?>

आजकल

आजकल

यमन के बारे में राष्ट्र संघ का एक शर्मनाक फ़ैसला जिसकी वजह से इस देश के बच्चे बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से सामने आने वाली एक ख़बर ने यमन के मज़लूम लोगों के दुखी दिल में एक और घाव बढ़ा दिया। सऊदी अरब के युद्धक विमानों की बमबारी में ध्वस्त होने वाले घरों के मलबे से यमनी औरतों व बच्चों के शव निकाले जाने के चित्र अब भी पूरी दुनिया में देखे जा रहे हैं और पिछले बरसों के दौरान इस देश के बच्चों के जघन्य जनसंहार और ज़ालिमाना घेराव के अमानवीय परिणामों की हज़ारों वीडियो क्लिप्स से दुनिया भर के लोगों की आंखें नम हैं। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र संघ ने 18 जून सन 2021 को यमन के अंसारुल्लाह संगठन का नाम, बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों की सूची में शामिल कर दिया। सैन्य झड़पों वाले इलाक़ों में बच्चों के अधिकारों का हनन करने वाले सबसे बुरे देश के रूप में सऊदी अरब और साथ ही सऊदी गठबंधन में शामिल सदस्य देशों का नाम राष्ट्र संघ की काली सूची से हटाए जाने के बाद पूरी दुनिया में संयुक्त राष्ट्र संघ के क्रियाकलाप पर थू-थू होने लगी है।

यमन के स्वास्थ्य मंत्री ताहा अलमुतवक्किल ने बताया है कि सऊदी अरब के नेतृत्व वाले हमलावर सैन्य गठजोड़ ने अब तक कम से कम 3 हज़ार यमनी बच्चों को शहीद और 4 हज़ार से अधिक को घायल व अपंग किया है। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ़) ने भी यमन के उन चार लाख से अधिक बच्चों की, जो कुपोषण का शिकार हैं और 80 हज़ार को मौत का ख़तरा लगा हुआ है, मदद रोक दी है। उन्होंने बताया कि उत्तरी यमन के सादा प्रांत में रहने वाले बहुत से बच्चे सऊदी गठबंधन के हमलों की वजह से जेनेटिक विकार में ग्रस्त हो गए हैं। सादा के अनेक बच्चे आवश्यक उपचार से भी वंचित हैं जबकि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं ज़रूरी चिकित्सा उपकरणों व दवाओं को सादा पहुंचने से रोक कर इन बच्चों की मौत का कारण बन रही हैं। यमन के सैकड़ों बच्चे संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा अपनी ज़िम्मेदारियां पूरी न करने के कारण मौत का शिकार हो चुके हैं।

जब 20 नवम्बर सन 1989 को बच्चों के नागरिक, राजनैतिक, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा केा अंतर्राष्ट्रीय घोषणापत्र संयुक्त राष्ट्र संघ में पारित हुआ और धीरे धीरे अधिकतर देशों ने इस घोषणापत्र के पालन के लिए ख़ुद को प्रतिबद्ध कर लिया तो सोचा जा रहा था कि सरकारें और राष्ट्र बच्चों के अनेक दुखों को दूर करने और उनके जीवन का समर्थन करने के पर्याप्त ज्ञान व साधनों से उनकी मानवीय क्षमताओं के विकास और उनके अधिकारों की रक्षा में मदद लेंगे और दुनिया को इसके बाद उन बच्चों के आंसू नहीं देखने पड़ेंगे जो हिंसा और वर्चस्ववाद के लिए किए जाने वाले हमलों का शिकार होते हैं।

बाल अधिकारों के कन्वेंशन ने बच्चों के अधिकारों व स्वास्थ्य की पहचान के लिए एक नया अवसर उपलब्ध कराया और इसे मानवाधिकार का सबसे ज़्यादा स्वीकार्य दस्तावेज़ माना गया लेकिन तीसरी सहस्त्राब्दी में भूखे, घायल, बीमार और अनपढ़ बच्चों का वुजूद, सभ्य इंसान के लिए शर्मनाक है। ऐसे समय में जब विभिन्न प्रकार के हथियार बनाने में अरबों-खरबों डाॅलर ख़र्च किए जा रहे हैं, बहुत सारे बच्चे भूख, कुपोषण, इलाज योग्य बीमारियों, भेदभाव और अन्याय के चलते अपनी जान से हाथ धो रहे हैं। बहुत सारे बच्चे स्कूल जाने के बजाए सड़कों, कारख़ानों और खेतों में काम कर रहे हैं। बहुत से बच्चों का यौन शोषण किया जाता है और सबसे बढ़ कर यह कि तबाही फैलाने युद्धों की वजह से बच्चों को बहुत ज़्यादा नुक़सान होता है।

यह ऐसी हालत में है कि जब हम आए दिन सुनते और पढ़ते रहते हैं कि बच्चे बेगुनाह, मासूम, कमज़ोर, दूसरों पर निर्भर और साथ ही जिज्ञासू, सक्रिय और आशा से भरे होते हैं और उनका समय ख़ुशी, दोस्ती, खेल-कूद, पढ़ाई और प्रगति में बीतना चाहिए। उनके भविष्य की रूप-रेखा संतुलित रूप से और सहयोग के माध्यम से तैयार की जानी चाहिए और उनके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को समाज के अन्य वर्गों से अधिक अहमियत दी जानी चाहिए लेकिन राजनैतिक खेल ने, अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं तक में इन बातों को सिर्फ़ सुंदर शब्दों में बदल दिया है और जिस चीज़ पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जाता, वह बच्चे का स्वास्थ्य और उसके अधिकारों की रक्षा है।

सभी को याद है कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 2 जून सन 2016 को एक रिपोर्ट जारी करके यमनी बच्चों के जनसंहार के कारण सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का नाम, "बाल अधिकारों का हनन करने वालों की काली सूची" में शामिल कर दिया था और इस गठबंधन को यमन के 60 फ़ीसदी बच्चों की हत्या का ज़िम्मेदार क़रार दिया था लेकिन सऊदी गठबंधन के अपराधों पर उसकी यह आलोचना ज़्यादा दिनों तक नहीं चल सकी और आले सऊद की ओर से धमकी दिए जाने के कारण संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्कालीन महासचिव बान की मून ने एक ही हफ़्ते बाद 9 जून को सऊदी अरब का नाम बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों की काली सूची से निकाले जाने की सूचना दी और अपने इस तर्कहीन काम से विश्व जनमत को आश्चर्यचकित कर दिया। आले सऊद ने बान की मून को धमकी दी थी कि अगर रियाज़ का नाम उस लिस्ट से नहीं निकाला गया तो वह, राष्ट्र संघ को उसकी ओर से दिया जाने वाला चंदा बंद कर देगा।

उस वक़्त यमन के एक बच्चे ने संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के नाम एक दर्द भरे ख़त में लिखा थाः "जब मैं बड़ा हो जाऊंगा और मेरी पढ़ाई पूरी हो जाएगी तो मैं राष्ट्र संघ का महासचिव बनूंगा और सऊदी अरब की निंदा करूंगा क्योंकि उसने स्कूल में मेरे साथ बैठने वाले मेरे दोस्त अहमद का मार डाला। अगर सऊदी अरब मुझे धमकी देगा तब भी मैं उससे नहीं डरूंगा क्योंकि उस वक़्त मैं बड़ा हो चुका हूंगा। मैं अपना नाम नहीं लिखूंगा क्योंकि सऊदी अरब मुझे मार डालेगा और मैं मरना नहीं चाहता।" इस समय भी यमन के हज़ारों बच्चों ने राजधानी सनआ के सबईन स्क्वायर पर इकट्ठा हो कर अंसारुल्लाह संगठन का नाम बच्चों के अधिकारों का हनन करने वालों की सूची में शामिल किए जाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और संयुक्त राष्ट्र संघ के इस क़दम की आलोचना की। इन बच्चों ने एक बयान जारी करके कहाः "हमें अच्छी तरह पता है कि हत्यारा कौन है और हमारा घेराव करके कौन हमें भूखा मारना चाहता है। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव, हमारे इस दुख व दर्द के मुख्य कारकों के अस्ली और बड़े सहभागी हैं।"

आज हम न केवल यमनी बच्चों के व्यापक जनसंहार के साक्षी हैं बल्कि आंतरिक व अंतर्राष्ट्रीय टकराव में बड़े पैमाने पर उनके अधिकारों के हनन के भी साक्षी हैं। सीरिया,यमन और फ़िलिस्तीन इस समय बच्चों की क़ुरबानी के स्थान बने हुए हैं। जिस चीज़ पर ध्यान देने की ज़रूरत है वह बाल अधिकारों की रक्षा के संबंध में अंतर्राष्ट्रीय संधियों और मानवता प्रेमी संगठनों की भूमिका है। खेद की बात है कि पेट्रो डाॅलर के लोभ में अंतर्राष्ट्रीय संगठन इस भूमिका की अनदेखी कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में यमन के लोग केवल आले सऊद के हमलों की क़ुरबानी नहीं हैं। बहुत से बच्चे स्वतंत्रता प्रेम और मानवता प्रेम का दावा करने वाली उन सरकारों के मौन का भी शिकार बन रहे हैं जिन्होंने अपने हितों की वजह से आले सऊद के अपराधों की ओर से आंखें मूंद रखी हैं। वास्तव में जो चीज़ इस बात का कारण बनी है कि आले सऊद यमन में अपने अपराध जारी रखें और यमनी जनता की मज़लूमियत की आवाज़ न सुनी जाए वह सऊदी अरब के मुक़ाबले में संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारियों की ढिलाई है। इसी परिप्रेक्ष्य में राष्ट्र संघ के महासचिव अंटोनियो गुटेरस द्वारा यमन के अंसारुल्लाह संगठन का नाम बाल अधिकारों के हननकर्ताओं की लिस्ट में शामिल किए जाने ने यमन में अपने अपराध जारी रखने में सऊदी अरब के दुस्साहस में अहम भूमिका निभाई है।

गुटेरस ने ख़ुद ही जून सन 2019 में सुरक्षा परिषद में खुल कर कहा था कि यमन में सऊदी अरब के हमलों में आम नागरिकों की जो मौतें हुई हैं उनमें पचास प्रतिशत बच्चे हैं। दसियों हज़ार यमनी बच्चे यमन युद्ध में अपने पिता या माता के मारे जाने की वजह से अनाथ हो गए हैं जबकि हज़ारों को इलाज के लिए विदेश जाने की ज़रूरत है जो उनके लिए संभव नहीं है। दूसरी तरफ़ सऊदी अरब की बमबारी की वजह से स्कूलों के ध्वस्त हो जाने की वजह से लाखों यमनी बच्चे शिक्षा से वंचित हो गए हैं और अपने घर और शहर से निकल कर शरणार्थियों के रूप में कैम्पों में रह रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित संस्थाओं जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ़ ने भी सचेत किया है कि यमन के पांच साल से कम उम्र के 50 प्रतिशत बच्चों को सन 2021 में कुपोषण का सामना है। इसी तरह यमन पर सऊदी गठबंधन के हमलों के जारी रहने की वजह से इस देश की जनता को सूखे और एक मानवीय त्रासदी का सामना है जिसका पिछली सदियों में कोई उदाहरण नहीं मिलता।

इन सबके बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ ने सऊदी अरब के अपराधों के जारी रहने के लिए एक सुरक्षित रास्ता निकाल रखा है और यह देश इसी समर्थन की आड़ में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से पूछताछ के किसी भी तरह के डर के बिना, खुल कर अपने अमानवीय अपराधों को बढ़ाता जा रहा है। बाल अधिकारों के मुख्य हननकर्ताओं के बारे में संयुक्त राष्ट्र संघ के ढुलमुल रवैये और ज़ायोनी शासन व सऊदी अरब के साथ सियासी खेल इस बात का सूचक है कि इस संगठन की निष्पक्षता की कोई गारंटी नहीं है और पश्चिम के समर्थन की छाया में अंतर्राष्ट्रीय संगठन ख़ुद ही मानवाधिकार के सबसे बड़े उल्लंघकर्ता बने हुए हैं।


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*