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आयत क्या कहती हैं? ये ईश्वर का पक्का वादा है कि वो भले कर्म करने वालों को पारितोषिक और काफ़िरों को दंड देगा।

आयत क्या कहती हैं? ये ईश्वर का पक्का वादा है कि वो भले कर्म करने वालों को पारितोषिक और काफ़िरों को दंड देगा।

ईश्वर का इन्कार या कुफ़्र, मनुष्य के समक्ष हर प्रकार की बुराई व पाप का द्वार खोल देता है।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक चार का अनुवादः

उसकी ओर तुम सबकी वापसी है, ये ईश्वर का पक्का वादा है। वही सृष्टि का आरंभ करता है और फिर उसे लौटाता है ताकि ईमान लाने और भलेकर्म करने वालों को न्यायपूर्ण बदला दे और जिन लोगों ने उसका इन्कार किया है उनके लिए जलाने वाला गर्म पेय और उनके कुफ़्र के कारण अत्यंत पीड़ादायक दंड है।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

वो भले कर्म करने वालों को पारितोषिक और काफ़िरों को दंड देगा, अलबत्ता पूर्णतः न्याय के आधार पर कि जो ईश्वर की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. प्रलय में ईश्वर का पूर्ण न्याय सामने आएगा क्योंकि संसार में कर्मों के पूर्ण पारितोषिक या दंड की क्षमता नहीं है।

  2.  

    जिस प्रकार से कि संसार में संपूर्ण सृष्टि की रचना मनुष्य के लिए की गई है उसी प्रकार प्रलय में भी सृष्टि की पुनः रचना मनुष्यों को पारितोषिक देने या दंडित करने के लिए होगी।


     

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