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अमेरिकी चुनाव में सबसे बड़ी हार किसकी? न घर के रहे न घाट के, अब क्या होगा?

अमेरिकी चुनाव में सबसे बड़ी हार किसकी? न घर के रहे न घाट के, अब क्या होगा?

अरब देशों के शासक कि जिन्होंने बोरी भर-भरकर ट्रम्प को गुंडा टैक्स दिया है वह अब पूरी तरह बर्बाद होते नज़र आ रहे हैं। अब इन्हीं अरब देशों के शासकों को एक बार फिर से ट्रम्प की जगह बाइडेन पर पैसा लगाना पड़ेगा, इसलिए कहा जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में अगर किसी की सबसे बड़ी हार हुई है तो वह यही अरब शासक हैं।

अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजे जैसे-जैसे साफ़ होते जा रहे हैं वैसे-वैसे अरब शासकों के दिल की धड़कनें तेज़ होती जा रही हैं। अमेरिका सहति अब पूरी दुनिया इस बात को मान रही है कि 2020 के अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की हार पूरी तरह यक़ीनी हो चुकी है। वहीं ट्रम्प की हार सामने देखकर अरब शासकों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। बहुत से जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब, बहरैन, संयुक्त अरब इमारात और मिस्र के शासकों में ट्रम्प की हार का सबसे ज़्यादा डर देखने को मिल रहा है। यह सभी अरब शासक ट्रम्प की संभावित हार से इतना ज़्यादा डरे हुए हैं कि इनके डरे और सहमे होने के बारे में स्वयं इस्राईल की मीडिया ने भी लिखा है। इस्राईल ह्यूम नामक समाचार पत्र ने संयुक्त अरब इमारात के एक वरिष्ठ कूटनयिक के हवाले से लिखा है कि, हम सबकी नज़रें अमेरिका के चुनाव पर टिकी हुईं हैं और हमारी यह इच्छा है कि ट्रम्प चुनाव को जीत जाएं, लेकिन साथ ही हम व्हाइट हाउस में होने वाले परिवर्तन के लिए भी तैयारी कर रहे हैं।

दूसरी ओर इस्राईल ह्यूम ने बहरैन स्थित में मौजूद ज़ायोनी शासन के एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट दी है कि, अरब देशों में ट्रम्प की हार और बाइडेन की जीत को लेकर बहुत ज़्यादा डर देखने को मिल रहा है, अरब शासकों को इस बात का डर है कि बाइडेन के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद व्हाइट हाउस की पश्चिमी एशिया को लेकर नीतियों में काफ़ी बदलाव आएगा। इस बीच एक अन्य बहरैनी अधिकारी ने कहा है कि बाइडेन की जीत के साथ ही मनामा, वॉशिंग्टन के साथ अपने संबंधों में और ज़्यादा विस्तार लाने का प्रयास करेगा। इस बीच ट्रम्प की हार को लेकर अरब शासकों में जो व्यक्ति सबसे ज़्यादा चिंतित और डरा हुआ है वह हैं सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान। इसका कारण यह है कि मोहम्मद बिन सलमान ने रियाज़ और वॉशिंग्टन के बीच हथियारों को लेकर  हुए समझौते के लिए ट्रम्प को भारी रक़म गुंडा टैक्स के तौर पर दी थी। साथ ही मोहम्मद बिन सलमान को ट्रम्प से यह भी उम्मीद थी कि उनके पिता सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ के बाद सऊदी नरेश बनने के रास्ते में आने वाली सभी रुकावटों को दूर करने में ट्रम्प उनकी मदद करेंगे। लेकिन ट्रम्प की हार सामने देखकर मोहम्मद बिन सलमान की चिंताएं बढ़ गईं हैं और आने वाले दिनों में उनके सऊदी नरेश बनने के सपने को भी झटता लग सकता है।

कुल मिलाकर ट्रम्प की हार को लेकर अरब शासकों में पाए जाने वाले डर की वास्तिवक्ता कुछ और है, क्योंकि अरब शासक यह अच्छी तरह से जानते हैं कि ट्रम्प के जाने और बाइडेन के आने से वॉशिंग्टन की विदेश नीति पर कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला है। अमेरिका पहले की ही तरह सऊदी अरब सहित अपने सभी पिट्ठू अरब देशों का समर्थन करता रहेगा। लेकिन अरब देशों के शासकों में जिस बात का डर है वह कुछ और है और वह डर यह है कि, पिछले चार वर्षों में उन्होंने डोनल्ड ट्रम्प को अपनी सभी इच्छाओं को पाने और अपने सभी सपनों को पूरा करने के लिए जो गुंडा टैक्स दिया है, अभी तक उन पैसों के बदले में उनकी कोई भी इच्छा और सपने पूरे नहीं हुए हैं। इन अरब शासकों को यह पूरी उम्मीद थी कि ट्रम्प एक बार और अमेरिका के राष्ट्रपति बनेंगे और उनकी अधूरी इच्छाओं और सपनों को पूरा करेंगे, लेकिन ऐसा होता अब संभव नहीं लग रहा है। इस बात को लेकर इन अरब शासकों की चिंता अपने चरम पर पहुंच गई है। अब अगर उन्हें अपने सपनों और इच्छाओं को पूरा करना है तो फिर से गुंडा टैक्स देना होगा। वहीं लगातार कमज़ोर होती आर्थिक स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि अरब शासक फिर से गुंडा टैक्स देने की स्थिति में नहीं है और अगर ऐसा होता है तो फिर उनका हाल वैसा ही होगा, कि न वह घर के रहेंगे और न ही घाट के। 


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