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आयत क्या कहती हैं? दूसरों के दावे और प्रचार हमें सच की जांच से न रोकें।

आयत क्या कहती हैं? दूसरों के दावे और प्रचार हमें सच की जांच से न रोकें।

ईश्वर की उपासना और नसीहत के लिए दूसरों को पत्र लिखना, ईश्वरीय पैग़म्बरों की एक शैली रही है।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 27 व 28 का अनुवाद:

(सुलैमान ने हुदहुद से) कहा, शीघ्र ही हम देख लेते हैं कि तूने सच कहा या तू झूठों में से है। मेरा यह पत्र लेकर जा और इसे उन लोगों की ओर डाल दे। फिर उनके पास से हट जा और देख कि वे क्या उत्तर देते हैं।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

विरोधियों के बारे में किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उन्हें नसीहत करने और उन्हें सही बात से अवगत कराने के लिए क़दम उठाना चाहिए और उनके उत्तर के अनुसार ही आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. लोगों को सत्य धर्म का निमंत्रण देने के लिए परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए विभिन्न साधनों से लाभ उठाना चाहिए। कभी भाषण करके, कभी पत्र लिख कर और कभी प्रतिनिधि भेज कर यह काम करना चाहिए।
  2. दूसरों के दावे और प्रचार हमें सच की जांच से न रोकें। हुदहुद ने दावा किया कि उसकी ख़बर सच्ची है पर हज़रत सुलैमान ने कहा कि उसकी सच्चाई की जांच की जाएगी।

  3. विरोधियों के बारे में किसी भी प्रकार के निर्णय से पहले उन्हें नसीहत करने और उन्हें सही बात से अवगत कराने के लिए क़दम उठाना चाहिए और उनके उत्तर के अनुसार ही आवश्यक कार्यवाही करनी चाहिए।


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