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अमरीकी ईसाई किशोरी ओलीविया ने 10 अप्रैल को यह कहकर मां बाप को चौंका दिया कि मैं रोज़ा रखूंगी फिर धीरे धीरे पूरे घर का माहौल बदलने लगा...

अमरीकी ईसाई किशोरी ओलीविया ने 10 अप्रैल को यह कहकर मां बाप को चौंका दिया कि मैं रोज़ा रखूंगी फिर धीरे धीरे पूरे घर का माहौल बदलने लगा...

अमरीका की ईसाई किशोरी ओलीविया ने यह फ़ैसला किया कि वह अपनी मुसलमान सहेलियों के साथ रोज़ा रखेगी। इस फ़ैसले का उसके परिवार ने स्वागत किया।

यह पिछले दस अप्रैल की बात है कि ओलीविया ने परिवार के लोगों को बताया कि वह इस साल रमज़ान का रोज़ा रखेगी। पहले तो उसके मां बाप की समझ में ही नहीं आया कि ओलीविया क्या बात कर रही है मगर बाद में जब पूरी बात उनकी समझ में आई तो उन्होंने कहा कि जैसी तुम्हारी मर्जी।

ओलीविया अपने कमरे में गई और उसने कैलेंडर पर 12 अप्रैल की तारीख़ पर मार्कर से निशान लगा दिया। उसे बताया गया था कि इसी दिन से रमज़ान शुरू हो रहा है। मगर ओलीविया ने 12 अप्रैल से एक दिन पहले ही रोज़ा रखना शुरू कर दिया।

ओलीविया का जन्म वर्ष 2009 में वर्जीनिया में एक ईसाई परिवार में हुआ। बचपन से ही ओलीविया को अलग अलग कल्चरों के बारे में पढ़ना अच्छा लगता था। ओलीविया की दोस्ती कुछ मुस्लिम लड़कियों से हो गई जिनसे उसने कुछ अरबी शब्द भी सीख लिए। अपनी सहेलियों से वह उनके कल्चर के बारे में बहुत उत्सुकता से पूछती थी। फ़ातेमा का उस पर बड़ा गहरा असर रहा जो उसकी पहली टीचर थीं। फ़ातेमा मोरक्कन मूल की थीं उनके तीन बच्चे थे जिनके साथ ओलीविया खेला करती थी।

फ़ातेमा ने ओलीविया से कभी रमज़ान के बारे में बात तो नहीं की मगर ओलीविया मार्क करती थी कि फ़ातेमा अपना काफ़ी समय बावरचीख़ाने में गुज़ारती थीं मगर कुछ खाती पीती नहीं थीं।

ओलीविया का कहना है कि मैंने अपनी ज़िंदगी की पहली ईद अपनी टीचर फ़ातेमा के घर में मनाई। उस दिन बड़ा मज़ा आया हमने ख़ूब मिठाइयां खाईं। इसके बाद धीरे धीरे मुझे ईद और रमज़ान के बारे में जानकारी होने लगी।

ओलीविया के परिवार ने उसका भरपूर साथ दिया जिसके नतीजे में मुस्लिम परिवारों से उनका आना जाना बहुत बढ़ गया।

ओलीविया को उसकी सूडानी मूल की सहेली ने बताया कि रमज़ान आ गया है। तीस दिन तक रोज़े रखे जाएंगे। यानी सुबह की अज़ान से लेकर मग़रिब की अज़ान तक खाने पीने से बचना है। यह सुनकर ओलीविया को हैरत हुई कि कैसे पूरा दिन भूखा प्यासा रहा जाएगा। ओलीविया का कहना था कि हम लोग तो हर महीने के पहले रविवार को रोज़ा रखते है मगर तीस दिन तक रोज़ा रखना तो काफ़ी कठिन काम है।

ओलीविया

 

ओलीविया का कहना है कि उसे सुबह उठने की आदत नहीं है मगर रोज़े के लिए उसने सुबह तड़के उठना शुरू कर दिया।

ओलीविया का कहना है कि मैं पहले दिन हल्की सहरी खाकर सो गई और दोपहर को मेरी आंख खुली तो भूख से पेट में दर्द होने लगा। बड़ी मुश्किल से दवा खाकर मैंने रोज़ा पूरा किया। वजह यह थी कि सहरी में बहुत मामूली सा कुछ खाया था।

फिर मुझे सहेलियों ने बताया कि रोज़े के समय दवा खाने की अनुमति नहीं है। मैंने सहेलियों से पूछा कि कौन सी चीज़ें हैं जिनसे रोज़ा टूट जाता है? तो उन्होंने मुझे विस्तार से बताया।

ओलीविया की मां ने उसकी सहेलियों से सहरी और इफ़तारी के बारे में पूछा कि क्या खाना पीना ज़्यादा उचित रहेगा? ओलीविया की मां जीनी का कहना है कि मैं उसके सामने कुछ नहीं खाती क्योंकि मैं जानती हूं कि वह भूखी है। बल्कि मेरा दिल चाहता है कि उसके साथ दो तीन दिन रोज़ा रख लूं ताकि उसे तनहाई का एहसास न हो।

जीनी का कहना है कि मैं ओलीविया के लिए अधिक प्रोटीन और सब्ज़ियों वाले खाने पकाती हूं।

ओलीविया का कहना है कि मुझे रमज़ान के पकवान बहुत अच्छे लगते हैं और मैं क़ीमे और पनीर दोनों प्रकार के समोसे बहुत पसंद करती हूं। मेरी मां समोसे नहीं बना पातीं लेकिन मैं अपनी अरब सहेलियों के साथ समोसे खा लेती हूं। मुझे ईद का इंतेज़ार है जब रोज़े ख़त्म होंगे और हम जश्न मनाएंगे, ढेर सारी मिठाइयां खाएंगे। मैं अगले साल भी रोज़े ज़रूर रखूंगी।

स्रोतः अलजज़ीरा


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