शिया समुदाय के इतिहास पर एक निगाह

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  • Source : विलायत डाट इन
Brief

अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली (अ.) का अनुसरण, आपको दूसरे अस्हाबे पैग़म्बर से सर्वोत्तम व सर्वश्रेष्ठ क़बूल करने और आपसे प्यार व मोहब्बत करने वाले मुसलमानों को शिया कहे जाने का इतिहास बहुत पुराना है इसका सम्बंध अहदे रिसालत यानि रसूले इस्लाम स.अ. के ज़माने से है। शिया व सुन्नी मुहद्देसीन ने पैग़म्बर से जो हदीसें इस बारे में नक़्ल की हैं उनसे साफ़ पता चलता है कि हज़रत अली (अ.) के अनुगामी और चाहने वालों को ख़ुद रसूले इस्लाम ने शिया कहा है। जलालुद्दीन सिव्ती ने आयतان الذين آمنوا و عملوا الصالحات اولئك هم خير البريّة(सूरा-ए-बय्यनः आयत नम्बर 7)की तफ़सीर (व्याख्या) में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाहे अंसारी और अब्दुल्लाह  इब्ने अब्बास से पैग़म्बरे अकरम की रिवायतें नक़्ल की हैं कि आपने हज़रत अली (अ.) की ओर इशारा करके फ़रमायाः यह और उनके शिया क़यामत के दिन कामयाब होंगे।والذى نفسى بيده انّ هذا و شيعته هم الفائزون يوم القيامة(अद्दुर्रुल मनसूर भाग 8 पृष्ठ 538)    इब्ने असीर ने हज़रत रसूले इस्लाम (स.) से रिवायत की है कि उन्होंने हज़रत अली (अ.) को सम्बोधित करके कहाःستقدّم على اللّه انت و شيعتك راضين مرضيين، و يقدم عليه عدوّك غضبانا مقمحين(अन-निहायः भाग 4 पृष्ठ 106 )    तुम और तुम्हारे शिया क़यामत के दिन अल्लाह की सेवा में इस हालत में दाख़िल होंगे कि अल्लाह उनसे संतुष्ट वह अल्लाह से संतुष्ट और तुम्हारे दुश्मन क़यामत के दिन दुख व लज्जा के साथ अल्लाह की बारगाह में हाज़िर होंगे।    ऐसी ही रिवायत शबलंजी ने भी अपनी किताब नूरुल-अबसार में बयान की है। (नूरुल अबसार पृष्ठ 159)    सिव्ती ने एक और रिवायत इब्ने मुर्दवैह के माध्यम से हज़रत अली (अ.) से नक़्ल की है कि पैग़म्बरे अकरम (स.) ने हज़रत अली (अ.) से फ़रमायाः इस आयतانّ الذين آمنوا و عملوا الصالحات اولئك هم خير البريّة से मुराद तुम और तुम्हारे शिया हैं। मेरे और तुम्हारे वादे की जगह हौज़े कौसर है जब उम्मतें हिसाब व किताब के लिए लाई जाएंगी और तुम ख़ुश व कामयाब होगे।انت و شيعتك و موعدي و موعدكم الحوض اذا جاءك الامم للحساب تدعون غرّا محجّلين(अद्दुर्रुल मनसूर भाग 8 पृष्ठ 538)इब्ने हजर, उम्मे सलमा से रिवायत करते हैं कि उम्मे सलमा ने कहाः रसूले अकरम (स.) मेरे पास थे, हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (अ.) और उनके बाद हज़रत अली (अ.) पैग़म्बर की सेवा में आए पैग़म्बर ने हज़रत अली से सम्बोधित होकर कहाःيا علي انت و اصحابك في الجنّة، انت و شيعتك في الجنّة(अस्सवाएक़ुल मोहरेक़ा पृष्ठ 161)    ख़तीबे ख़्वारज़मी अपनी किताब अल-मनाक़िब में हज़रत अली इब्ने अबी तालिब (अ.) से रिवायत करते हैं कि जब रसूले इस्लाम (स.) को मेराज हुई और आप जन्नत में दाखिल हुए तो वहाँ आपने एक पेड़ देखा जिसे विभिन्न तरह के ज़ेवरों और आभूषणों से सजाया गया था। पैग़म्बर (स.) ने जिबरईल से सवाल किया कि यह पेड़ किसके लिए है जिबरईल ने जवाब दियाः आपके चचेरे भाई अली इब्ने अबी तालिब की सम्पत्ति है। जब अल्लाह जन्नतीयों को जन्नत में दाखिल करेगा तो अली के शिया को इस पेड़ के क़रीब लाया जाएगा और वह लोग इस पेड़ के अलंकार व श्रंगार से फायदा उठाएंगे उस समय एक नादकर्ता आवाज़ देगा कि यह लोग अली इब्ने अबी तालिब (अ.) के शिया हैं उन्हों ने दुनिया में दुखों पर संतोष किया था अब उसके बदले में उन्हें यह उपहार दिए गए हैं । (अल-मनाक़िब अध्याय 6, पृष्ठ 73 हदीस नम्बर 52)    उन्हों ने दूसरे स्थान पर जाबिर से रिवायत की है कि हम लोग पैग़म्बर की सेवा में हाज़िर थे कि इतने में अली (अ.) दाखिल होते हैं पैग़म्बर (स.) ने हम लोगों को सम्बोधित करके कहाः (أتاكم اخى) फिर काबे की ओर मुड़ कर फ़रमायाःان هذا و شيعته هم الفائزون يوم القيامة(पिछला रीफ़्रेंस नवाँ अध्याय पृष्ठ 111 हदीस नम्बर 120)अल्लाह की क़सम यह (अली) और उनके अनुगामी ही क़यामत के दिन कामयाब होने वाले हैं।    अहले सुन्नत की किताबों में इस बारे में दूसरी रिवायतें भी मौजूद हैं जिनका बयान करना चर्चा के लम्बे होने का कारण होगा इसलिये केवल उल्लिखित रिवायतें ही हमारे दावे को सही ससाबित करने के लिए काफ़ी हैं। (तारीख़ुश्शिया पृष्ठ 4-8 , बुहूसुन फ़िल मेलले वन्नहेल भाग 6 पृष्ठ 102-106)     उल्लिखित हदीसों से उत्तम रूप से यह स्पष्ट हो जाता है कि अली (अ.) के चाहने वालों और उनका अनुसरण करने वालों को सबसे पहले पैग़म्बर अकरम (स.) ने ही शिया कहा है। चूँकि यह परिभाषा रसूले इस्लाम स.अ. के ज़माने में प्रसिद्ध हो चुकी थी इसलिये पैग़म्बर के बाद भी प्रचारित रही। इसलिये मसऊदी ने सक़ीफ़ा से सम्बंधित घटनाओं का उल्लेख करते हुए लिखा है कि सक़ीफ़ा में अबू बक्र की बैअत का मामला ख़त्म होने के बाद इमाम अली (अ.) और आपके कुछ शिया उनके घर में जमा हो गए। (इस्बातुल वसीयः पृष्ठ 121)    अमीरूल मोमिनीन हज़रत अली (अ.) जमल की जंग के बारे में फ़रमाते हैः जमल वालों ने बसरा में मेरे शियों पर हमला कर दिया कुछ को छल कपट से शहीद कर दिया और कुछ उनके साथ मुक़ाबिले के लिए उठ खड़े हुए। और आख़िर में शहीद हो गए।وثبوا على شيعتي، فقتلوا طائفة منهم غدراً، و طائفة عضّوا على اسيافهم، فضاربوا بها حتّى لقوا اللّه صادقين(नह्जुल-बलागः ख़ुत्बा नम्बर 218)


پیام رهبر انقلاب به مسلمانان جهان به مناسبت حج 1440 / 2019
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