कभी ऐसा भी होता है।

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Brief

काउंटर पर पहुँचते ही उसने अपना पासपोर्ट और टिकट निकाला और लगेज भी वज़न करने के लिये रख दिया। फिर बोर्डिंग कार्ड लेने के बाद सीधा इमीग्रेशन के लिये पहुँची और इमीग्रेशन चेक होते ही एक दुकान की तरफ़ गई जहाँ खाने पीने की काफ़ी चीज़ें थीं।....

काउंटर पर पहुँचते ही उसने अपना पासपोर्ट और टिकट निकाला और लगेज भी वज़न करने के लिये रख दिया। फिर बोर्डिंग कार्ड लेने के बाद सीधा इमीग्रेशन के लिये पहुँची और इमीग्रेशन चेक होते ही एक दुकान की तरफ़ गई जहाँ खाने पीने की काफ़ी चीज़ें थीं। उसनें बिस्कुट का एक पैकेट उठाया और वेटिंग रूम में एक कुर्सी पर बैठ गई।कुर्सी पर बैठते ही उसनें न्यूज़ पेपर निकाला और पढ़ने लगी। उसके बग़ल वाली कुर्सी पर एक आदमी बैठा कोई मैगज़ीन पढ़ रहा था और बिस्कुट भी खा रहा था। उस आदमी नें एक बिस्कुट उसकी तरफ़ बढ़ाया, बिस्कुट उसे एक धचका लगा। यह क्या यह तो मेरा बिस्कुट है! उसे ग़ुस्सा आया लेकिन कुछ कह न सकी। वह आदमी मैगज़ीन पढ़ता रहा और बिस्कुट खाता रहा और उसे ग़ुस्सा आता रहा और कुढ़ती रही लेकिन कुछ कह नहीं सकी।अब केवल एक बिस्कुट बचा था। उस आदमी नें एक बार फिर उसे बिस्कुट आफ़र किया। अब तो उसका ग़ुस्सा आसमान को छूने लगा और सोचने लगी: बड़ा अजीब आदमी है एक तो मेरा सारा बिस्कुट खा गया ऊपर से इस तरह की हरकतें कर रहा है। इस बार वह कुछ कहना चाहती थी लेकिन फ़्लाइट में जाने के लिये बेल बज चुकी थी इसलिये उसने फिर इग्नोर कर दिया।फ़्लाइट में जाने के बाद जब वह अपनी सीट पर बैठी और अपना पर्स खोला तो क्या देखती है उसनें बिस्कुट का जो पैकेट अपने लिये ख़रीदा था वह बैग में ही रखा है।उस से बहुत बड़ी ग़लती हुई थी!क्योंकि उस आदमी नें अपना बिस्कुट उसे आफ़र किया था।उसे बहुत पश्ताचाप हुआ लेकिन अब वह न माफ़ी मांग सकती थी और नाहि कुछ कह सकती थी!बात केवल इतनी थी कि वह आदमी जो बिस्कुट खा रहा था वह उसी बिस्कुट जैसा था जो उसनें ख़रीदा था। कभी ऐसा भी होता है कि हम एक जैसी दिखाई देने वाली चीज़ों के कारण धोखा खा जाते हैं, इस लिये कोई भी फ़ैसला करने से पहले अच्छी तरह सोच विचार और जाँच पड़ताल करना ज़रूरी है।


*शहादत स्पेशल इश्यू*  शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी व अबू महदी अल-मुहंदिस
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