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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन के बाद नई दिल्ली में राजनीति तेज़

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन के बाद नई दिल्ली में राजनीति तेज़

अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार के गठन की घोषणा के दौरान, नई दिल्ली ने मॉस्को और वॉशिंगटन से संपर्क साधा है।

15 अगस्त को काबुल में पश्चिम समर्थित सरकार के पतन और इस देश पर तालिबान के निंयत्रण के बाद भारत को क्षेत्र में पूर्ण रूप से नई परिस्थितियों का सामना है, जिसे लेकर वह काफ़ी चिंता में है और हालिया दिनों में भारत सरकार अपनी इस चिंता को कई बार ज़ाहिर भी कर चुकी है।   

सूत्रों के मुताबिक़, मंगलवार को नई दिल्ली में अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से मुलाक़ात की थी।

सीआईए चीफ़ विलियम बर्न्स मंगलवार को दिल्ली पहुंचे थे। कहा जा रहा है कि इस मुलाक़ात में तालिबान की नई सरकार और अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकालने जैसे मुद्दों पर बात हुई।

द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक़, रूसी सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव जनरल निकोलाई पात्रुशेव  ने भी बुधवार को अजित डोभाल से मुलाक़ात की है और वे भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से भी मुलाक़ात करेंगे। हालांकि इस मुलाक़ात की घोषणा भारत के विदेश मंत्रालय ने ही की है।

अमरीका के अफ़ग़ानिस्तान से निकलने के बाद रूस और चीन इस देश में काफ़ी सक्रिय हैं और तालिबान के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं, लेकिन नई परिस्थितियों में भारत ख़ुद को अलग-थलग महसूस कर रहा है।

जनरल पात्रुशेव रूस के उच्चस्तरीय सुरक्षा अधिकारी हैं। वे 2008 तक सिक्यॉरिटी काउंसिल के सचिव रहे हैं। इससे पहले उन्होंने रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी एफ़बीएस की कमान संभाली थी।


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