इस्लामी जगत की स्थिति और अमरीका की साज़िशें

इस्लामी जगत की स्थिति और अमरीका की साज़िशें

ईरान की इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने सोमवार को हाजियों के नाम अपने संदेश में मुसलमानों के बीच युद्ध की आग भड़काने की अमरीका की नीतियों और कोशिशों का हवाला देते हुए बड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने अपने संदेश में कहा कि आज साम्रज्यवादी और अपराधी अमरीका के रवैए को देखिए। इस्लाम और मुसलमानों के बारे में उसकी रणनीति युद्ध की आग भड़काना है। उसकी कोशिश और दुष्ट इच्छा मुसलमानों का एक दूसरे के हाथों नरसंहार करवाना है। उन्होंने अत्याचारियों को पीड़ितों के पीछे लगा दिया, अत्याचारी मोर्चे का समर्थन किया और उसके हाथों कमज़ोर वर्ग का बेरहमी से दमन किया। मुसलमानों को चाहिए कि होशियार रहें और इस शैतानी रणनीति को नाकाम बनाएं।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने यह बातें उस देश के बारे में कही हैं जिसका जीवन 250 साल के आसपास है और इस अवधि में उसने विभिन्न इलाक़ों में युद्ध की आग भड़काई है और उसमें सक्रिय रूप से भाग लिया है।

आज बहुत से दस्तावेज़ आ चुके हैं जिनसे पता चलता है कि अमरीका की विभिन्न संस्थाएं औए एजेंसियां अन्य देशों में सैनिक और नागरिक विद्रोह करवाने में व्यवस्त हैं और उनके निशाने पर विशेष रूप से इस्लामी देश ही हैं।

अमरीका ने अलग अलग इलाक़ों में अपना राजनैतिक खेल खेला और इस खेल में बड़ी संख्या में लोगों की जानें गई हैं। इस संदर्भ में अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के हमले और क़ब्ज़े का उल्लेख किया जा सकता है। अमरीका ने आतंकवाद से मुक़ाबले के नाम पर अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था। अमरीका का कहना था कि वह अलक़ायदा को ध्वस्त करने के लिए यह हमला कर रहा है जिसका गठन अमरीका की मदद से हुआ था मगर अलक़ायदा समाप्त होने के बजाए कई देशों में आज ही सक्रिय है जबकि दाइश और अन्य नामों से दूसरे आतंकी संगठन पैदा हो गए हैं।

अमरीका ने इराक़ और सीरिया में दाइश तथा अन्य आतंकी संगठनों की मदद की और इन संगठनों ने दोनों ही देशों को भारी नुक़सान पहुंचाया अलबत्ता वह अपना लक्ष्य पूरा न कर सके क्योंकि सीरिया में बश्शार असद की सरकार का तख़्ता पलटने में वह सफल नहीं हो पाए और न ही इराक़ को अपने क़ब्ज़े में ले पाए। दोनों देशों में आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी गई है।

इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता का इशारा इसी ओर है कि किस तरह अमरीका अत्याचारियों की मदद कर रहा है। अत्याचारियों की मदद का एक और उदाहरण अमरीका की ओर से इस्राईल की मदद है। इस्राईल एक ग़ैर क़ानूनी शासन है जिसने फ़िलिस्तीन की धरती पर अवैध क़ब्ज़ा करके अपने अस्तित्व की घोषणा की है। अमरीका से इस्राईल को भरपूर मदद मिलती है।

इन समस्त नीतियों में एक बिंदु समान रूप से नज़र आता है कि इसका पूरा नुक़सान इस्लामी जगत को पहुंच रहा है। यह अमरीका की ख़तरनाक साज़िश है जिसकी ओर ध्यान देने की ज़रूरत है इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता ने अपने संदेश में इसी बिंदु की ओर ध्यान केन्द्रित करवाया है।  


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