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अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव करने पर क्यों मजबूर हुए बिन सलमान? देश को यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि उनके सुधार कार्यक्रम ने देश की अर्थ व्यवस्था को बचाया, बाइडन फ़ैक्टर का कितना असर?

अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव करने पर क्यों मजबूर हुए बिन सलमान? देश को यक़ीन दिलाना चाहते हैं कि उनके सुधार कार्यक्रम ने देश की अर्थ व्यवस्था को बचाया, बाइडन फ़ैक्टर का कितना असर?

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने कहा है कि उन्होंने जो आर्थिक सुधार किए हैं उनसे देश की अर्थ व्यवस्था और गंभीर संकट में जाने से बच गई क्योंकि रेवेन्यु में भारी गिरावट आ गई है।

बिन सलमान कई वर्षों तक चलने वाले अपने आर्थिक सुधार कार्यक्रम का बचाव करना चाहते हैं और इसके लिए उन्होंने जो बयान जारी किया है वह भी सऊदी अरब के वातावरण में एक विचित्र बात मानी जाती है। बिन सलमान का कहना है कि इस साल तेल की आमदनी में लगभग 110 अरब डालर की कमी हो जाएगी मगर देश के भीतर लगाए गए टैक्स और सब्सिडी में कटौती की वजह से यह बड़ा झटका किसी हद तक सहने योग्य हो गया है। बिन सलमान 2030 के नाम से प्रचारित किए जा रहे अपने आर्थिक विजन का बार बार बचाव करते रहे हैं जिसका एलान उन्होंने 2016 में किया था।

बिन सलमान ने अपने बयान में यह भी कहा है कि अगले चरण में आम नागरिकों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मज़बूत करने की कोशिश की जाएगी।

बिन सलमान के इस बयान को देखकर आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि उन्हे देश के भीतर लगातार बढ़ रही जनता की नाराज़गी की जानकारी है। सरकार द्वारा बजट कटौती के नतीजे में आम नागरिकों की जेब पर भारी दबाव पड़ा है। सरकार ने तेल की आमदनी में कमी और कोरोना वायरस से पड़ने वाले भारी आर्थिक दबाव के बाद वैट में तीन गुना की वृद्धि कर दी। बेरोज़गारी की दर 15.4 प्रतिशत तक पहुंच गई जो एक रिकार्ड है।

बिन सलमान की ओर से जारी होने वाला यह बयान दरअस्ल लोगों की नाराज़गी कम करने के साथ साथ भविष्य के उपायों के बारे में उम्मीद जगाने की कोशिश है। उन्होंने कहा है कि अगले वित्तीय साल में सावरेन वेल्थ फंड से डेढ़ सौ अरब रियाल देश की अर्थ व्यवस्था में इंजेक्ट किए जाएंगे और हर साल इस मात्रा में वृद्धि की जाएगी।

कोरोना वायरस की महामारी और तेल की आमदनी में भारी गिरावट का उल्लेख करके बिन सलमान यमन युद्ध के अपने विनाशकारी फ़ैसले पर भी पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं जिसने सऊदी अरब की अर्थ व्यवस्था को गहरा आघात पहुंचाने के साथ ही सऊदी अरब की साख को भी ख़राब किया है।

बिन सलमान अगर इतने सक्रिय हो गए हैं तो इसकी एक वजह अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की विजय भी है। बिन सलमान को पता है कि पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी हत्याकांड का मुद्दा निश्चित रूप से उठेगा। इसी तरह ओबामा के शासनकाल के अंतिम दिनों में 11 सितम्बर के आतंकी हमलों में मारे गए अमरीकियों के परिवारों की ओर से सऊदी अरब के ख़िलाफ़ गतिविधियां भी तेज़ हो गई थीं, यह विषय भी जो बाइडन के शासन काल में ज़ोर पकड़ सकता है।

बिन सलमान को यह भी अच्छी तरह मालूम है कि पूर्व क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन नाएफ़ का महत्व भी बढ़ सकता है जिन्हें बिन सलमान ने ट्रम्प प्रशासन को विश्वास में लेकर पद से हटा दिया था और ख़ुद को क्राउन प्रिंस घोषित कर दिया था।  

यह सारे मुद्दे आने वाले दिनों में विदेश नीती के स्तर पर मुहम्मद बिन सलमान को परेशान कर सकते हैं तो उनकी कोशिश है कि इस बीच देश के भीतर फैला असंतोष भी विस्फोटक रूप धारण न करने पाए इसलिए वह कम से कम देश के भीतरी हालात की ओर से निश्चिंत होना चाहते हैं।

बिन सलमान की यह रणनीति कितनी कारगर होगी यह आने वाला समय ही बताएगा।


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