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अरब टीकाकार अतवानः क्या ईरान परमाणु बम से केवल एक महीना दूर है जैसा कि न्यूयार्क टाइम्ज़ ने दावा किया है? इस्राईल ने अब क्यों लिया शहीद सुलैमानी का नाम?

अरब टीकाकार अतवानः क्या ईरान परमाणु बम से केवल एक महीना दूर है जैसा कि न्यूयार्क टाइम्ज़ ने दावा किया है? इस्राईल ने अब क्यों लिया शहीद सुलैमानी का नाम?

अमरीका के अख़बार न्यूयार्क टाइम्ज़ ने इस्राईल के गहरे जख़्म पर यह कहकर नमक छिड़क दिया कि ईरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त मात्रा में संवर्धित यूरेनियम है और वह एक महीने में बम बना सकता है।

इस्राईल के बहुत सारे जनरल और विशेषज्ञ न्यूयार्क टाइम्ज़ की रिपोर्ट की पुष्टि करते हैं। इस्राईल के पूर्व प्रधानमंत्री एहूद बाराक भी इस बहस में कूद पड़े और उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु शक्ति निश्चित रूप से बन जाएगा और उसके ख़िलाफ़ किसी भी तरह की कार्यवाही का बहुत सीमित असर होगा। इस समस्या का एक ही समाधान हो सकता है कि इस्राईल अमरीका से संबंध मज़बूत करे जिसे नेतनयाहू ने तबाह कर दिया है।

इस्राईल के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल इयाल हौलता मंगलवार को अपने अमरीकी समकक्ष जैक सोलिवान से मिलने के लिए वाशिंग्टन रवाना हो गए। मुलाक़ात में यह चर्चा होनी है कि ईरान के मामले में क्या किया जाए जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत तेज़ी से विकसित होता जा रहा है और दूसरी ओर अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका के निकल जाने के बाद पश्चिमी एशिया में अमरीका की उपस्थिति भी बहुत सीमित हो चुकी है।

इस्राईल में इस समय यह सवाल सबकी ज़बान पर है कि ईरान के मामले में क्या किया जा सकता है?

इस्राईल के पास दो ही विकल्प हैं,

एक विकल्प यह है कि अपने युद्धक विमान एफ़-35 और एफ़-16 भेजे और ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर बमबारी कर दे जैसा कि उसने इराक़ के परमाणु प्रतिष्ठान के साथ 1981 में और सीरिया के परमाणु केन्द्र के साथ 2007 में किया था।

दूसरा विकल्प यह है कि ईरान को परमाणु शक्ति के रूप में स्वीकार करके ख़ामोश हो जाए और इसको ज़मीनी सच्चाई मान कर हज़म कर ले।

इस्राईल के अधिकातर सैनिक विशेषज्ञ यही कहते हैं कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करके कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है बल्कि इसके उल्टे नतीजे निकलेंगे। क्योंकि इस तरह के किसी भी हमले का ईरान भी जवाब देगा और यह जवाब वह हिज़्बुल्लाह, हमास, जेहादे इस्लाम, बल्कि हो सकता है कि सीरिया के रास्ते से दे और इस्राईल को बहुत बड़े पैमाने पर नुक़सान पहुंचा दे।

हम जल्दबाज़ी में कोई नतीजा नहीं निकालना चाहते लेकिन यह तय है कि इस्राईल में ख़ौफ़ छाया हुआ है और बहुत तेज़ी से यहूदी इस्राईल से यूरोपीय देशों कैनेडा और अमरीका की ओर पलायन कर रहे हैं जहां से वह अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में आए थे।

जो बाइडन सरकार पर यहूदी लाबी की ओर से दबाव है कि वह ईरान के ख़िलाफ़ कठोर कार्यवाही करे मगर बाइडन के पास भी ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियां लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं है और ईरान पिछले चालीस साल से अधिक समय से अमरीका की पाबंदियों का मुक़ाबला कर रहा है।

आख़िर में हम यह कहना चाहेंगे कि इस्राईल इस समय ईरान को उकसाने की कोशिश भी ज़रूर करेगा। इस्राईल की ओर से आरोप लगाया जा रहा है कि साइप्रस में इस्राईली उद्यमियों की हत्या की योजना में ईरान लिप्त है। इसी तरह इस्राईल की सैनिक इंटेलीजेन्स के प्रमुख जनरल तामीर हैमान ने बयान दिया है कि ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी की हत्या में इस्राईल की भूमिका रही है। यह ईरान को कोई कार्यवाही करने के लिए उकसाने की कोशिश है।

ईरान ने साइप्रस में किसी इस्राईली की हत्या की योजना में लिप्त होने के आरोप को बेबुनियाद बताया है। ईरान इस तरह के किसी भी जाल में बहुत मुश्किल है कि फंसे।

इस्राईल इस समय वाक़ई बड़े गहरे संकट में है और यह संकट उसके अस्तित्व के लिए है। हो सकता है कि इन हालात में वह पूरे इलाक़े को युद्ध की आग में झोंक देने की कोशिश करे।


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