रूप से अक्षम हो जाने वाले जांबाज़ों, उनके संयमी और परिश्रमी परिवारों और चिकित्सा विभाग के संषर्घशील सदस्यों को, जिन्होंने हालिया हफ़्तों में शानदार सेवा का परिचय दिया है। सेवा करने वाले उन सभी लोगों को, जिन्होंने इन कठिन हालात में इस बड़ी ज़िम्मेदारी का कोई न कोई हिस्सा अपने कंधों पर उठाया और निष्ठा, लगाव तथा उत्साह के साथ शहर के भीतर, गांवों में, सड़कों पर, सीमाओं पर देश भर में जगह जगह सेवा में व्यस्त हैं। उन सब को मुबारकबाद पेश करता हूं, आप सब को ईद मुबारक! महान इमाम ख़ुमैनी की पवित्र आत्मा और शहीदों की पाकीज़ा आत्माओं पर सलाम भेजता हूं।

सांत्वना और मुबारकबाद पेश करना ज़रूरी समझता हूं सन 1398 (हिजरी शम्सी 21 मार्च 2019 से 20 मार्च 2020 तक) के शहीदों, चाहे वे पवित्र स्थलों की रक्षा करने वाले शहीद हों या सीमाओं की रक्षा पर तैनात शहीद हों और उनमें सर्वप्रथम हमारे प्रिय और महान शहीद जनरल सुलैमानी और उनके साथियों, शहीद अबू महदी मुहंदिस और उनके साथियों, इसी तरह किरमान की घटना के शहीदों, यात्री विमान की दुर्घटना के शहीदों, चिकित्सा विभाग से संबंध रखने वाले शहीदों, वे लोग जो बीमारों की सेवा करते हुए ईश्वर के मार्ग में शहीद हो गए और ईश्वर के मार्ग में शहादत के महान दर्जे पर पहुंचे, उन के परिजनों को हम सांत्वना पेश करते हैं। इसी तरह ईद की और उनके सपूतों को हासिल होने वाले महान दर्जे की मुबारकबाद पेश करते हैं। हमारा मानना है कि यह सारी घटनाएं इंशाअल्लाह आख़िरकार ईरान के लिए लाभदायक होंगी।सन 1398 (हिजरी शम्सी 21 मार्च 2019 से 20 मार्च 2020 तक) ईरानी राष्ट्र के लिए बड़े उतार चढ़ाव वाला साल था। इस साल की शुरुआत बाढ़ से हुई और इसकी समाप्ति कोरोना पर हुई। इस पूरे साल के दौरान भी देश के लिए और देश के कुछ लोगों के लिए अनेक प्रकार की घटनाएं हुईं। भूकंप और प्रतिबंध जैसी घटनाएं। इन घटनाओं का चरम बिंदु था अमरीका का आतंकी हमला और ईरान व इस्लाम के विख्यात शहीद जनरल सुलैमानी की शहादत। इस साल के दौरान जनता की कठिनाइयां कुछ कम नहीं थीं। यह साल इस तरह गुज़रा। लेहाज़ा यह सख़्त साल था लेकिन महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि इन कठिनाइयों के साथ ही इस साल में कुछ गौरव भी हासिल हुए जिनमें कुछ बेमिसाल थे। ईरानी राष्ट्र ने वास्तव में शानदार कारनामा अंजाम दिया। साल की शुरुआत में बाढ़ के दौरान मोमिन और हिम्मती लोग, प्रभावितों की मदद के लिए बाढ़ वाले शहरों और देहातों की ओर जनसैलाब की तरह रवाना हो गए। हमारी प्रिय जनता ने बड़े रोचक दृष्यों की रचना की। बूढ़े, जवान सब बाढ़ से प्रभावित इलाकों में पहुंचे। मिट्टी और कीचड़ से भरे हुए घरों की धुलाई की, सफ़ाई की, पीड़ितों का सामान, क़ालीन सब कुछ धोया। प्रभावितों को बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम किया। हमारे प्रिय शहीद (जनरल क़ासिम सुलैमानी) की शहादत की दुखद घटना के समय भी जनता ने बड़ा महान कारनामा अंजाम दिया। दसियों मिलियन की संख्या में अपनी भागीदारी से सारी दुनिया को चकित कर दिया। तेहरान में जिस तरह लोग एकत्रित हुए, या क़ुम, अहवाज़, इस्फ़हान, मशहद, तबरेज़ और किरमान में जिस पैमाने पर लोग जमा हुए, दुनिया में कहीं भी आम तौर पर इतने बड़े पैमाने पर, इतनी शिद्दत और इस भावना के साथ लोग एकत्रित नहीं होते। हमारे इतिहास में भी इसका कोई अन्य उदाहरण नहीं है। जनता की भागीदारी, व्यापक उत्साह, जनता का यह जताना कि वह इन चीज़ों से लगाव रखती है, यह चीज़ें देश की आबरू और ईरानी राष्ट्र की प्रतिष्ठा के लिए बड़ा महत्व रखती हैं। इस हालिया बीमारी कोरोना के मामले में भी त्याग की भावना इतनी प्रबल थी कि वह लोग भी जो देश से बाहर हैं, बरबस प्रशंसा करने लगे। पहले नंबर पर मेडिकल टीमें, यूनिवर्स्टियों और मदरसों की छात्रों और दूसरे अनेक क्षेत्रों के लोग जो इन बीमारों की देखभाल और इलाज में लग गए, यह सब सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ाने वाली चीज़ें हैं। वे चिकित्सकों का हाथ बंटाने के लिए आगे आए। सपोर्ट का काम करने वाली टीमें, वे लोग जिन्होंने अपने कारख़ानों यहां तक कि घरों को बीमारों या आम लोगों की ज़रूरत की चीज़ें जैसे दस्ताने या मास्क आदि तैयार करने के लिए विशेष कर दिया। सेवाएं देने वाली टीमें, जैसे वे लोग जो सड़कों और उन जगहों पर जहां लोगों की आवाजाही है एंटी बैक्टेरियल पदार्थ के छिड़काव में लग गए। या कुछ और टीमें जैसे वे युवा जो बूढ़े लोगों की मदद के लिए उठ खड़े हुए, उनके घरों में गए और उनके लिए ख़रीदारी का काम किया। या वे लोग जिन्होंने आम जनता की ज़रूरत की चीज़ें मुफ़्त में बांटीं। मुफ़्त दस्ताने, मुफ़्त मास्क। कुछ ने कठिनाई में पड़ जाने वाले दुकानदारों की मदद की। दुकान का किराया नहीं लिया, अपना कर्ज़ वापस मांगने के बजाए टाल दिया। इसी तरह की दूसरी बहुत सी सेवाएं जो अंजाम दी गईं। यह सब सुंदरताएं हैं जो कठिन घटनाओं के समय नज़र आती हैं। ईरानी राष्ट्र ने इन समूहों के रूप में इन कामों के ज़रिये, जिनमें केवल कुछ का मैंने उल्लेख किया, अपने गुणों का परिचय दिया है। मैं उन तमाम लोगों का, जिनका मैंने उल्लेख किया और नाम लिया, दिल से और पूरी निष्ठा के साथ आभार व्यक्त करता हूं और यह ख़ुशख़बरी देता हूं कि ईश्वरीय इनाम उनकी प्रतीक्षा में है, अब चाहे वह इस दुनिया में मिलने वाला इनाम हो या परलोक में प्रदान किया जाने वाला इनाम। यह एक कठिन परीक्षा थी। सन 1398 की परीक्षाएं बहुत कठिन थीं लेकिन इस भावना के साथ कठिनाइयों पर क़ाबू पाना और उन्हें पार करना किसी भी राष्ट्र को बलवान बनाता है। कोई भी राष्ट्र विलासिता और आराम पसंदी से कहीं नहीं पहुंच सकता। कठिनायों से लड़ने, कठिनाइयां सामने आने पर अपना जज़्बा क़ायम रखने और कठिनाइयों पर क़ाबू पा लेने की स्थिति में, और इंशाअल्लाह ईरानी राष्ट्र यह क़ाबू पा चुका है और आगे भी कठिनाइयों को क़ाबू में करता रहेगा, राष्ट्रों को ताक़त और गरिमा प्राप्त होती है। इन घटनाओं में चाहे वह प्राकृतिक घटनाएं जैस बाढ़ और भूकंप आदि हों या दूसरों की ओर से थोपी गई घटनाएं जैसे प्रतिबंध वग़ैरा हों, एक बिंदु और भी है कि वह इंसान को उसकी कमज़ोरियों से अवगत करा देती हैं, चाहे वह हमारी प्राकृतिक कमज़ोरियां हों यानी इंसान को एहसास हो जाए कि घमंड करने का कोई तुक नहीं है, हम सब में कमज़ोरियां हैं, हम अभेद्य नहीं हैं, या फिर वह कमज़ोरियां हों जो घटनाओं का सामना होने पर इंसान के अंदर अपने आप पैदा हो जाती हैं। हम अपनी कमज़ोरियों को पहचानें। इंसान घमंड और लापरवाही से बाहर निकले। ईश्वर की ओर उन्मुख हो, ईश्वर से मदद मांगे।

"हे पालनहार दूसरों की चौखट पर जाने वाले नाकाम हुए, तेरे अलावा किसी की सेवा में पहुंचने वाले नुक़सान में रहे, तेरे अलावा किसी से आशा रखने वाले निराश हुए।"

यह रजब के महीने की दुआएं हैं। केवल अल्लाह का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए। किसी और का दरवाज़ा खटखटाएंगे तो मायूसी हाथ लगेगी। अगर ईश्वर के अलावा किसी के सामने हाथ फैलाएंगे तो हमें ख़ाली हाथ लौटना पड़ेगा। दुनिया के सभी साधन ईश्वर के हाथ में हैं। वह साधनों की रचना करने वाला है। हमें निश्चित रूप से इन साधनों की मदद लेना चाहिए, इन साधनों को प्रयोग करना चाहिए लेकिन नतीजे और असर के लिए अल्लाह से दुआ मांगनी चाहिए। एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है।

सन 1399 (हिजरी शम्सी 21 मार्च 2020 से 20 मार्च 2021 तक) जो अब शुरू हो रहा है, उसके बारे में अल्लाह से हमारी पहली दुआ यह होनी चाहिए कि इसे बड़ी सफलताओं का साल क़रार दे और हज़रत इमामे ज़माना की सेवा में, जो इस नाव के खेवनहार हैं, हम यह विनती करना चाहेंगे कि वे अपने इस देश को साहिल पर पहुंचाएं, ईरान के मोमिन राष्ट्र का समर्थन करें, मदद करें। ईरानी राष्ट्र से यह कहना चहूंगा कि जिस तरह अनेक प्रकार की घटनाओं का सामना होने पर, केवल सन 1398 (हिजरी शम्सी ही नहीं) बल्कि इन बीते हुए तमाम वर्षों के दौरान अलग अलग प्रकार की घटनाओं में उसने साहस दिखाया और भरपूर उत्साह से उनका मुक़ाबला किया, भविष्य में भी उसी जज़्बे और आशा के साथ सभी घटनाओं का सामना करे और यक़ीन रखे कि कठिनाइयां गुज़र जाएंगी। निश्चित रूप से कठिनाई के बाद आसानी होती है और आसानी अब ईरानी राष्ट्र की प्रतीक्षा में है। इसमें कोई संदेह नहीं है। मैं इस बात का समर्थन नहीं करता कि कुछ लोग यह सोचें कि देश की व्यवस्था के किसी एक भाग में ढिलाई हो रही है। हम बहुत क़रीब से निरीक्षण कर रहे हैं, देख रहे हैं, सब काम में लगे हुए हैं, सब काम और मेहनत में लगे हुए हैं, हरेक अपनी क्षमता के अनुसार। वैज्ञानिक और शोध टीमें अलग अंदाज़ से, सामाजिक कार्यकर्ता अलग अंदाज़ से, सरकारी अधिकारी और न्यायिक अधिकारी अपने अपने अंदाज़ से। इंशाअल्लाह ईश्वर इन प्रयासों में बरकत देगा और ईरानी राष्ट्र इस मोड़ से सुरक्षा और प्रतिष्ठा के साथ आगे बढ़ जाएगा।

अब इस साल का नारा! हमने सन 1398 (हिजरी शम्सी) को पैदावार के विकास का साल घोषित किया था। मैं अपनी प्यारी जनता को बताना चाहता हूं कि इस नारे पर व्यवहारिक रूप से काम हुआ। शुरू में विशेषज्ञों ने इसका स्वागत भी किया और कहा कि उत्पादन ही सबसे बुनियादी चीज़ है, इसके साथ ही व्यवहारिक चरण में भी इस पर काम हुआ। ठोस रिपोर्टों के अनुसार, जो मेरे पास हैं, देश के उत्पादन क्षेत्र में नई सक्रियता पैदा हुई। कुछ कारख़ाने जो ठप्प पड़े थे, बंद हो गए थे, वे काम करने लगे। कुछ कारख़ाने, जहां क्षमता से कम उत्पादन हो रहा था, वहां उत्पादन की मात्रा अच्छी हो गई। नालेज बेस्ड कंपनियां मैदान में आ गईं। विभिन्न संस्थाओं ने मेहनत की, काम किया तो उत्पादन के क्षेत्र में चहल-पहल पैदा हुई। बड़ा काम हुआ। रिसर्च का काम जो उत्पादन की बुनियाद है, देश के भीतर इस साल बड़ी गंभीरता के साथ आगे बढ़ा और हमने इसके नमूने देखे। देश में यह सारे काम हुए। ऐसा नहीं है कि काम नहीं हुआ लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि जो काम हुआ वह देश की ज़रूरत का शायद दसवां हिस्सा भी न हो। अलबत्ता मैं दसवां हिस्सा जो कह रहा हूं कि तो यह सटीक आंकड़ों के आधार पर नहीं कह रहा हूं बल्कि मेरा अनुमान है कि यह दसवां हिस्सा है। यानी शायद अभी दस गुना काम होना बाक़ी है। चाहे वह रिसर्च का काम हो, या उत्पादन का काम हो या इसी तरह के दूसरे विभिन्न काम हों जिनके नतीजे में उत्पादन के विकास का असर आम जनता के जीवन में नज़र आएगा। सन 1398 (हिजरी शम्सी) में पैदावार के क्षेत्र में हरकत पैदा हुई, यह क्षेत्र सक्रिय हुआ और किसी हद तक आगे बढ़ा लेकिन जनता की ज़िंदगी में इसका असर महसूस नहीं हुआ। हमें उत्पादन को उस स्थान पर ले जाना है कि जनता के जीवन में उसका असर नज़र आए। अलबत्ता देश को विभिन्न आर्थिक समस्याओं का सामना है। बैंकिंग के सुधार का विषय है, टैक्स और कस्टम ड्यूटी में सुधार का विषय है, व्यापारिक माहौल को बेहतर बनाने का विषय है मगर उत्पादन की भूमिका अलग और बेमिसाल है। अगर हम देश के भीतर मौजूद बड़े बाज़ार को नज़र में रखकर उत्पादन को आगे ले जा सकें, हालांकि उत्पादन को बिक्री और विदेशी बाज़ार की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन बाहरी बाज़ारों से संबंध रखने के साथ ही हमारा असली बाज़ार देश के अंदर आठ करोड़ की आबादी के मद्देनज़र आंतरिक बाज़ार है। अगर इंशाअल्लाह उत्पादन के क्षेत्र को हरकत में लाना हमारे लिए संभव हो गया और हम इसे आगे ले जा सके तो आर्थिक समस्याएं निश्चित रूप से समाप्त हो जाएंगी और यह प्रतिबंध जो लगाए गए हैं, हमारे फ़ायदे में रहेंगे। बेशक अभी तो इनसे नुक़सान पहुंचा है लेकिन इसके साथ ही जो फ़ायदे हासिल हुए हैं यानी हम जो अपने आंतरिक संसधानों की चिंता में लग गए, ज़िंदगी की ज़रूरत की चीज़ें और देश की ज़रूरत की चीज़ें आंतरिक संसाधनों की मदद से तैयार करने लगे वह हमारे लिए बहुत फ़ायदेमंद है। इंशाअल्लाह यह सिलसिला जारी रहेगा। तो हमें अभी पैदावार की और भी ज़रूरत है। पिछले साल हमने कहा उत्पादन का विकास और इस साल में हम कहना चाहते हैं उत्पादन की तेज़ रफ़्तार प्रगति। यह साल उत्पादन में तेज़ रफ़्तार प्रगति का साल है। यही इस साल का नारा है। जो संबंधित लोग हैं वे इस प्रकार से काम करें कि इंशाअल्लाह उत्पादन को तेज़ रफ़्तार प्रगति दे और आम जनता के जीवन में इंशाअल्लाह साफ़ महसूस होने वाला बदलाव आए। अलबत्ता इसके लिए योजना की ज़रूरत है। प्लानिंग की संस्था अलग अंदाज़ से, संसद अलग अंदाज़ से, उसके शोध केन्द्र अलग अंदाज़ से, न्यायपालिका अलग अंदाज़ से, क्योंकि न्यायपालिका का भी इसमें रोल है, नालेज बेस्ड कंपनियां अलग अंदाज़ से, युवा और सृजनात्मक क्षमता रखने वाले लोग अलग अंदाज़ से, देश में जिनकी संख्या अच्छी ख़ासी है, इस साल यानी 1398 (हिजरी शम्सी) में और इससे पहले वाले साल में इस प्रकार की कुछ टीमों के साथ मेरी बहुत अच्छी और उपयोगी मुलाक़ातें हुईं, उन्हें मैंने क़रीब से देखा, उनकी बातों को क़रीब से सुना, काम में रुचि रखने वाले, लगन से काम करने वाले युवा, आशा से भरे हुए, ऊर्जा से भरे हुए, जोश से भरे हुए क्षमता और रचनात्मकता से भरे हुए युवा, ईश्वर की कृपा से यह सब मौजूद हैं। यह सब के सब योजनाएं तैयार करने में शामिल हों और काम इंशाअल्लाह योजना के अनुसार आगे बढ़े।

हम आशा करते हैं कि यह साल आप सबके लिए बरकत वाला साल हो, पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी के एलान के शुभ दिन की आप सबको मुबारकबाद। इंशाअल्लाह ईश्वर की कृपा आप सब पर हो और ईश्वर की ओर ईरानी राष्ट्र के ध्यान, प्रार्थना और आध्यात्मिकता में लगातार वृद्धि हो।

आप सब पर सलाम हो और ईश्वर की कृपा और दया हो।


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