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आयत क्या कहती हैं? ईश्वर उपासना के योग्य है जो सृष्टि की हर प्रकट व गुप्त बात से अवगत है।

आयत क्या कहती हैं? ईश्वर उपासना के योग्य है जो सृष्टि की हर प्रकट व गुप्त बात से अवगत है।

आकाश और धरती से गुप्त वस्तुओं को बाहर निकालने का एक उदाहरण वर्षा और पौधे हैं।

सूरए नम्ल की आयत क्रमांक 25 व 26 का अनुवाद:

(शैतान ने उन्हें इस प्रकार बहका रखा है) ताकि वे अल्लाह को सजदा न करें जो आकाशों और धरती की छिपी चीज़ें बाहर निकालता है और जो कुछ तुम छिपाते हो और जो कुछ प्रकट करते हो उसे जानता है। वही ईश्वर कि उसके अतिरिक्त कोई पूज्य नहीं (और) वह महान सिंहासन का पालनहार है।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

आरंभ में पौधा, दाने के भीतर छिपा होता है लेकिन ईश्वर की शक्ति व युक्ति से एक सुंदर कोंपल के रूप में दाने से बाहर निकलता है।

 

इन आयतों से मिलने वाले पाठ:

  1. उपासना एक स्वाभाविक काम है।
  2. पूरे मानव इतिहास में वनस्पतियों, पशुओं और इंसानों जैसी चीज़ों को पवित्र व प्रभावी समझ कर उनकी पूजा की जाती रही है।

  3. सूरज जैसे प्राकृतिक तत्व, वनस्पतियों के उगने और जीवों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका रखते हैं किंतु वे अपने और अपनी विशेषताओं के रचयिता नहीं हैं।

  4. सूरज के सामने नहीं बल्कि सूरज की रचना करने वाले के सामने नतमस्तक होना चाहिए।

  5. लोगों की दृष्टि में बुराइयों को अच्छा बना कर पेश करने में शैतान का उद्देश्य यह है कि उन्हें सृष्टि के रचयिता के समक्ष नतमस्तक होने से रोक दे जबकि अनन्य ईश्वर का सजदा, ईश्वर की उपासना का प्रतीक है।

  6. पूरा संसार ईश्वर के सामने है और कोई भी और कुछ भी उससे छिपा हुआ नहीं है।


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