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अफ़ग़ान युद्ध भी है मुसलमानों के जनसंहार की साज़िश का हिस्सा, अफगान धर्मगुरु

अफ़ग़ान युद्ध भी है मुसलमानों के जनसंहार की साज़िश का हिस्सा, अफगान धर्मगुरु

अफ़ग़ानिस्तान के धर्मगुरूओं ने ऐलान किया है कि देश में चल रहा युद्ध, मुसलमानों के जनसंहार जैसा है।

हेरात की जामा मस्जिद में एकत्रित धर्मगुरूओं ने यह घोषणा की है कि अफ़ग़ानिस्तान में जारी युद्ध, मुसलमानों की हत्याओं के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है।

तुलू न्यूज़ के अनुसार पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के धर्मगुरूओं की परिषद ने कहा कि तालेबान के दृष्टिगत इस्लामी व्यवस्था को शांति वार्ता में बाधा नहीं होना चाहिए। 

 पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के धर्मगुरूओं की परिषद के प्रमुख मौलवी ख़ुदादाद सालेह ने बल देकर कहा कि देश की वर्तमान लड़ाई हराम है जिसे इस्लामी जगत के सभी धर्मगुरूओं ने हराम बताया है। 

मौलवी ख़ुदादाद सालेह ने कहा कि तालेबान का इस्लाम, स्वीकार्य नहीं है। 

उन्होंने कहा कि इस्लामी व्यवस्था के बारे में केवल धर्मगुरू ही बता सकते हैं। 

उनका कहना था कि तालेबान अपने दृष्टिगत इस्लाम को अफ़ग़ान जनता पर थोपना चाहते हैं।

हेरात के वक़्फ़ और हज मामलों के प्रमुख अब्दुल ख़ालिक़ हक़्क़ानी ने कहा है कि अफ़ग़ानियों के बीच वार्ता ही सबसे अच्छा विकल्प है जिसका धर्मगुरू समर्थन करते हैं। 

हेरात की जामा मस्जिद में एकत्रित होने वाले धर्मगुरूओं ने तालेबान और अफ़ग़ानिस्तान की सरकार दोनो से संघर्ष विराम का आह्वान किया है। 

अफ़ग़ानिस्तान के यह धर्मगुरू ऐसी हालत में इस देश में युद्धबंदी की मांग कर रहे हैं कि जब क़तर की राजधानी दोहा में अफ़ग़ानियों के बीच वार्ता का दूसरा चरण एक सप्ताह के बाद आरंभ होने जा रहा है।


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