• रमज़ानुल मुबारक-9

    रोज़े के लिए इस्लामी शिक्षाओं में आया है कि अल्लाह ने कहा है कि मेरे बंदे हर इबादत अपने लिए भी करते हैं लेकिन रोज़ा केवल मेरे लिए होता है और मैं ही उस का इनाम दूंगा

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-8

    पैग़म्बरे इस्लाम ने एक हदीस में जवानों से सिफ़ारिश की है कि वह अपनी इच्छाओं पर कंट्रोल के लिए शादी करे और अगर यह संभव न हो तो रोज़ा रखें

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-7

    इंसान को बनाने वाले अल्लाह ने उसको जो भी हुक्म दिये हैं वह निश्चित रूप से इंसान के ही हित में होते हैं चाहे देखने में उसमें हमें अपना कोई नुक़सान नज़र आए। रमज़ान के रोज़े संभव है कि कुछ लोगों के लिए कष्ट और तकलीफ़ का कारण हों लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि रोज़े के आध्यात्मिक फ़ायदों के साथ ही साथ इसके शारीरिक फ़ायदे भी बहुत हैं। पैग़म्बरे इस्लाम फ़रमाते हैं- रोज़ा रखो ताकि स्वस्थ रहो।

    आगे पढ़ें ...
  • हज़रत अबू तालिब (अ) की वफ़ात

    रमज़ान के मुबारक महीने की सातवीं तारीख हज़रत अबू तालिब (अ) की वफ़ात का दिन है। हज़रत अबू तालिब पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के चचा और अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम के बाप हैं। आप इस्लामी इतिहास की ऐसी महान हस्ती हैं जिन्होंने उस युग में इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का समर्थन किया और उनकी सुरक्षा की जब हर कोई इस्लाम और पैग़म्बर (सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम) को नाबूद करने पर तुला हुआ था

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक -6

    पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहि वे आलेही व सल्लम फ़रमाते हैं जब भी तुम में से कोई दुआ करे तो सबके लिए करे क्योंकि ऐसा करने से दुआ के क़ुबूल होने की संभावना बढ़ जाती है। अल्लाह ने दुआ का हुक्म देते हुए कहा है कि जो लोग दुआ करने से मुंह मोड़ेंगे उन्हें मैं जल्दी ही जहन्नम में डाल दूंगा....

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक -5

    क़ुरआने करीम, अल्लाह पर ईमान रखने वालों को यह ख़बर देता है कि उसने तुम लोगों पर रोज़ा वाजिब किया ताकि उसके द्वारा तुम लोग, अल्लाह तक पहुंच सको क्योंकि वास्तव में अगर देखा जाए तो कुछ महत्वपूर्ण इबादतों को छोड़ कर रोज़े की तरह कोई भी इबादत इंसान को उस ऊंचे स्थान तक पहुंचाने में कामयाब नहीं होती।

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-४

    रमज़ान के महीने को ख़ुदा नें ख़ास महीना बनाया है, इस में कुछ ख़ास चीज़ें और ख़ास बातें हैं। इसकी कुछ ख़ास विशेषताएं हैं। उसकी हर चीज़ में बरकत है। इसके दिन, इसकी रातें, इसके घण्टे, इसकी हर घड़ी, इसमें ज़िक्र करना, थोड़ा सा सदक़ा देना, कोई नेक काम करना, सब में बरकत है। दूसरे दिनों में एक नेक काम के लिये जो सवाब है उसमें वह हज़ार गुना हो जाता है।

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-३

    रमज़ानुल मुबारक दुआ मांगने का महीना है इंसान का अपने गुनाहों के माफ करवाने का महीना है, रसूले इस्लाम स.अ ने फरमायाः रमज़ान वह महीना है जिसकी शुरुआत रहमत, बीच के दिन मग़फिरत और गुनाहों की माफ़ी और आखिरी दिन जहन्नम की आग से आज़ादी के दिन हैं।

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-२

    रोज़े के बहुत ज़्यादा शारीरिक और आध्यात्मिक फ़ायदे हैं। इस्लाम की महान हस्तियों ने रोज़े को जिस्म को सेहत देने वाला, रूह को मज़बूत करने वाला, हैवानी इच्छाओं को कंट्रोल करने वाला, रूह को शुद्ध करने वाला और बेरंग ज़िंदगी में तब्दीली लाने वाला मानते हैं जो समाज को स्वस्थ रखने की भूमिका अदा करता है।

    आगे पढ़ें ...
  • सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनाई के बयान की रौशनी में

    मौसम ख़ुद को बनाने का

    हमारी मिसाल कच्चे माल (raw material) जैसी है, अगर हमनें इस पर काम किया और उसे एक शक्ल में बदला और कोई काम की चीज़ बनाई तो फिर हम सफल हैं, हमारी ज़िन्दगी का अस्ली मक़सद भी यही है।

    आगे पढ़ें ...
  • सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयान की रौशनी में

    मोमिन की मेराज

    रमज़ानुल मुबारक एक अवसर है अल्लाह की तरफ़ ध्यान देने के लिये, साल के अकसर दिनों में दुनिया की चीज़ें और हमारे अन्दर की इच्छाएं हमें पनी तरफ़ खींचती रहती हैं और हम ख़ुदा को भूल जाते हैं,

    आगे पढ़ें ...
  • रिश्तेदारों से मिलना जुलना

    इस्लाम ने जिन समाजी और सोशली अधिकारों की ताकीद की है और मुसलमानों को उनकी पाबंदी का हुक्म दिया है उनमें से एक यह है कि वह अपने घर परिवार और रिश्तेदारों के साथ हमेशा अच्छे सम्पर्क बनाये रखें इसी को सिल-ए-रहेम अर्थात रिश्तेदारों से मिलना जुलना कहा जाता है।

    आगे पढ़ें ...
  • इस्लामी कल्चर-2

    इससे पहले वाले हिस्से में हमने बताया कि इंसानी कल्चर में इस्लामी सिवीलाईज़ेशन व कल्चर की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। पूरे इतिहास में विदेशियों ने इस्लामी सिवीलाईज़ेशन की महान व बड़ी-बड़ी उपलब्धियों की अनदेखी करके मुसलमान उल्मा व वैज्ञानिकों की कुछ खोजों को अपनी खोज बताने की कोशिश की है।

    आगे पढ़ें ...
  • रोज़ा कुरान की निगाह में

    ईमान लाने वालों तुम्हारे ऊपर रोज़े इस तरह लिख दिए गए हैं जिस तरह तुम्हारे पहले वालों पर लिख दिए गए थे। शायद तुम इस तरह मुत्तक़ी व सदाचारी बन जाओ।.

    आगे पढ़ें ...
  • रमज़ानुल मुबारक-१

    रमज़ानुल मुबारक का महीना, अल्लाह के बनाए हुए महीनों में सबसे सर्वश्रेष्ठ महीना है। क़ुरआने करीम इसी महीने में उतरा है। इस्लामी हदीसों में आया है कि आसमान और जन्नत के दरवाज़े इस महीने में खोल दिये जाते हैं जबकि जहन्नम के दरवाज़े बंद हो जाते हैं।

    आगे पढ़ें ...
  • माँ बाप के अधिकार

    हमें अच्छी तरह मालूम है कि इस्लाम एक समाजिक और सोशल दीन है और उसके मानने वाले केवल अल्लाह तआला की इच्छा के लिए और उसकी राह में क़दम उठाते हुए एक दूसरे से सम्बंध और सम्पर्क रखते हैं।

    आगे पढ़ें ...
  • काफ़िर, काफ़िर के नारे मिस्र के एक शिया लीडर की शहादत का कारण बन गए।

    इमामे ज़माना अज. की जन्मदिवस के समारोह के आयोजन पर मिस्र के शिया मौलाना शेख़ हसन शुहाता को शहीद कर दिया गया। प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले मिस्र में एक इंटर-नेशनल कॉन्फ़्रेंस हुई थी जिसमें पूरी इस्लामी दुनिया से उल्मा नें शिरकत की थी, इसमें कई तकफ़ीरी मुल्ला भी शामिल थे। इस कॉन्फ़्रेंस में सीरियन सरकार (और उसी के संदर्भ में हिज़बुल्लाह) के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया गया।

    आगे पढ़ें ...
  • एक गिलास पानी या नदी।

    एक जवान किसी हकीम के पास गया और बोला: मुझे कोई नसीहत कीजिए या कोई ऐसी बात बताइये जो जीवन की कठिनाईयों में हमेशा मेरे काम आए। वह हकीम जो काफ़ी पढ़ा लिखा था और बहुत ही अनुभवी आदमी था, जवान से बोला: जाओ अन्दर से नमक का डिब्बा और एक गिलास पानी लेकर आओ।

    आगे पढ़ें ...
  • सुप्रीम लीडर के बयान की रौशनी में

    इमाम महदी (अ.ज) के प्रतीक्षकों की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

    ईरानी राष्ट्र अल्लाह की कृपा और हिदायत तथा हज़रत वली-ए-अस्र (अरवाहुना लहुल फ़िदा) की गुप्त आध्यात्मिक सहायता और उनकी पाक दुआवों के ज़ेरे साया दुनिया में एक बार फिर इस्लामी कल्चर का झंडा लहराएगा और इस संस्कृति का महान क़िला तय्यार करेगा। निश्चित रूप से यही आपका भविष्य है, नौजवान अपने आप को इस महान आंदोलन के लिए तैयार रखें, मोमिन और ईमानदार लोग इसे अपना लक्ष्य बनायें

    आगे पढ़ें ...
  • इमाम ख़ुमैनी की ज़िंदगी पर एक नज़र।

    चार जून सन 1989 ईसवी को दुनिया एक ऐसी महान हस्ती से बिछड़ हो गई जिसने अपने चरित्र, व्यवहार, हिम्मत, समझबूझ और अल्लाह पर पूरे यक़ीन के साथ दुनिया के सभी साम्राज्यवादियों ख़ास कर अत्याचारी व अपराधी अमरीकी सरकार का डटकर मुक़ाबला किया और इस्लामी प्रतिरोध का झंडा पूरी दुनिया पर फहराया।

    आगे पढ़ें ...
  • जीवन की समस्याएं

    आज टीचर फिर क्लास में गिलास ले कर आए लेकिन इस बार उन्होंने कुछ अनोखे ढ़ंग से नया पाठ पढ़ाया। उन्होंने गिलास को हाथ में उठाया और स्टूडेंट्स से पूछा: इस गिलास का वज़न कितना होगा? यह बहुत भारी है या बिल्कुल हल्का?

    आगे पढ़ें ...
  • इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्साम

    पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहो अलैहे वआलेही वसल्लम के अहलेबैत में से हर एक अपने समय में इल्म और कमाल व परिपूर्णता की निगाह से बेमिसाल था।

    आगे पढ़ें ...
  • इस्लामी सभ्यता

    इस्लामी कल्चर व सभ्यता, इंसानी इतिहास की सबसे महान सभ्यताओं में से एक है। हालांकि इस कल्चर में, जो इस्लाम के उदय के साथ वुजूद में आई, बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव आए हैं लेकिन इसका अतीत बहुत ज़्यादा रौशन है। इस्लामी सभ्यता के इतिहास की समीक्षा से पता चलता है कि यह कल्चर व सभ्यता, एक लॉजिकल आधार पर वुजूद में आई है।

    आगे पढ़ें ...
  • इस्लाम में आज़ादी 4

    एक दूसरा संदेह यह पैदा किया जाता है कि इंसान क़ुरआन के अनुसार इलाही प्रतिनिधि है और इसका मतलब यह हैं कि इंसान ज़मीन पर अल्लाह तआला का उत्तराधिकारी है और अल्लाह तआला की तरह काम करता है जिस तरह अल्लाह तआला ने इस दुनिया को पैदा किया है उसी

    आगे पढ़ें ...
  • कभी ऐसा भी होता है।

    काउंटर पर पहुँचते ही उसने अपना पासपोर्ट और टिकट निकाला और लगेज भी वज़न करने के लिये रख दिया। फिर बोर्डिंग कार्ड लेने के बाद सीधा इमीग्रेशन के लिये पहुँची और इमीग्रेशन चेक होते ही एक दुकान की तरफ़ गई जहाँ खाने पीने की काफ़ी चीज़ें थीं।....

    आगे पढ़ें ...
  • आइये हम भी पुल बनाएं

    एक मेहनती और दयालू बाप जिसके दो बेटे थे। बाप दुनिया से चल बसा और बेटों के लिये विरासत में एक बाग़ छोड़ गया। कई वर्षों तक दोनों भाई हँसी ख़ुशी साथ साथ रहे लेकिन अचानक एक छोटे से बिगाड़ की वजह से आपस में लड़ पड़े।

    आगे पढ़ें ...
  • क्लास का पहला पाठ

    टीचर नें अपना भारी भरकम थैला मेज़ पर रखा और शीशे का एक गिलास निकाल कर सबके सामने रख दिया। फिर कुछ मोटे पत्थर थैले से निकाले और ग्लास में डाल दिये, स्टूडेंट्स टीचर की इस हरकत को बड़े आश्चर्य से देखते रहे

    आगे पढ़ें ...
قدس راه شهداء
*शहादत स्पेशल इश्यू*  शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी व अबू महदी अल-मुहंदिस
conference-abu-talib
We are All Zakzaky