काफ़िर, काफ़िर के नारे मिस्र के एक शिया लीडर की शहादत का कारण बन गए।

  • News Code : 436239
  • Source : विलायत डाट इन
Brief

इमामे ज़माना अज. की जन्मदिवस के समारोह के आयोजन पर मिस्र के शिया मौलाना शेख़ हसन शुहाता को शहीद कर दिया गया। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले मिस्र में एक इंटर-नेशनल कॉन्फ़्रेंस हुई थी जिसमें पूरी इस्लामी दुनिया से उल्मा नें शिरकत की थी, इसमें कई तकफ़ीरी मुल्ला भी शामिल थे। इस कॉन्फ़्रेंस में सीरियन सरकार (और उसी के संदर्भ में हिज़बुल्लाह) के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया गया।

इमामे ज़माना अज. की जन्मदिवस के समारोह के आयोजन पर मिस्र के शिया मौलाना शेख़ हसन शुहाता को शहीद कर दिया गया। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले मिस्र में एक इंटर-नेशनल कॉन्फ़्रेंस हुई थी जिसमें पूरी इस्लामी दुनिया से उल्मा नें शिरकत की थी, इसमें कई तकफ़ीरी मुल्ला भी शामिल थे। इस कॉन्फ़्रेंस में सीरियन सरकार (और उसी के संदर्भ में हिज़बुल्लाह) के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया गया। यह घटना पिछले कुछ वर्षों से शियों के ख़िलाफ़ सुनाई दे रहे काफ़िर काफ़िर के नारों की आख़री सीमा थी। दूसरी ओर सीरिया में गृहयुद्ध के कारण इंटर-नेशनल जासूसी संस्थाओं को भारी संख्या में पुराने अनुभवी प्रचार माध्यम एस्तेमाल करके शियों के ख़िलाफ़ माहौल और ज़्यादा ख़राब करने का अवसर मिल गया और उन्होंने उस अवसर से फ़ायदा उठाने में अपनी पूरी ताक़त झोंक दी। इन्ही शैतानी करतूतों के नतीजे में पिछले सप्ताह इमामे ज़माना अज. के जन्म के अवसर पर मिस्र में एक हृदय विदारक घटना पेश आई। एक महत्वपूर्ण शिया लीडर और मौलाना शेख़ हसन शुहाता को उनके तीन साथियों समेत अत्यन्त बेदर्दी व बर्बरता के साथ शहीद कर दिया गया।शहादत का विवरणप्राप्त रिपोर्टों के अनुसार लगभग दो सप्ताह पहले राजधानी क़ाहेरा से लगभग तीस किलोमीटर दूर उत्तर में स्थिति अलजज़ीरा प्रांत के अबुल नमरस क्षेत्र के अबू मुस्लिम नामक गांव में शियों के ख़िलाफ़ प्रोपगण्डे में काफ़ी शिद्दत देखने में आई। शियों को काफ़िर और नजिस कहकर गाँव वालों को उन्हें क़त्ल करने की प्रेरणा दी जाने लगी। पिछले सप्ताह शेख़ हसन शुहाता गाँव के ही एक घर पर दूसरे शियों के साथ इमामे ज़माना अज. की जन्म का जश्न मनाने लगे। फ़्रांस प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार यासिर यहिया नामक एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना है कि जैसे ही गाँव वालों को पता चला कि शेख़ हसन शुहाता गाँव में मौजूद हैं तो फ़ौरन उस घर पहुँच गए जहाँ महफ़िल हो रही थी और घर के मालिक से शेख़ को उनके हवाले करने की मांग करने लगे। जब घर के मालिक ने इंकार किया तो उन लोगों नें घर पर धावा बोल दिया। हमले में घर को जलाने की कोशिश की गई। यासिर यहिया बताते हैं कि गाँव वालों नें बड़े बड़े कुदालों और दूसरे लोहे के औज़ारों की मदद से घर की एक दीवार गिरा डाली और उसके बाद वहाँ मौजूद शियों को बाहर निकाल कर गाँव के चौराहे पर लाठी डंडों से मारना शुरू कर दिया। इतना मारा कि कुछ लोग क़त्ल हो गए। इसके बाद शहीदों की लाशों को ज़मीन पर घसीटा गया।एक दूसरे प्रत्यक्षदर्शी का कहना हैःमैंने उन्हें बचाने की कोशिश की लेकिन वह लोग उन्हें जान से मारने पर तुले हुए थे। अल मिनार वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार अपनी बर्बर कार्यवाही के दौरान हमलावर अल्लाहो अकबर और काफ़िर, काफ़िर, शिया काफ़िर के नारे लगा रहे थे। इस दर्दनाक और कष्टदायक घटना में शेख़ हसन शुहाता (66 साल), उनके भाई मोहम्मद शुहाता (53 साल), शुहाता (55 साल) और अब्दुल क़ादिर हसनैन (54 साल) शहीद और कई दूसरे जिनकी संख्या नामालूम है, ज़ख़्मी हो गए।ग़ौरतलब है कि शहीद शेख़ हसन शुहाता मिस्र के शियों के एक महत्वपूर्ण लीडर बल्कि कुछ प्रचार माध्यमों के अनुसार इसना अशरी शियों के सबसे बड़े लीडर माने जाते थे। शेख़ शुहाता एक सुन्नी घर में पैदा हुए थे लेकिन बाद में अपनी स्टडी और रिसर्च के कारण हक़ को पहचानने में कामयाब हो गए। इसलिये उन्होंने 1996 में अपने शिया होने का ऐलान किया और मिस्र के अपदस्थ राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक के दौर में दो बार क़ैद किये गए। शहीद शुहाता ने अपनी एक स्पीच में कहा था कि उनकी गिरफ़्तारी का कारण केवल अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली अ. की विलायत का ऐलान और अहलेबैत के दुश्मनों से दूरी का इज़हार है। मिस्र की हुकूमत ने आपके मुल्क से बाहर जाने पर पाबंदी लगा रखी थी।घटना के समय पुलिस की प्रतिक्रयाकुछ रिपोर्टों से पता चला है कि मिस्र की पुलिस घटना के समय मौके पर मौजूद थी लेकिन उसने शियों को बचाने के लिये कोई क़दम नहीं उठाया। दूसरी ओर कमाण्डर अब्दुल अज़ीम नसरुद्दीन (अलजज़ीरा पुलिस के डिप्टी कमाण्डर) का कहना है कि हमनें उन लोगों को बचाने की कोशिश की लेकिन लोगों की भारी भीड़ और गाँव की तंग गलियों के कारण आगे न जा सके। गाँव वालों नें ख़ुद हम पर भी हमला कर दिया और इस कारण हमें मजबूरन पीछे हटना पड़ा। कमाण्डर नसरुद्दीन का कहना है कि पुलिस नें एक घेरा बंदी किये गये घर घर से पच्चीस शियों को बाहर निकाला जिसके नतीजे में ज़ख़्मियों की संख्या में कमी आई।फ़्रांस प्रेस के प्रेस रिपोर्टर की रिपोर्ट से पता चलता है कि उल्लिखित गाँव के निवासियों की तकफ़ीरियों और बड़ी संख्या में मौजूद शिया मुख़ालिफ़ प्रचार माध्यमों की ओर से पिछले कुछ अरसे से इस क़द्र ब्रेन वाशिंग की गई है कि उन्हें अभी भी उल्लिखित बर्बर कार्यवाही का कोई दुख नहीं है। यहाँ तक कि कुछ गाँव वाले इस घटना पर पूरी तरह राज़ी हैं और यह अत्यन्त चिंताजनक बात है।ग़ौरतलब है कि इस गाँव में बीस शिया घर हैं और गाँव वाले शुहाता पर शिया मज़हब के प्रचार का आरोप लगाते आए हैं। गाँव के एक निवासी नें अपना नाम ज़ाहिर न करने की शर्त पर फ़्रांस प्रेस के प्रेस रिपोर्टर से बताया कि शुहाता के ख़िलाफ़ इतने ग़म व ग़ुस्से का कारण यह था कि उनके कारण हाल ही में गाँव के कुछ नौजवान शिया हुए हैं।जामियातुल अज़हर और राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी की ओर से घटना की निंदा इस दौरान उल्लिखित बर्बर कार्यवाही की चारों तरफ़ से निंदा का सिलसिला शुरू हो गया है। हालांकि ऐसा भी महसूस हो रहा है कि मिस्र के कुछ सियासी संगठन अपने तुच्ठ हितों के लिये शोहदा के ख़ून पर सियासत करना चाहती हैं। जामिया तुल अज़हर नें उल्लिखित घटना की निंदा करते हुए कहा है कि जामिया के अधिकारियों की ओर से घटना की छानबीन की जा रही है। अल अज़हर की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि कुछ लोगों की ओर से अन्जाम दिया गया। यह अपराधिक कार्यवाही गुनाहे कबीरा और शरीअते मुक़द्देसा की ओर से वर्जित बहुत बड़ी बुराई है। यह क़ानूनी हिसाब से अपराध है, कानून भी उसे अपराध मानता है।बयान में और ज़्यादा कहा गया है कि इस्लाम, मिस्र और मिस्री विश्वास, मसलक और नज़रिये की बुनियाद पर किसी की जान लेने के क़ाएल नहीं और इस तरह के घटनाओं उनके लिये अजीब हैं। इस तरह के घटनाओं का मक़सद उन संवेदनशील लमहों में मुल्क को अशांति से दोचार करना और हमें फ़ितनों की आग में धकेलना है। इसलिये हुकूमत और जनता दोनों को होशियार रहना चाहिये। अल अज़हर ने अपने बयान में उल्लिखित घटना की तत्काल रिसर्च और अपराधी पाए जाने वाले लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त से सख़्त कार्यवाही का मुतालेबा किया है। दूसरी ओर बहुत से लोग मिस्र के राष्ट्रपति मोहम्मद मुरसी को उल्लिखित घटना का इंडाएरेक्ट तौर पर ज़िम्मेदार क़रार दे रहे हैं इसलिये कि उन्होंने सलफ़ियों से गठबंधन कर रखा है। हालांकि मोहम्मद मुरसी नें एक बयान जारी कर के इस घटना की निंदा की है। बयान में ज़ोर देकर कहा गया है कि अल-जज़ीरा में पेश आने वाली घटना मिस्री क़ौम की शिनाख़्त समझे जाने वाले बर्दाश्त और सम्मान के भावना से पूरी तरह टकराव में है। मिस्र की जनता हमेशा अपनी उदारवाद और मॉडरेशन के लिये मशहूर रही है। राष्ट्रपति नें इस तरह की बर्बर कार्यवाहियों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए ऐलान किया कि उन्होंने रिलेटेड संस्थाओं को हुक्म दे दिया है कि घटना की जांच की जाए और अपराधियों को गिरफ़्तार करके जल्द से जल्द अदालत के हवाले किया जाए। मिस्र के प्रधानमंत्री नें भी एक बयान जारी कर के इस भयानक घटन


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