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अमरीका, यमन में शांति नहीं बल्कि अशांति चाहता है

अमरीका, यमन में शांति नहीं बल्कि अशांति चाहता है

यमन के उप प्रधानमंत्री ने कहा है कि अमरीका की ओर से अंसारुल्लाह के ख़िलाफ़ प्रतिबंध का समर्थन सिर्फ़ इस्राईल और कुछ अरब देशों ने किया है।

यमन की राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के उप प्रधानमंत्री "हुसैन मक़बूली" ने दुनिया के 190 अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों की ओर से अंसारुल्लाह आन्दोलन के ख़िलाफ़ अमरीकी प्रतिबंधों के विरोध का उल्लेख करते हुए कहा कि वाशिंग्टन की इस कार्यवाही के समर्थक केवल ज़ायोनी शासन, सऊदी अरब, यूएई और बहरैन का आले ख़लीफ़ा परिवार है। उन्होंने कहा है कि अंसारुल्लाह आन्दोलन को आतंकवादी बताने का अर्थ है कि अमरीका, यमन में शांति का इच्छुक नहीं है। उन्होंने अलमसीरा टीवी चैनेल के साथ बात करते हुए कहा कि अमरीका का यह फ़ैसला, यमन वासियों के लिए परेशानियां पैदा करेगा।

 

यमन की  राष्ट्रीय मुक्ति सरकार के अन्य उप प्रधानमंत्री,  "महमूद अलजुनैद" ने भी कहा है कि ट्रम्प प्रशासन ने यह फ़ैसला, यमन में जारी शांति प्रक्रिया को बाधित करने के उद्देश्य से किया है। उनका कहना था कि यह मुद्दा बताता है कि अमरीका, यमन के भीतर अशांति, अस्थिरता और रक्तपात चाहता है। यमन के न्यायमंत्री "मुहम्मद अद्दैलमी" भी कहते हैं कि अमरीका का यह फ़ैसला, देश को अशांत बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

 

याद रहे कि अमरीका के वित्त मंत्रालय ने 19 जनवरी 2021 को यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन को प्रतिबंधित गुटों में शामिल किया था। अमरीकी वित्त मंत्रालय के बयान में इसी प्रकार अंसारुल्लाह के तीन नेताओं को भी प्रतिबंधित करके उन्हें आतंकवादी घोषित किया गया है जिनके नाम हैं, अब्दुल्लाह यहया अलहकीम, अब्दुल मालिक बदरुद्दीन अलहूसी और अब्दुल ख़ालिक़ अलहूसी।


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