?>

अमरीका अपने बुरे अंजाम की ओर बढ़ रहा है...इसके लिए ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना ज़रूरी...पेश है भविष्य की एक आरंभिक तसवीर!

अमरीका अपने बुरे अंजाम की ओर बढ़ रहा है...इसके लिए ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना ज़रूरी...पेश है भविष्य की एक आरंभिक तसवीर!

पिछले 50 साल से अधिकतर अमरीकी सरकारों ने दुनिया में बहुत से देशों की राजनैतिक व्यवस्था और सत्ता कामयाबी से बदल दी। अमरीका के राजनैतिक और आर्थिक स्वार्थों से तालमेल न रखने वाली सरकारों के साथ वाशिंग्टन ने यही बर्ताव किया।

कुछ देशों की सीमाएं बदल दीं। कभी हमला कर दिया और कभी कठोर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए। मगर अब लगता है कि ख़ुद अमरीका उसी जाल में फंस गया है और बुरे अंजाम की कगार पर जा खड़ा हुआ है।

अमरीका का सबसे बड़ा राजनैतिक चमत्कार सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता था। पिछले चुनावों में यही होता रहा। मगर अब यह परम्परा शायद कराह रही है और आख़िरी सांसें ले रही है। इसके साथ ही यूरोप और पश्चिमी एशिया की उन सरकारों की सांसें तेज़ होती जा रही हैं जो उसी के सहारे अपना वर्तमान और भविष्य सवांरने में व्यवस्त थीं। अमरीका की इस हालत से विश्व शांति व स्थिरता के लिए भी ख़तर पैदा हो रहे हैं।

गोर्बाचोफ़ ने विकेन्द्रीकरण की अपनी योजना से पश्चिम के सामने पराजय स्वीकार की थी और हाथ उठा दिए थे। ट्रम्प भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं लेकिन विजय और महान होने के भारी भरकम दावों के साथ। वह अपने साथ अमरीका और अमरीकी जनता को ऊंचाई से रसातल में ले जा रहे हैं।

ट्रम्प मध्यपूर्व में अपने डिक्टेटर मित्रों के मशविरे पर अमरीका को तानाशाही व्यवस्था और विरासती शासन की ओर घसीटना चाहते हैं जबकि अपेक्षा यह थी कि वह मध्यपूर्व के डिक्टेटर मित्रों को कुछ लोकतंत्र का पाठ पढाएंगे। मगर जो कुछ हो रहा है वह इसका बिल्कुल उल्टा है।

हमने कभी यह सोचा भी नहीं था कि यह समय आएगा कि गोरे नस्ल परस्तों के कारवां बक्तरबंद गाड़ियों के साथ निकलेंगे और डेमोक्रेट राज्यों की सड़कों पर दनदनाते फिरेंगे ताकि अश्वेतों को धौंस दें। हमने कभी यह भी नहीं सोचा था कि बंदूक़ों की दुकानें ख़ाली हो जाएंगी। रिपोर्टें बताती हैं कि पिछले कुछ महीनों के भीतर अमरीका में लगभग 2 करोड़ हथियार बिके हैं।

अमरीका को किसी ज़माने में विभिन्न धर्मों, जातियों और नस्लों के मेलजोल और भाईचारे का स्वर्ग कहा जाता था मगर आज वह गृह युद्ध और नस्लों के बीच जंग की ओर जा रहा है। इस स्थिति का श्रेय ट्रम्प और सत्ता से चिपके रहने के उनके जुनून को जाता है।

ट्रम्प के आइडियल अमरीका के भीतर जीवन गुज़ारने वाले वह नेता नहीं हैं जिन्होंने लोकतंत्र को परवान चढ़ाया बल्कि उनकी नज़रें चीन के शी जिनपिंग और रूस के व्लादमीर पुतीन पर लगी हुई हैं कि वह आजीवन सत्ता में बने हुए हैं।

हमने इस लेख में जान बूझ कर अमरीकी चुनावों की ताज़ा स्थिति और परिणामों की बात नहीं की क्योंकि पहले अमरीका के चुनावों की ख़ासियत उनकी पारदर्शिता और सुचारू व्यवस्था हुआ करती थी जो अब नहीं है। अब अमरीकी चुनावों की वह हैसियत भी नहीं रही है। पिछले तीन नवम्बर के बाद से नया दौर शुरू हुआ है।

अमरीका बदल रहा है मगर इस बदलाव के नतीजे में बहुत बुरे अंजाम की ओर बढ़ रहा है। इसका श्रेय ट्रम्प को जाता है जिन्होंने इस बदलाव का बीज बोया है। उन देशों और राष्ट्रों को ट्रम्प का शुक्रिया अदा करना चाहिए जो अमरीका के उत्याचार की चक्की में पिसे हैं।

हम अरब देशों के पास अब खोने के लिए कुछ नहीं बचा है, हो सकता है कि अमरीका की तबाही के बाद कुछ एसे हालात बनें कि हम फिर से अंगड़ाई लेकर खड़े हो सकें।

अब्दुल बारी अतवान

अरब जगत के विख्यात लेखक व टीकाकार


अपना कमेंट भेजें

आपका ईमेल शो नहीं किया जायेगा. आवश्यक फ़ील्ड पर * का निशान लगा है

*