हज़रत मासूमा-ए-क़ुम की ज़ियारत का सवाब।

हज़रत मासूमा-ए-क़ुम की ज़ियारत का सवाब।

जिसने भी हज़रत मासूमा की ज़ियारत की लेकिन इस शर्त के साथ कि

अबनाः इमाम रेज़ा अ. ने फ़रमायाः
مَنْ زارَها عارِفاً بِحَقِّها فَلَهُ الْجَنَّةُ
जिसने भी हज़रत मासूमा की ज़ियारत की लेकिन इस शर्त के साथ कि उनकी सही मारेफ़त (पहचान) भी रखता हो तो उस पर जन्नत वाजिब है।


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