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अगर क़ासिम सुलैमानी मैदान में न होते तो आज दाइश सुरक्षा के लिए कोरोना बन चुका होताः आईआरजीसी

अगर क़ासिम सुलैमानी मैदान में न होते तो आज दाइश सुरक्षा के लिए कोरोना बन चुका होताः आईआरजीसी

आईआरजीसी के कमांडर ने कहा है कि अगर शहीद क़ासिम सुलैमानी मैदान में न आए होते तो आज आतंकी गुट दाइश पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए कोरोना बन चुका होता।

जनरल हुसैन सलामी ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि जो कुछ होता है वह मैदान में होता है और हमारी क़ुद्स फ़ोर्स ने भी मैदान में ही इस्लाम और ईरान का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि जब भी दुश्मन सामने आया तो क़ुद्स फ़ोर्स डट गई और उसने मुसलमान युवाओं को प्रतिरक्षा के मैदान में पहुंचाया और मोर्चे को मज़बूत बनाया, उसका समर्थन किया और रक्षा की युक्ति व विचार को ज़मीनी सच्चाई में बदल दिया। आईआरजीसी के कमांडर ने कहा कि इस मैदान के महान कमांडर जनरल क़ासिल सुलैमानी थे जो ईरान व अन्य इस्लामी देशों की रक्षा के लिए हमेशा पहाड़ों, जंगलों और रेगिस्तानों में दुश्मन का पीछा करते थे।

 

जनरल हुसैन सलामी ने इस बात पर बल देते हुए कि अगर यह महान फ़ोर्स और उसका वह व्यापक समर्थन न होता तो आज दाइश जो एक ख़तरनाक राजनैतिक वायरस है, एक राजनैतिक कोरोना व सुरक्षा कोरोना बन कर पूरी दुनिया में फैल चुका होता, कहा कि अगर शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी डट कर खड़े न होते तो आज दाइश इस इलाक़े में और अन्य इलाक़ों में घुसपैठ कर चुका होता। उन्होंने कहा कि हमारे लोगों ने क़रीब से एक भी दाइशी का चेहरा इस लिए नहीं देखा क्योंकि जनरल सुलैमानी मैदान में थे, हमारे लोगों ने किसी अमरीकी हमलावर का चेहरा नहीं देखा क्योंकि वे और आप मैदान में थे। आईआरजीसी के कमांडर ने कहा है कि शहीद सुलैमानी आज सभी के दिल में हैं और कोई भी उन्हें लोगों के दिल से नहीं निकाल सकता, आज वे कल से भी ज़्यादा प्रिय व सम्मानीय हैं।


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