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अमरीका और कनाडा को लगा बड़ा झटका, विरोध भी न आ सका काम

अमरीका और कनाडा को लगा बड़ा झटका, विरोध भी न आ सका काम

संयुक्त राष्ट्र संघ में अमरीका, कनाडा और इस्राईल को उस समय तगड़ा झटका लगा जब उनके विरोध के बावजूद इस्राईल के ख़िलाफ़ एक एक करके छह प्रस्ताव पारित हो गये।

इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की चौथी कमेटी ने इस्राईल के ख़िलाफ़ छह प्रस्ताव मंज़ूर किए हैं जिनमें अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन की ओर से योजनाबद्ध ढंग से अंजाम पाने वाले मानवाधिकारों के हनन, फ़िलिस्तीनी नागरिकों विशेषकर ग़ज़्ज़ा पट्टी के निवासियों के ख़िलाफ़ ताक़त के प्रयोग और बैतुल मुक़द्दस और गोलाइन हाइट्स सहित अतिग्रहित क्षेत्रों में कालोनियों के निर्माण की निंदा की गयी।

 इसी तरह इस प्रस्ताव में फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की स्वदेश वापसी पर भी बल दिया गया है। सीरिया के गोलान हाइट्स के हवाले से मंज़ूर किए गये गये प्रस्ताव में इस्राईल से मांग की गयी है कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों के अनुसार अमल करते हुए इस क्षेत्र में अपनी ग़ैर क़ानूनी गतिविधियां बंद करे।

संयुक्त राष्ट्र संघ की चौथी कमेटी की बैठक में इस्राईल के विरुद्ध उक्त छह प्रस्ताव पारित होने के बाद ईरान के प्रतिनिधि मुहम्मद रज़ा सहराई ने फ़िलिस्तीन के बारे में ईरान के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि एक बार फिर विश्व समुदाय ने फ़िलिस्तीन के बारे में अपने समर्थन का एलान करते हुए इस्राईल को अपनी अपराधिक कार्यवाहियों का जवाबदेह बना दिया है।

ज्ञात रहे कि इस्राईल ने सीरिया के 1200 वर्गकिलोमीटर पर फैली गोलान की पहाड़ियों पर क़ब्ज़ा कर लिया था और उसके बाद उसने इस क्षेत्र को अपना हिस्सा क़रार दे दिया जिसे अब तक विश्व समुदाय स्वीकार नहीं करता। 


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