दुरूद पढ़ने का तरीक़ा

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  • Source : विलायत डाट काम
यह एक निश्चित और तय बात है कि खुद पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ) ने मुसलमानों को दुरुद पढ़ने का यह तरीक़ा सिखाया है जिस समय यह आयत नाज़िल हुई तो मुसलमानों ने हज़रत (स.) से पूछा: हम कैसे दरुद पढ़ें?
हज़रत मुहम्मद स.अ पर सलवात पढ़ते समय क्यों ऑले मुहम्मद को जोड़ा जाता हैं और:
اللّھم صل علي محمد و آل محمد
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद और आले मुहम्मद स.अ. कहा जाता है?
यह एक निश्चित और तय बात है कि खुद पैग़म्बरे इस्लाम (स.अ) ने मुसलमानों को दुरुद पढ़ने का यह तरीक़ा सिखाया है जिस समय यह आयत नाज़िल हुई तो मुसलमानों ने हज़रत (स.) से पूछा: हम कैसे दरुद पढ़ें?
पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने फ़रमाया:
''لاتُصلُّوا علَّ الصلاة البتراء '
मुझ पर अधूरी सलवात मत पढ़ना। 
'मुसलमानों ने फिर हज़रत (स.) से सवाल किया हम कैसे दुरुद पढ़ें?
पैगम्बरे इस्लाम (स.अ) ने फ़रमाया कहो:
اللھم صلِّ علي محمد و آل محمد
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद और आले मुहम्मद।
अहले बैत (अ) महानता और सम्मान के एक ऐसे महान स्तर पर रहे हैं जिसे इमाम शाफ़ेई ने अपने मशहूर पंक्तियों में इस तरह लिखा क्या है।

يا اھل بيت رسول اللہ حبُّکم
فرض من اللہ ف القرآن انزلہ
کفاکم من عظيم القدر اءنکم
مَن لم يصلِّ عليکم لاصلاة لہ

ऐ पैग़म्बर (स.) के अहले बैत (अ.) आप की मुहब्बत को ख़ुदा ने कुरान में नाज़िल करके वाजिब कर दिया है। आप की अहमियत और इज्जत के लिए बस यही काफी है कि जो आदमी भी आप पर सलवात न पढ़े उस की नमाज़ सही नहीं होती है।
दुर्रुल मनसूर भाग 5 में सूरह अहज़ाब की आयत 56 के संदर्भ में भी मौजूद है इस रिवायत को सिहाहे सित्ता और मुस्नदों (जैसे अब्दुल रज्जाक, इब्ने अबी शबीह, अहमद, बुखारी, मुस्लिम, अबू दाऊद, तिरमिज़ी, निसाई, इब्ने माजा और इब्ने मुर्दवैह) के हवाले से बयान किया है।

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