• ख़ुशी और दुख

    हज़रत अली (अ) ने फ़रमायाः अफ़सोस ऐसी ख़ुशियों पर जो बहुत कम समय के लिए हों लेकिन उनके नतीजे में लम्बे समय के लिए दुख हाथ आये।

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  • सलाह

    इल्म से इंसान को निर्धन है, तो समृद्धि , कंजूस है , तो सहृदयता , अगर तुच्छ है , तो हैबत , यदि रोगी है , तो स्वास्थ्य , यदि दूर है , तो निकटता , यदि बद - तमीज़ है , तो शर्म व हया , यदि नीचा है , तो उच्चता , यदि हक़ीर है , तो शराफ़त प्राप्त होती है , और हिकमत व महानता , बुद्धिमान को भी इल्म ही से प्राप्त होती है , इस लिये , भाग्यशाली है वह आदमी , जो आलिम व बुद्धिमान है ।

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  • इल्म व जेहालत

    इंसान के इल्म के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह ख़ुदा की इबादत करे , और जिहालत के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह अपनी राय पर ख़ुशहाल हो जाए ।

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  • ख़ुदा का भय

    बेशक , जिन लोगों को इस से पूर्व ज्ञान दे दिया गया है , जब उन पर आयात का पाठ किया जाता है , तो वे मुंह के बल सजदे में गिर पड़ते हैं , और कहते हैं , कि हमारा रब बड़ा ही पाक व पाकीज़ा है । उस का वादा निश्चित रूप से पूरा हो कर रहेगा , और वे मुंह के बल गिर कर रोते हैं , जिस से उन के ख़ुशू व ख़ुज़ू में वृद्धि होती जाती है

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  • हुकूमत को नाहक़ ख़ून बहा कर मज़बूत मत करो

    हज़रत अली (अ) ने फ़रमायाः अपनी हुकूमत को नाहक़ ख़ून बहा कर मज़बूत मत करो क्योंकि ऐसा करने से सत्ता कमज़ोर होती है और वह दूसरे के हाथ में चली जाती है।

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پیام رهبر انقلاب به مسلمانان جهان به مناسبت حج 1441 / 2020
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