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अरब नेताओं को क्या इस्राईल के इस इरादे की ख़बर है कि वह लेबनान, फ़िलिस्तीन, जार्डन, सीरिया, इराक़, सऊदी अरब और सीनाई मरुस्थल को

अरब नेताओं को क्या इस्राईल के इस इरादे की ख़बर है कि वह लेबनान, फ़िलिस्तीन, जार्डन, सीरिया, इराक़, सऊदी अरब और सीनाई मरुस्थल को

30 मार्च को फ़िलिस्तीनियों ने तो भूमि दिवस मनाया, प्रदर्शन किए ग़ज़्ज़ा के इलाक़े में प्रदर्शनों के दौरान इस्राईली सैनिकों से होने वाली झड़प में कई फ़िलिस्तीनी शहीद और घायल हुए। यह फ़िलिस्तीनी केवल फ़िलिस्तीन के लिए नहीं लड़ रहे हैं बल्कि यह पूरी अरब भूमि की रक्षा के लिए भी क़ुरबानियां दे रहे हैं।

इस्राईल में राजनैतिक पार्टियों के जिस एलायंस की अध्यक्षता इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू कर रहे हैं उसके एजेंडे की प्राथमिकताओं में इस्राईल की स्थापना उन सीमाओं के अनुसार करनी है जिनका उल्लेख उनकी तौरैत में है। उन सीमाओं पर इस्राईल  की स्थापना का यह अर्थ है कि पूरा लेबनान, पूरा फ़िलिस्तीन, पूरा जार्डन, आधा सीरिया, एक तिहाई सऊदी अरब, दो तिहाई इराक़ और आधा सीनाई मरुस्थल इस इस्राईल का भाग होगा।

हमें नहीं लगता कि अरब देशों के विदेश मंत्रियों को जो वार्ता सम्मेलन में भाग लेने के लिए दौड़े दौड़े गए थे, जिन्होंने ईरान को सबसे बड़ा ख़तरा कहा और इस्राईली ख़तरे के बारे में एक शब्द भी नहीं बोले और जो अब ट्यूनीशिया में अरब लीग की शिखर बैठक का एजेंडा तैयार करने के लिए जमा हुए थे उन्हें इस्राईलियों के इन इरादों की कोई ख़बर होगी या उन्होंने भूमि दिवस और इस दिन होने वाले प्रदर्शनों के शहीदों के बारे में उन्हें कुछ पता होगा क्योंकि इन विदेश मंत्रियों और उनकी सरकारों का क़रीबी मित्र इस्राईल है और उन्हें इस बात से कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता कि इस्राईल बैतुल मुक़द्दस का यहूदीकरण कर रहा है, उसने सीरिया के इलाक़े गोलान हाइट्स को अपना भाग बना लिया है इसी तरह ग़ज़्ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट के इलाक़े को भी हड़पने की तैयारी में है।

आज उन्होंने गोलान हाइट्स को अपना भाग कहा है कल वह सऊदी अरब में ख़ैबर के इलाक़े को, इराक़ में बेबीलोनिया के इलाक़े को मिस्र में सीनाई मरुस्थल के इलाक़े को अपनी भूमि कहेंगे, उनकी कोशिश होगी कि सारे फ़िलिस्तीनियों को फ़िलिस्तीन से बाहर निकाल कर लेबनान और जार्डन में बसा दें।

बहरहाल फ़िलिस्तीनियों ने 30 मार्च को भूमि दिवस मनाया वही इस्राईल और अमरीका की साज़िशों के मुक़ाबले में दृढ़ता के प्रतीक हैं जो अरब भूमियों को हड़प लेने की कोशिश में हैं।

फ़िलिस्तीनियों का वापसी मार्च, 30 मार्च 2018 से शुरू हुआ और हर शुक्रवार को इसका आयोजना होता है 30 मार्च को इसकी वर्षगांठ पर फ़िलिस्तीनियों ने प्रदर्शन किए यह प्रदर्शन चल रहे हैं और फ़िलिस्तीनियों ने अपनी मिसाइल शक्ति का भी प्रदर्शन कर दिया है यह मिसाइल तेल अबीब को पार करके कफ़र शाबा तक पहुंचने लगे हैं इन मिसाइलों ने फ़िलिस्तीनियों को बुरी तरह भयभीत कर दिया है यही कारण है कि जब इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा पर हमला किया तो इस बात का ध्यान रखा कि फ़िलिस्तीनी शहीद न हों वरना जवाब में उनके मिसाइल भी इस्राईलियों के सिर पर बरसेंगे क्योंकि इस्राईल ने मिसाइलों को हवा में ध्वस्त करने के लिए जो मिसाइल डिफ़ेन्स सिस्टम तैयार किया था वह नाकाम हो चुका है।

यही तो वजह है कि जैसे ही फ़िलिस्तीनियों के साथ इस्राईल की झड़प शुरू हुई इस्राईली प्रधानमंत्री नेतनयाहू आनन फ़ानन में मिस्र से मदद मांगने लगे कि वह मध्यस्थता करके संघर्ष विराम करवाए।

कारण यह है कि नेतनयाहू भी जानते हैं कि फ़िलिस्तीनियों ने जिस मिसाइल ताक़त का प्रदर्शन किया है वह बानगी है झड़प जारी रहने की स्थिति में फ़िलिस्तीनियों की और बड़ी ताक़त सामने आएगी।

रविवार को ट्यूनीशिया में अरब लीग के शिखर सम्मेलन में शामिल होने वाले राष्ट्राध्यक्षों को न तो भूमि दिवस के बारे में कुछ मालूम है और न ही इसके अर्थ की गहराई का कुछ पता है और न ही वह इस बारे में कुछ सुनना चाहते हैं क्योंकि इस्राईल उनका दुशमन नहीं है वह तो नेतनयाहू से दोस्ती के लिए छटपटा रहे हैं।

हिज़्बुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरुल्लाह ने बिल्कुल सही कहा था कि अरब लीग को कम से कम यह करना चाहिए कि फ़िलिस्तीन के मामले में अरब देशों ने जो शांति प्रस्ताव दिया था उसे वापस ले लें क्योंकि यह प्रस्ताव अब मज़ाक़ बनकर रह गया है। नेतनयाहू और दूसरे नेताओं ने इसे अपने पांव से बार बार रौंदा है।

हम तो कहेंगे कि सैयद नसरुल्लाह! आप इन लोगों से कुछ न कहिए यह इस क़ाबिल नहीं है कि आप उनको संबोधित करें उनकी आस्था इस्राईल से दोस्ती है, उनका सिद्धांत अमरीका और इस्राईल के सामने समर्पण है उनकी सबसे बड़ी तमन्ना नेतनयाहू को ख़ुश कर लेना है।

साभार रायुल यौम


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