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आयत क्या कहती हैं? ग़लत काम अगर जान बूझ कर न भी किया गया हो तब भी उसके स्वाभाविक परिणाम तो सामने आते ही हैं।

आयत क्या कहती हैं? ग़लत काम अगर जान बूझ कर न भी किया गया हो तब भी उसके स्वाभाविक परिणाम तो सामने आते ही हैं।

शक्ति पर कृतज्ञता, अत्याचारग्रस्त लोगों की मदद करके और अत्याचारियों व पापियों से सहयोग न करके जतानी चाहिए।

सूरए क़सस की आयत क्रमांक 16 व 17  का अनुवाद:

मूसा ने कहा हे मेरे पालनहार! मैंने अपने आप पर अत्याचार किया। अतः तू मुझे क्षमा कर दे। तो ईश्वर ने उन्हें क्षमा कर दिया। निश्चय ही वह बड़ा क्षमाशील व अत्यन्त दयावान है। उन्होंने कहा हे मेरे पालनहार! तूने मुझे जो अनुकम्पा प्रदान की है, उसके लिए मैं कभी अपराधियों का सहायक नहीं बनूँगा।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

अत्याचारियों से ईमान वालों को मुक्ति दिलाते समय सावधानी से काम लेना चाहिए कि यथासंभव कोई ख़तरा सामने न आए और कोई अनचाहा दुष्परिणाम गले न पड़ जाए।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. अत्याचारियों से ईमान वालों को मुक्ति दिलाते समय सावधानी से काम लेना चाहिए कि यथासंभव कोई ख़तरा सामने न आए और कोई अनचाहा दुष्परिणाम गले न पड़ जाए।

  2. ग़लत काम अगर जान बूझ कर न भी किया गया हो तब भी उसके स्वाभाविक परिणाम तो सामने आते ही हैं।

  3. शक्ति पर कृतज्ञता, अत्याचारग्रस्त लोगों की मदद करके और अत्याचारियों व पापियों से सहयोग न करके जतानी चाहिए।


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