इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

  • News Code : 466370
  • Source : विलायत डाट इन
Brief

ऐ सुफ़यान ! जो इंसान झूठ बोलने की आदत रखता है उसमें मानवता नाम की कोई चीज नहीं और जो ताक़त वाला है उसका कोई दोस्त नहीं और जो हासिद (जलने वाला) है उसे आराम और चैन नहीं मिल सकता है और जो आदमी बुरे चरित्र का है वह कभी सज्जनता और बुज़ुर्गी व शराफ़त नहीं रख सकता।

तीसरी नसीहत।इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से मुलाक़ात में सुफ़यान सौरी ने कहा: ऐ रसूले इस्लां के बेटे मुझे नसीहत करें। इमाम ने कहा:یا سُفیانُ، لَا مُرُوءَةَ لِكَذُوبٍ وَ لَا أَخَ لِمُلُوكٍ [لِمَلُولٍ‏] وَ لَا رَاحَةَ لِحَسُودٍ وَ لَا سُۆْدُدَ لِسَیِّئِ الْخُلُق‏.ऐ सुफ़यान ! जो इंसान झूठ बोलने की आदत रखता है उसमें मानवता नाम की कोई चीज नहीं और जो ताक़त वाला है उसका कोई दोस्त नहीं और जो हासिद (जलने वाला) है उसे आराम और चैन नहीं मिल सकता है और जो आदमी बुरे चरित्र का है वह कभी सज्जनता और बुज़ुर्गी व शराफ़त नहीं रख सकता।सुफ़यान ने और नसीहत करने की मांग की तो इमाम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया ऐ सुफ़यानःیا سُفیانُ، ثِقْ بِاللَّهِ تَكُنْ مُۆْمِناً وَ ارْضَ بِمَا قَسَمَ اللَّهُ لَكَ تَكُنْ غَنِیّاً وَ أَحْسِنْ مُجَاوَرَةَ مَنْ جَاوَرْتَهُ تَكُنْ مُسْلِماً وَ لَا تَصْحَبِ الْفَاجِرَ فَیُعْلِمَكَ مِنْ فُجُورِهِ وَ شَاوِرْ فِی أَمْرِكَ الَّذِینَ یَخْشَوْنَ اللَّهَ عَزَّ وَ جَل‏.ऐ सुफ़यान! अल्लाह पर भरोसा करो ताकि मोमिनों की पंक्ति में शामिल हो सको और जो कुछ अल्लाह ने तुम्हारे लिए निर्धारित किया है उस पर राजी रहो ताकि बेनियाज़ी का एहसास कर सको, अपने पड़ोसियों के साथ अच्छा व्यवहार करो ताकि तुम मुसलमान कहला सको। गुनहगारों और पापियों के साथ उठने बैठने से दूरी करों। अगर तुमने उन से दूरी नहीं की तो वह तुम्हें भी प्रदूषित कर देगा और अपने कामों में उन लोगों से नसीहत लो जो अल्लाह से डरते हैं यानी हलाल व हराम पर ध्यान देते हैं।सुफ़यान सौरी ने फिर इमाम ( अ) से नसीहत करने का अनुरोध किया हैं तो इमाम अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं:یا سُفیانُ، مَنْ أَرَادَ عِزّاً بِلَا عَشِیرَةٍ وَ غِنًى بِلَا مَالٍ وَ هَیْبَةً بِلَا سُلْطَانٍ فَلْیَنْقُلْ مِنْ ذُلِّ مَعْصِیَةِ اللَّهِ إِلَى عِزِّ طَاعَتِه‏.ऐ सुफ़यान! जो बिना लोगों और क़ौम क़बीले के सम्मान चाहे और बिना माल व दौलत के बेनियाज़ी चाहे और बिना ताक़त के शान व शौकत चाहे तो उसने अल्लाह की अवहेलना के अपमान से आज्ञाकारिता के सम्मान की ओर रूख किया है।फिर सुफ़यान सौरी ने इमाम अलैहिस्सलाम से नसीहत की मांग की तो आपने कहा: ऐ सुफ़यान! मेरे बाबा (अल्लाह का दुरूद और सलाम हो उन पर) ने मुझ से कहाःا بُنَیَّ مَنْ یَصْحَبْ صَاحِبَ السَّوْءِ لَا یَسْلَمْ وَ مَنْ یَدْخُلْ مَدَاخِلَ السَّوْءِ یُتَّهَمْ وَ مَنْ لَا یَمْلِكْ لِسَانَهُ یَنْدَمْ.बेटा! जो बुरे आदमी के साथ उठना बैठना करे उसका अख़लाक़ व ईमान सुरक्षित नहीं रह सकता। जो आदमी ऐसी बदनाम जगहों पर आवागमन रखे तो उस पर भी बुराई का आरोप लग सकता है। और जो आदमी अपनी ज़बान पर कंट्रोल न करे उसे शर्मिंदगी और लज्जा के अलावा कुछ नहीं मिलता।इसके बाद आपने दो शेर पढ़े: अपनी ज़बान को अच्छी बातें करने की आदत दिलाओ ताकि वह तुम्हारे लिए फायदेमंद साबित हो, इसलिए कि ज़बान जिस चीज में हमेशा व्यस्त हो उसकी आदत कर लेती है। ज़बान को जो तुम सिखाओगे, वह वही कहेगी अच्छा सिखाओगे तो अच्छा कहेगी बुरा सिखाओगे तो बुरा कहेगी। इसलिए देखो कि उसे किस चीज की आदत डाल रहे है।


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