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अमरीका की मनमानी को रोकने के लिए देशों के बीच सहयोग कितना ज़रूरी!!!

अमरीका की मनमानी को रोकने के लिए देशों के बीच सहयोग कितना ज़रूरी!!!

ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने शुक्रवार को पाकिस्तान के दौरे पर अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद क़ुरैशी, पाकिस्तान के संसद सभापति असद क़ैसर और इस देश की थल सेना के प्रमुख क़मर जावेद बाजवा से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में उन्होंने क्षेत्र के कठिन हालात और क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों के मद्देनज़र सभी पड़ोसी देशों के साथ विचार विमर्श पर बल दिया।

अमरीका की धौंसपूर्ण नीतियां दर्शाती हैं कि अमरीकी सरकार कूटनीति की जगह पर ग़ुन्डागर्दी और विश्व स्तर पर आज़ाद व्यापार व बहुपक्षवाद की जगह पर एकपक्षवाद व पाबंदी को लाना चाहती है। चीन, रूस यहां तक योरोपीय संघ के ख़िलाफ़ पाबंदी के हथकंडे का अमरीका द्वारा इस्तेमाल यह दर्शाता है कि अगर विश्व समुदाय ख़ामोश बैठा रहा तो यह व्यवहार जारी रहेगा और वैश्विक संपर्क की व्यवस्था उन लोगों के हाथ में चली जाएगी जो किसी क़ानून का पाल नहीं करते।

यही वजह है कि न सिर्फ़ क्षेत्र के देश बल्कि विश्व समुदाय के लिए अपरिहार्य बन गया है कि वह वैश्विक शांति और अपने हितों की रक्षा के लिए अमरीका की मनमानी के ख़िलाफ़ डट जाएं।

आंकड़े दर्शाते हैं कि दुनिया ऊर्जा की ज़रूरत का बड़ा भाग एशिया से पूरा होता है और ईरान भी ऊर्जा की आपूर्ति करने वाले अहम देशों में है। इसी तरह ईरान पूर्वी व पश्चिम एशिया के योरोप तथा दुनिया के दूसरे क्षेत्रों के बीच संपर्क पुल की तरह है। अमरीका अपनी एकपक्षीय नीति और अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के ख़िलाफ़ पाबंदियों से इस रणनैतिक सहयोग की प्रक्रिया में रुकावट डालना चाहता है।

इन रुकावटों और क्षेत्र में मौजूद ख़तरों से निपटने के लिए ज़रूरी है कि एशियाई देश आर्थिक-राजनैतिक और सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग कर अमरीका को क्षेत्र में तनाव पैदा करने से रोकें। इस नज़र से एशियाई देशों के साथ ज़रीफ़ की बातचीत, इस अहम मामले में आपसी विचार विमर्श के लिए महत्वपूर्ण अवसर है।


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