• ईदुल अज़्हा

    आज ईदुल अज़्हा का मुबारक दिन है आज विश्व के सारे मुसलमान खुशी मना रहे हैं। ज़िल हिज्जा महीने की दसवीं तारीख का सूरज निकलने के साथ ही विश्व के साथ सारे मुसलमान ईदे क़ुर्बान की नमाज़ पढ़ने के लिए चल पड़े हैं। ईदुल अज़्हा या बकरईद महान ईश्वर की उपासना करने वाले व्यक्तियों की प्रसन्नता और बहुत बड़ी ईश्वरीय परीक्षा का दिन है

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  • हज आत्मा की ताज़गी और अनन्य ईश्वर के क़रीब होने का मौसम है।

    हज की महा धर्मसभा में हाजी सफ़ेद चकोर के समान काबे की परिक्रमा करते हैं और ईश्वरीय आदेश के पालन का वचन देने वाले अपनी श्रद्धा व स्नेह का प्रदर्शन करते

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  • इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

    ऐ सुफ़यान ! जो इंसान झूठ बोलने की आदत रखता है उसमें मानवता नाम की कोई चीज नहीं और जो ताक़त वाला है उसका कोई दोस्त नहीं और जो हासिद (जलने वाला) है उसे आराम और चैन नहीं मिल सकता है और जो आदमी बुरे चरित्र का है वह कभी सज्जनता और बुज़ुर्गी व शराफ़त नहीं रख सकता।

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  • इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की पांच नसीहतें।

    हमेशा सच बोलो और अमानत अदा करने में कोताही न करो चाहे वह अमानत मोमिन की हो या गुनहगार की। बेशक यह दो चीज़ें रिज़्क़ (Aliment) की कुंजियां हैं:

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  • एहसान

    एहसान इंसानी समाज में बहुत कॉमन लफ़्ज़ है। एर ग़ैर मुस्लिम भी एहसान को अच्छी तरह जानता है। बस फ़र्क़ यह है कि जो एहसान का लफ़्ज़ हमारे समाज में इस्तेमाल होता है वह क़ुरआन वाला एहसान नहीं है क्यों कि एहसान अरबी ज़बान का लफ़्ज़ है जो लफ़्ज़े "अहसन" से बना है और अहसन के मायने अच्छा, ख़ूब, बेहतरीन होते हैं।

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  • आयतुल कुर्सी

    अहमद बड़ी ग़मगीन हालत में अपनी दादी के बारे में सोच रहा था। पुरानी यादों के साथ-साथ आँसुओं का एक सैलाब उसकी आँखों से जारी था। परदेस में दादी की मौत की ख़बर ने उसे हिला कर रख दिया था।

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  • हदीसे रसूल (स.) और परवरिश

    समझदार पैरेंट्स अपने बच्चों पर पूरी संजीदगी से तवज्जोह देते हैं। वह अपने बच्चों के लिए रहने सहने की अच्छी सहूलतों के साथ-साथ उनके अच्छे कैरेक्टर, हुयूमन वैल्यूज़, अदब-आदाब और रूह की पाकीज़गी के ज़्यदा ख़्वाहिशमन्द होते हैं।

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  • झूठ क्यों नहीं बोलना चाहिए

    आम तौर पर झूठ किसी एक रूहानी कमज़ोरी की वजह से पैदा होता है यानी कभी ऐसा भी होता है कि इंसान ग़ुरबत और लाचारी से घबरा कर, दूसरे लोगों के उसको अकेले छोड़ देने की बुनियाद पर या फिर अपने ओहदे और मंसब की हिफ़ाज़त के लिए झूठ बोल देते हैं।

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  • मेडिकल एक्सपर्टः

    तरबूज़ का शरबत जिस्म की थकान उतारने के लिए उपयोगी है।

    मेडिकल एक्सपर्ट के अनुसार जिस्मानी मेहनत के बाद तरबूज का शरबत शरीर की थकान उतारने के लिए और शरीर को मजबूत बनाने के लिए बहुत ही उपयोगी है।

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  • इमामे ज़माना (अ.ज) की मदद करने वाली आठ औरतें।

    इमामे ज़माना (अ.ज) की मदद करने वाली औरतों का तीसरा समूह उन औरतों पर आधारित हैं जिन्हें हज़रत हुज्जत (अ.ज) के ज़ुहूर की बरकत से दोबारा ज़िंदा किया जाएगा।

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  • अगर सुकून की ज़िन्दगी चाहते हो तो۔۔!

    बुरी हरकतों और आदतों में से एक दूसरों के बारे में बुरा सोचना और उनकी बातों में छान-बीन करना है जिनसे हमारा कोई मतलब नहीं है, यह बुराई बड़े गुनाहों में से है और क़ुरआन और हदीस दोनों में इसको नकारा गया है

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  • आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयान की रौशनी में

    रसूले अकरम (स.अ.) की अमानतदारी व ईमानदारी।

    रसूले अकरम (स.अ.) की अमानतदारी व ईमानदारी इस तरह से मशहूर थी कि इस्लाम से पहले उनका उपनाम ही 'अमीन' पड़ गया। लोग अपने कीमती सामान बहुत संतुष्ट होकर पैग़म्बरे इस्लाम (स.) के सुपुर्द कर दिया करते थे और पूरा यक़ीन रखते थे कि वह अमानत हर हालत में उन्हें सही और सुरक्षित वापस मिल जाएगी...

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  • इस्लामी समाज में कुरआन की भूमिका।

    कुराने मजीद इल्म का सबसे बड़ा खजाना और समाज में फैली गुमराहियों को सुधारने के लिये बेहतरीन बयान है। कमाल और व्यापकता कुरआने करीम की ऐसी ख़ास विशेषता है जो इंसानी समाजों की सभी जरूरतों का जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है और दुनिया और आख़ेरत के सौभाग्य अपने दामन में समेटे हुए है। वास्तव में मानव इतिहास के सभी दौर और ज़माने में इस्लाम की यह व्यापकता व विशेषता कुरआन से व्युत्पन्न है।

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  • कव्वे और लकड़हारे की कहानी।

    एक बार की बात है कि एक गांव में एक ग़रीब लकड़हारा रहता था, वह प्रतिदिन जंगल से लकड़ी काट कर लाता और उन्हें बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता था। लकड़हारा बहुत गरीब लेकिन ईमानदार, दयालु और अच्छे चरित्र वाला आदमी था। वह हमेशा दूसरों के काम आता और बेज़बान जानवरों और पक्षियों आदि का भी ख़्याल रखता था।

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  • रमज़ानुल मुबारक -15

    पैगम्बरे इस्लाम (स.अ) ने फ़रमाया: जब क़यामत होगी तो एक आवाज़ आएगी: कहाँ हैं अल्लाह के मेहमान? तो रोज़ेदारों को लाया जाएगा ... उन्हें बैहतरीन सवारियों पर सवार किया जाएगा और उनके सिर पर मुकुट सजाया जाएगा और उन्हें जन्नत में ले जाया जाएगा।

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  • शबे क़द्र आयतुल्लाह ख़ामेनई की निगाह में

    विभिन्न अवसरों पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह ख़ामेनई ने शबे क़द्र के बारे में बहुत अच्छी और महत्व पूर्ण बातों की तरफ़ इशारा किया है जिनमें से कुछ बातें हम यहाँ बयान कर रहे हैं।

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  • रोज़े के जिस्मानी फ़ायदे, साइंस की निगाह में

    आज हम लोग रमज़ान के मुबारक महीने मे एक दीनी कर्तव्य समझ कर रोज़े रखते हैं जो सही भी है लेकिन दीनी कर्तव्य और सवाब के अलावा भी रोज़े के बहुत से फ़ायदे हैं जिनमे से कुछ फ़ायदे हमारी सेहत व स्वास्थ से सम्बन्धित हैं, लेकिन हम में से बहुत से लोग यह नही जानते कि रोज़ा हमारी सेहत के लिए कितना ज़रूरी है

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  • रमज़ानुल मुबारक -14

    अल्लाह के पैग़म्बरों का कहना है कि रमज़ान के महीने में शैतान के हाथ पैर बांध दिए जाते हैं कि वह दूसरों को बहका न सके। दूसरे शब्दों में यह कहना चाहिए कि जब अल्लाह के सदाचारी बंदे रोज़ा रखते हैं तो उनके अंदर शैतान के बहकावों का मुक़ाबला करने की ताक़त बढ़ जाती है जो उन्हें सुरक्षित रखती है

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  • सुप्रीम लीडर हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनईः

    जो नहजुल बलाग़ा नहीं पढ़ता वह कुरान से बेखबर है।

    हमें नहजुल बलाग़ा की ओर अधिक ध्यान देना चाहिए, उसकी और ज़्यादा शिक्षा लेनी चाहिए, अमीरूल मोमिनीन के इस मौजें मारते ज्ञान व हिकमत के समंदर से और ज्यादा लाभान्वित होना चाहिए। यह किताब सभी पहलू स्पष्ट करती है और हमें हर तरह की शिक्षा से मालामाल करती है

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  • रमज़ानुल मुबारक-12

    रमज़ान वह महीना है जिसमें ख़ुदा वन्दे आलम ने तुम पर रोज़े वाजिब किए हैं इसलिए जो भी इसमें ईमान और ख़ुदा से इनाम पाने की उम्मीद से रोज़ा रखे तो ऐसे गुनाहों से मुक्त हो जाएगा जैसे माँ के पेट से बिना गुनाह के पैदा हुआ था।

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  • रमज़ानुल मुबारक-9

    रोज़े के लिए इस्लामी शिक्षाओं में आया है कि अल्लाह ने कहा है कि मेरे बंदे हर इबादत अपने लिए भी करते हैं लेकिन रोज़ा केवल मेरे लिए होता है और मैं ही उस का इनाम दूंगा

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  • रमज़ानुल मुबारक-8

    पैग़म्बरे इस्लाम ने एक हदीस में जवानों से सिफ़ारिश की है कि वह अपनी इच्छाओं पर कंट्रोल के लिए शादी करे और अगर यह संभव न हो तो रोज़ा रखें

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  • रमज़ानुल मुबारक-7

    इंसान को बनाने वाले अल्लाह ने उसको जो भी हुक्म दिये हैं वह निश्चित रूप से इंसान के ही हित में होते हैं चाहे देखने में उसमें हमें अपना कोई नुक़सान नज़र आए। रमज़ान के रोज़े संभव है कि कुछ लोगों के लिए कष्ट और तकलीफ़ का कारण हों लेकिन अब यह स्पष्ट हो चुका है कि रोज़े के आध्यात्मिक फ़ायदों के साथ ही साथ इसके शारीरिक फ़ायदे भी बहुत हैं। पैग़म्बरे इस्लाम फ़रमाते हैं- रोज़ा रखो ताकि स्वस्थ रहो।

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  • हज़रत अबू तालिब (अ) की वफ़ात

    रमज़ान के मुबारक महीने की सातवीं तारीख हज़रत अबू तालिब (अ) की वफ़ात का दिन है। हज़रत अबू तालिब पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम के चचा और अमीरुल मोमिनीन अली अलैहिस्सलाम के बाप हैं। आप इस्लामी इतिहास की ऐसी महान हस्ती हैं जिन्होंने उस युग में इस्लाम और पैग़म्बरे इस्लाम (स.) का समर्थन किया और उनकी सुरक्षा की जब हर कोई इस्लाम और पैग़म्बर (सल्लल्लाहो अलैहे व आलिही वसल्लम) को नाबूद करने पर तुला हुआ था

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  • रमज़ानुल मुबारक -6

    पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल लाहो अलैहि वे आलेही व सल्लम फ़रमाते हैं जब भी तुम में से कोई दुआ करे तो सबके लिए करे क्योंकि ऐसा करने से दुआ के क़ुबूल होने की संभावना बढ़ जाती है। अल्लाह ने दुआ का हुक्म देते हुए कहा है कि जो लोग दुआ करने से मुंह मोड़ेंगे उन्हें मैं जल्दी ही जहन्नम में डाल दूंगा....

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  • रमज़ानुल मुबारक -5

    क़ुरआने करीम, अल्लाह पर ईमान रखने वालों को यह ख़बर देता है कि उसने तुम लोगों पर रोज़ा वाजिब किया ताकि उसके द्वारा तुम लोग, अल्लाह तक पहुंच सको क्योंकि वास्तव में अगर देखा जाए तो कुछ महत्वपूर्ण इबादतों को छोड़ कर रोज़े की तरह कोई भी इबादत इंसान को उस ऊंचे स्थान तक पहुंचाने में कामयाब नहीं होती।

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  • रमज़ानुल मुबारक-४

    रमज़ान के महीने को ख़ुदा नें ख़ास महीना बनाया है, इस में कुछ ख़ास चीज़ें और ख़ास बातें हैं। इसकी कुछ ख़ास विशेषताएं हैं। उसकी हर चीज़ में बरकत है। इसके दिन, इसकी रातें, इसके घण्टे, इसकी हर घड़ी, इसमें ज़िक्र करना, थोड़ा सा सदक़ा देना, कोई नेक काम करना, सब में बरकत है। दूसरे दिनों में एक नेक काम के लिये जो सवाब है उसमें वह हज़ार गुना हो जाता है।

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  • रमज़ानुल मुबारक-३

    रमज़ानुल मुबारक दुआ मांगने का महीना है इंसान का अपने गुनाहों के माफ करवाने का महीना है, रसूले इस्लाम स.अ ने फरमायाः रमज़ान वह महीना है जिसकी शुरुआत रहमत, बीच के दिन मग़फिरत और गुनाहों की माफ़ी और आखिरी दिन जहन्नम की आग से आज़ादी के दिन हैं।

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