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अमरीका का अरब नेटो का चकनाचूर होता सपना, इराक़ शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की ताक़तें हुयी शामिल

अमरीका का अरब नेटो का चकनाचूर होता सपना, इराक़ शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया की ताक़तें हुयी शामिल

इराक़ के संसदीय शिखर सम्मेलन में इस देश के पड़ोसी देशों की भागीदारी जहां एक ओर क्षेत्रीय एकता की अनोखी मिसाल है तो दूसरी ओर इस सम्मेलन के आयोजन से अमरीका का अरब नेटो के गठन का सपना चकनाचूर होता नज़र आ रहा है।

शनिवार को एक दिवसीय सम्मेलन में इराक़ के पड़ोसी देशों ईरान, तुर्की, सऊदी अरब, सीरिया, जॉर्डन और कुवैत ने भाग लिया। इस सम्मेलन की मेज़बानी इराक़ के संसद सभापति मोहम्मद अल-हल्बूसी ने की।

उन्होंने इससे पहले शुक्रवार को बग़दाद को अरबवाद, इस्लाम और शांति का केन्द्र कहा था।

उन्होंने कहाः "आतंकवाद पर विजयी इराक़ अपने पड़ोसियों की बग़दाद में मौजूदगी पर सम्मानित महसूस कर रहा है।"

इस सम्मेलन में ईरान के संसद सभापति अली लारीजानी अपने पहले से व्यस्त कार्यक्रम की वजह से नहीं जा सके। उनकी जगह पर संसद में राष्ट्रीय सुरक्षा व विदेश नीति समिति के अध्यक्ष अलाउद्दीन बुरुजर्दी की अध्यक्षता में ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया।

बग़दाद में शनिवार को संसदीय शिखर सम्मेलन दमिश्क़ के लिए भी बहुत बड़ी घटना है, क्योंकि हालिया वर्षों में वह पहली बार किसी ऐसे सम्मेलन में शामिल हुआ जिसमें तुर्की और सऊदी अरब भी शामिल हुए।

इस सम्मेलन में सऊदी अरब की भागीदारी से क्षेत्रीय भागीदारी की पहल को गति मिली, जो अमरीका की क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को ख़त्म करने के लिए अरब नेटो के गठन की योजना को चुनौती दे रही है।

इससे पहले मिस्र ईरान विरोधी गठबंधन से निकल गया था जिससे अमरीका की यह योजना अधिक कमज़ोर पड़ गयी।

इराक़ की राजधानी बग़दाद में यह संसदीय शिखर सम्मेलन ऐसी स्थिति में आयोजित हुआ कि ऐसी रिपोर्टें सामने आयी हैं जिनसे हालिया महीनों में ईरान-सऊदी अरब के बीच मध्यस्थता के लिए इराक़ सरकार की कोशिशों का पता चलता है।

इराक़ में वर्षों तक सऊदी अरब द्वारा आतंकियों के समर्थन की वजह से पैदा हुए अविश्वास के बाद, बग़दाद अपने दक्षिणी पड़ोसी देश से कूटनैतिक व सुरक्षा संबंध मज़बूत करना चाहता है।

जैसा कि ईरानी विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ बारंबार क्षेत्रीय देशों के बीच अच्छे संबंध क़ायम होने की अपील करते रहे हैं।

जनवरी में ईरानी विदेश मंत्री ने बग़दाद में सैकड़ों इराक़ी और ईरानी कंपनियों के प्रतिनिधियों को एक समारोह में संबोधित करते हुए कहा था कि अगर क्षेत्रीय देश क्षेत्र को मज़बूत करना चाहते हैं तो उन्हें जंग की जगह बातचीत और हथियारों की होड़ की जगह सहयोग की नीति अपनानी होगी।


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