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आयत क्या कहती हैं? जो लोग अत्याचार एवं पाप पर आग्रह करते हैं स्वाभाविक रूप से ईश्वर उन्हें उनकी स्थिति पर छोड़ देता है।

आयत क्या कहती हैं? जो लोग अत्याचार एवं पाप पर आग्रह करते हैं स्वाभाविक रूप से ईश्वर उन्हें उनकी स्थिति पर छोड़ देता है।

बहुत से लोग ईश्वर द्वारा दिए गए इस अवसर से अनुचित लाभ उठाते हैं और उसका प्रयोग पाप करने के लिए करते हैं।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 11 का अनुवादः

और यदि ईश्वर (इस संसार में बुरे) लोगों को दंडित करने में जल्दी करता, जैसा कि वे भलाई (और सांसारिक माल) की प्राप्ति के लिए जल्दी करते हैं जो उनकी आयु समाप्त हो चुकी होती, तो प्रलय में हमारी भेंट की आशा न रखने वालों को हम उनकी दशा पर छोड़ देते हैं ताकि वे अपनी उद्दंडता में चकराते रहें।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

लोगों के संबंध में ईश्वर की एक परंपरा उन्हें अवसर देने की है ताकि हर व्यक्ति अपनी इच्छा और अधिकार के साथ अपने मार्ग का चयन करे और उसके अनुसार कर्म करे।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. इस संसार में काफ़िरों और अत्याचारियों का दंडित न होना उनकी सत्यता या ईश्वर की अक्षमता की निशानी नहीं है बल्कि ईश्वर की ओर से मिलने वाले अवसर को दर्शाता है।

  2. जो लोग ईश्वर को छोड़कर अपने आप में व्यस्त रहते हैं वे लक्ष्यहीनता में ग्रस्त हो जाते हैं।


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