?>

आयत क्या कहती हैं? प्रलय में निश्चेतना और संसार का मायामोह व्यक्ति एवं समाज की तबाही का मार्ग प्रशस्त करता है।

आयत क्या कहती हैं? प्रलय में निश्चेतना और संसार का मायामोह व्यक्ति एवं समाज की तबाही का मार्ग प्रशस्त करता है।

स्वभावाविक है कि इस प्रकार के लोग विभिन्न प्रकार की बुराइयों में ग्रस्त हो जाते और प्रलय में नरक में जाएंगे।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक सातवीं और आठवीं का अनुवादः

निश्चित रूप से जिन लोगों को (प्रलय में) हमारी भेंट की आशा नहीं है और (इस) संसार के जीवन पर (ही) प्रसन्न हो गए हैं और उसी पर संतुष्ट हैं और जो लोग हमारी निशानियों की ओर से निश्चेत हैं,  वे ऐसे लोग हैं जिनके कर्मों के आधार पर उनका ठिकाना नरक है। 

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

जो लोग इन निशानियों की ओर से निश्चेत हैं और इन्हें ईश्वर के अस्तित्व और उसकी शक्ति व तत्वदर्शिता का चिन्ह नहीं मानते वे मायामोह में ग्रस्त हैं और इस नश्वर एवं अल्पकालीन संसार पर संतुष्ट व प्रसन्न रहते हैं।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. प्रलय में निश्चेतना और संसार का मायामोह व्यक्ति एवं समाज की तबाही का मार्ग प्रशस्त करता है।

  2. नरक, स्वयं मनुष्यों के कर्मों का फल है कि जो प्रलय में आग के रूप में प्रकट होगा।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*