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अंसारुल्लाह ने मार मार कर यूएई की हवा निकाली, अब सऊदी अरब की बारी

अंसारुल्लाह ने मार मार कर यूएई की हवा निकाली, अब सऊदी अरब की बारी

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य ने कहा है कि अबूधाबी के सैन्य और राजनैतिक दृष्टिकोण में बदलाव के बाद अंसारुल्लाह ने इमारात पर हमले को रोक देने का फ़ैसला किया है।

अलजज़ीरा टीवी चैनल की रिपोर्ट के अंसारुल्लाह के वरिष्ठ नेता मुहम्मद अली अलबुख़ैती ने इसकी सूचना दी। अंसारुल्लाह की ओर से यह बयान तेहरान और अबूधाबी के बीच वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों की बैठक के कुछ दिन बाद सामने आया है।

यह ऐसी हालत में है कि संयुक्त अरब इमारात के विदेशमंत्रालय के सलाहकार अनवर क़रक़ाश ने इस बैठक पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया कि सऊदी अरब के साथ यमन में अगली रणनीति पर सहमति बन गयी है और ईरान के बारे में हम टकराव से बचना और राजनैतिक सहयोग को प्राथमिकता देना हमारा संयुक्त दृष्टिकोण है।

अनवर क़रक़ाश ने लिखा कि यूएई का दृष्टिकोण अटल है और सऊदी अरब के साथ समन्वय, अपनी बेहतरीन स्थिति में है। क़रक़ाश ने क़तर पर ईरान और संयुक्त अरब इमारात के बीच हुई सुरक्षा बैठक को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया और दावा किया कि दोहा, गदेले पानी में मछली पकड़ना चाहता है।

अंसारुल्लाह के वरिष्ठ नेता और यमन की क्रांतिकारी परिषद के प्रमुख मुहम्मद अली अलहूसी ने अपने ट्वीट में लिखा कि ईरान से संयुक्त अरब इमारात का संदेश सकारात्मक है।

पिछले कुछ दिनों से यमनी हल़्क़ों में अंसारुल्लाह और संयुक्त अरब इमारात के बीच संपर्क चैनल शुरु होने की बातें आने लगी थीं। इसी मध्य लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के उप महासचिव शैख़ नईम क़ासिम ने संयुक्त अरब इमारात और अंसारुल्लाह के बीच संपर्क चैनल विशेषकर अलहुदैदा से सैनिकों को निकालने के बारे में अप्रत्यक्ष संपर्क की सूचना दी थी।

इसी प्रकार राष्ट्रपति कार्यालय के प्रबंधक महमूद वाएज़ी ने बुधवार को अपने महत्वपूर्ण बयान में कहा कि अबूधाबी, यमन युद्ध में अपनी कट्टरपंथी नीति और अपने सैन्य दृष्टिकोण को बदल रहा है। संयुक्त अरब इमारात, यमन युद्ध के बारे में सऊदी अरब से हटकर अपना दृष्टिकोण बदलने के प्रयास में है।

अंसारुल्लाह और संयुक्त अरब इमारात के बीच संपर्क पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अंसारुल्लाह के वरिष्ठ नेता मुहम्मद अली अलबुख़ैती का कहना है कि अंसारुल्लाह इस प्रकार की नीति के बारे में सऊदी अरब सहित समस्त अरब देशों के दृष्टिकोणों का समर्थन का करता है। उन्होंने ईरान और संयुक्त अरब इमारात के बीच संबंधों के बारे में कहा कि न हम इसका खंडन करते हैं और न ही इसकी पुष्टि करते हैं।

बहरहाल यमन की सेना और स्वयं सेवी बलों ने खुलकर कह दिया है कि जब तक यमन पर हमले जारी रहेंगे, सऊदी अरब के भीतर और सऊदी एजेन्टों के ठिकानों पर सेना के मीज़ाइल और ड्रोन हमले जारी रहेंगे। अब यह रियाज़ सरकार का निर्भर करता है कि वह संयुक्त अरब इमारात की तरह यमन से अपने सैनिकों और एजेन्टों को निकाल ले या फिर यमन की दलदल में अपने सैनिकों और एजेन्टों को झोंकता रहे।


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