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आयत क्या कहती हैं? जो कोई भला कर्म करेगा उसे उससे दस गुना अधिक पारितोषिक मिलेगा।

आयत क्या कहती हैं? जो कोई भला कर्म करेगा उसे उससे दस गुना अधिक पारितोषिक मिलेगा।

ईश्वर के मार्ग में दान दक्षिणा के पारितोषिक को सात सौ गुना तक बताया गया है।

सूरए यूनुस की आयत क्रमांक 26 का अनुवादः

भलाई करने वालों के लिए अधिक बड़ी भलाई होगी और उनके चेहरों पर अपमान की धूल नहीं बैठेगी। ऐसे ही लोग स्वर्ग में जाने वाले हैं जहां वे सदैव रहेंगे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

ईश्वर ने अनंतकालीन स्वर्ग को भलाई करने वालों के लिए बनाया है और उनका पारितोषिक उनके कर्मों से कहीं अधिक बेहतर होगा।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. ईश्वर निमंत्रण भी देता है और मार्गदर्शन भी करता है, प्रेरित व प्रोत्साहित भी करता है और गंतव्य तक पहुंचने वालों को अधिक बेहतर पारितोषिक देता है, तो हम उसके निमंत्रण को स्वीकार क्यों न करें और दूसरों के मार्ग पर क्यों चलें?

  2. भले कर्म करने से अनुकंपाओं से भरे ईश्वर के स्वर्ग में अमर जीवन प्राप्त होता है।


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