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आयत क्या कहती हैं? युद्ध व रक्तपात, दूसरों पर वर्चस्व के लिए ग़ैर ईश्वरीय सरकारों की शैली है।

आयत क्या कहती हैं? युद्ध व रक्तपात, दूसरों पर वर्चस्व के लिए ग़ैर ईश्वरीय सरकारों की शैली है।

सांसारिक मायामोह में ग्रस्त शासक होते हैं जो अपने व्यक्तिगत हितों की प्राप्ति और धन व शक्ति के लिए हर काम करने को तैयार रहते हैं।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 34 और 35 का अनुवाद:

(बिल्क़ीस ने) कहा, जब सम्राट किसी बस्ती में घुसते हैं तो उसे तबाह कर देते हैं और वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपमानित कर देते हैं और वे (सदैव) ऐसा ही करते हैं। और मैं उनके पास एक (मूल्यवान) उपहार भेजती हूँ; फिर देखती हूँ कि दूत क्या (उत्तर) लेकर लौटते हैं?

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

कभी कभी दूसरों की ओर से मिलने वाले उपहार रिश्वत होते हैं ताकि हमारी परीक्षा ली जा सके या किसी के अधिकार का हनन किया जा सके।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. युद्ध व रक्तपात, दूसरों पर वर्चस्व के लिए ग़ैर ईश्वरीय सरकारों की शैली है।

  2. इस बात की ओर से सचेत रहना चाहिए कि कभी कभी दूसरों की ओर से मिलने वाले उपहार रिश्वत होते हैं ताकि हमारी परीक्षा ली जा सके या किसी के अधिकार का हनन किया जा सके।


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