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अमरीकी जनरल द्वारा ईरानी सेना को मध्यपूर्व की सबसे शक्तिशाली सेना बताए जाने पर विशेषज्ञों की राय

अमरीकी जनरल द्वारा ईरानी सेना को मध्यपूर्व की सबसे शक्तिशाली सेना बताए जाने पर विशेषज्ञों की राय

अमरीकी सेन्ट्रल कमांड (सेंटकॉम) के प्रमुख जनरल केनेथ मैकेंज़ी ने हाल ही में ईरानी सेना को क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली सेनाओं में से एक बताते हुए कहा है कि ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता सबसे ज़्यादा भयंकर है।

अमरीकी कांग्रेस की सशस्त्र सेवाओं की समिति के नाम अपनी एक रिपोर्ट में जनरल मैकेंज़ी ने कहा है कि ईरान द्वारा बड़े पैमाने पर ड्रोन विमानों के इस्तेमाल का मतलब है कि कोरियाई युद्ध के बाद अमरीकी सेना, पहली बार पूर्ण वायु श्रेष्ठता के बिना काम कर रही है।

अमरीकी कमांडर ने ईरान की सैन्य शक्ति को लेकर ऐसी स्थिति में डर ज़ाहिर किया है, जब तेहरान कई बार दोहरा चुका है कि उसकी सैन्य शक्ति सिर्फ़ रक्षात्मक और विदेशी ख़तरों का मुक़ाबला करने के लिए है।

इराक़ में राष्ट्र संघ के हथियारों के पूर्व इंस्पैक्टर स्कॉट रिटर का कहना है कि यह वास्तविकता पर आधारित बयान है। यह वह सच्चाई है, जिसे पेंटागन ख़ुफ़िया तौर पर स्वीकार करता रहा है, चाहे व्हाइट हाउस में ट्रम्प हों या बाइडन।

रिटर का कहना था कि जब ईरान ने अमरीका के आधुनिक ड्रोन को मार गिराया था तो ट्रम्प ने ईरान पर हमला करने की धमकी दी थी, लेकिन पेंटागन ने उन्हें बताया कि इसके क्या संगीन परिणाम हो सकते हैं।

पेंटागन का कहना था कि ईरान न केवल क्षेत्र में हमारे सैनिकों को निशाना बनाएगा, बल्कि सहयोगियों पर भी हमले करेगा और भारी नुक़सान पहुंचाएगा।

इस ब्रीफ़िंग के बाद ट्रम्प ने अपना इरादा बदल दिया था और अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति को अपनी धमकी से पीछे हटते हुए स्पष्ट रूप से कहना पड़ा था कि हम ईरान पर हमला करने नहीं जा रहे हैं। राष्ट्रपति जो बाइडन को भी पेंटागन ने यही ब्रिफ़िंग दी है।

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ मेहरदाद तुराबी का कहना है कि अमरीकी सेंटकॉम के कमांडर ने यहां भी आधा सच बोला है। ईरान की सैन्य ताक़त का सही अंदाज़ा लगाना इसलिए मुश्किल हैं, क्योंकि कोई भी सेना कभी भी अपनी पूरी ताक़त को नहीं दर्शाती है। 


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