• मोमिन कौन।

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः मोमिन आदमी उस काम में हस्तक्षेप नहीं करता जिसका उसे इल्म न हो और कभी भी अक्षमता का बहाना बना कर दूसरों के अधिकारों को पूरा करने से मुंह नहीं मोड़ता।

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  • भलाई।

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः भलाई वह है जिसे करने से पहले टाल-मटोल न की जाए और करने के बाद, उपकार न जताया जाए।

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  • भाईचारा।

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः भाईचारे का मतलब है सख़्ती और आराम दोनों में साथ देना।

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  • दूसरों की बुराई फैलाने का नुक़सान।

    इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः जो दूसरों की वह बुराई फैलाए जो उनमें हो तो लोग उसके बारे में ऐसी बुराई की बात फैलाएंगे जो उस में नहीं होगी।

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  • आत्ममुग्धता

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः आत्ममुग्धता से ज़्यादा डरावनी कोई तंहाई नहीं।

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  • इल्म बाटना।

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः अपना इल्म दूसरों को दो और दूसरों का इल्म ख़ुद हासिल करो।

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  • दूरदर्शिता

    इमाम हसन अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः दूरदर्शिता यह है कि हमेशा अवसर उपलब्ध होने के इंतेज़ार में न रहो बल्कि अपनी ओर से सक्रियता दिखाओ।

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  • भलाई व बुराई

    इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैंः जो कोई भलाई के बीज बोता है वो ख़ुशी काटता है और जो बुराई के बीज बोता है वो पश्चाताप काटता है।

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  • कौन सा काम किया जायेगा।

    इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः आज दुनिया में वह काम करो जिसके माध्यम से तुम्हें क़यामत में आराम की उमीद की हो।

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  • राज़ की बात।

    इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः जो बात एक से दो तक पहुंची, उससे सब अवगत हो जाएंगें।

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  • आयतुल्लाह ख़ामेनई के बयान की रौशनी में

    मोमिन की मेराज

    रमज़ानुल मुबारक एक अवसर है अल्लाह की तरफ़ ध्यान देने के लिये, साल के अकसर दिनों में दुनिया की चीज़ें और हमारे अन्दर की इच्छाएं हमें पनी तरफ़ खींचती रहती हैं और हम ख़ुदा को भूल जाते हैं, इसी लिये अल्लाह तआला ने रमज़ान को स्पेशल इस लिये रखा है कि इस महीने में इन्सान ख़ुदा को याद करे और अपनी आत्मा को ऊपर की तरफ़ ले जाए, ख़ुदा से क़रीब हो

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  • मुनाफ़िक़ की पहचान।

    पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहे व आलेही व सल्लमः पाखंडी (मुनाफ़िक़) की तीन पहचान हैः झूठ बोलता है, वादा पूरा नहीं करता और अमानत में ख़यानत करता है।

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  • गुनाह

    इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम फरमाते हैंः जो छोटे गुनाह करते वक़्त अल्लाह से नहीं डरता वह बड़े गुनाह करते वक़्त भी अल्लाह से नहीं डरेगा।

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  • हज और उमरा

    हज़रत अली अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि हज और उमरा करने वाला ख़ुदा का मेहमान है और ख़ुदा गुनाहों की माफ़ी की शक्ल में उसे तोहफ़ा देता है।

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  • दूसरों के ऐब से पहले अपने ऐब पर नज़र.

    हज़रत इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि इंसान के लिए सबसे ज़्यादा फ़ायदेमंद चीज़ यह है कि वह दूसरों के ऐब व कमियों पर नज़र डालने से पहले अपने ऐब व कमी पर नज़र रखे।

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  • गुनाह से बचना।

    इमाम रज़ा अलैहिस्सलामः जो लोगों के बीच इज़्ज़त व शोहरत चाहता है उसे तन्हाई और सबके सामने दोनों ही हालत में गुनाह से बचना चाहिए।

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  • सदक़ा

    इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैं कि सदक़ा सुबह जल्दी दिया करो कि इससे इबलीस का चेहरा काला हो जाता है।

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  • सबसे अच्छी मीरास

    इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैंः सबसे अच्छी चीज़ जो बाप अपने बेटों के लिए मीरास के रूप में छोड़ता है वह शिष्टाचार है न कि माल-दौलत, क्योंकि माल-दौलत चला जाता है लेकिन शिष्टाचार बाक़ी रहता है।

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  • मोमिन की नजात

    पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम फ़रमाते हैः मोमिन की नजात अपनी ज़बान को क़ाबू रखने में है।

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  • पाक मन

    इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम फ़रमाते हैः अगर आदमी का मन पाक हो जाए तो उसका व्यवहार मज़बूत हो जाता है।

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قدس راه شهداء
*शहादत स्पेशल इश्यू*  शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी व अबू महदी अल-मुहंदिस
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