हाजियों के नाम हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई का संदेश।

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  • Source : wilayat.in
Brief

जिन लोगों ने हज के महत्व को घटा कर उसे केवल एक घूमने फिरने के लिए की जाने वाली यात्रा समझ लिया है और जो ईरान के मोमिन और क्रांतिकारी राष्ट्र से अपनी दुश्मनी और द्वेष को, हज को राजनीतिक रंग दिए जाने जैसी बातों के पर्दें में छुपा रहे हैं वह वास्तव में ऐसे छोटे व तुच्छ शैतान हैं जो बड़े शैतान अमरीका के हितों को ख़तरे में पड़ते हुए देख कर कांपने लगते हैं। सऊदी अधिकारी जो इस साल अल्लाह की राह और काबे के रास्ते में रूकावट बने हैं और जिन्होंने ईरानी हाजियों को काबा जाने से रोक दिया, वास्तव में काली करतूतों वाले भ्रष्ट शासक हैं जो अपनी अन्यायपूर्ण सत्ता को, विश्व साम्राज्य के समर्थन, ज़ायोनिज़्म और अमरीका के साथ दोस्ती और उनके आदेशों के पालन पर निर्भर समझते हैं और इसके लिए किसी भी तरह की ग़द्दारी में ज़रा भी संकोच नहीं करते।


بسم الله الرحمن الرحیم
و الحمدلله رب العالمین و صلّی الله علی سیدنا محمد و آله الطیبین و صحبه المنتجبین و من تبِعَهم بِاِحسانٍ الی یوم الدین.
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
दुनिया भर के मुसलमान भाइयों और बहनों
मुसलमानों के लिए हज का मौसम, लोगों की निगाहों में गौरव, प्रतिष्ठा, दिल के नूरानी होने और ख़ुदा के सामने गिड़गिड़ाने व सर झुकाने का मौसम है। हज एक आध्यात्मिक, सांसारिक, इलाही व अवामी ज़िम्मेदारी है। एक ओर से यह आदेश
«فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَذِكْرِكُمْ آبائکمْ أَوْ أَشَدَّ ذِكْرًا»  और «وَاذْكُرُوا اللَّهَ فِي أَيَّامٍ مَّعْدُودَاتٍ»
 अल्लाह को याद करो जैसे तुम अपने पूर्वजों को याद करते हो या उससे भी ज़्यादा और दूसरी ओर यह कहा जाना
«الَّذِي جَعَلْنَاهُ لِلنَّاسِ سَوَاءً الْعَاكِفُ فِيهِ وَالْبَادِ»
कि हमने उसे लोगों के लिए समान बनाया है चाहे वह मक्का में रहने वाला हो या रेगिस्तान में, हज के अनंत व विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करता है।
इस अभूतपूर्व ज़िम्मेदारी में समय व स्थान की सुरक्षा, खुली निशानियों और किसी चमकते सितारे की तरह इंसानों के दिलों को सुकून प्रदान करती है और हाजियों को असुरक्षा के उस दायरे से जो हमेशा इन्सानों के लिए ख़तरा रहा है और जिसे वर्चस्ववादी अत्याचारियों की ओर से खींचा गया है, बाहर ले जाती है और हाजियों को एक ख़ास समय तक सुरक्षा के सुख का आभास कराती है।
इब्राहीमी हज जिसे इस्लाम ने मुसलमानों को उपहार के रूप में दिया है, सम्मान, अध्यात्मिकता, एकता व महानता का प्रतीक और बुरा चाहने वालों तथा दुश्मनों के सामने इस्लामी उम्मत की महानता और अल्लाह तआला की असीमित शक्ति पर उनके भरोसे की निशानी है और भ्रष्टाचार, अपमान और तुच्छ बनाए रखने के दलदल से जिसे दुनिया की बदमाश और वर्चस्ववादी ताक़तें इंसानी समाज पर थोप देती हैं, मुसलमानों की लंबी दूरी को स्पष्ट करता है। इस्लामी और तौहीदी व एकेश्वरवादी हज,
(«أَشِدّاءُ عَلَى الْكُفّارِ رُحَمَاءُ بَيْنَهُمْ) काफ़िरों के प्रति कठोर और आपस में कृपालु होने का प्रतीक और मुश्रिकों से बेज़ारी और मोमिनों के साथ एकता व सौहार्द की जगह है।
जिन लोगों ने हज के महत्व को घटा कर उसे केवल एक घूमने फिरने के लिए की जाने वाली यात्रा समझ लिया है और जो ईरान के मोमिन और क्रांतिकारी राष्ट्र से अपनी दुश्मनी और द्वेष को, हज को राजनीतिक रंग दिए जाने जैसी बातों के पर्दें में छुपा रहे हैं वह वास्तव में ऐसे छोटे व तुच्छ शैतान हैं जो बड़े शैतान अमरीका के हितों को ख़तरे में पड़ते हुए देख कर कांपने लगते हैं। सऊदी अधिकारी जो इस साल अल्लाह की राह और काबे के रास्ते में रूकावट बने हैं और जिन्होंने ईरानी हाजियों को काबा जाने से रोक दिया, वास्तव में काली करतूतों वाले भ्रष्ट शासक हैं जो अपनी अन्यायपूर्ण सत्ता को, विश्व साम्राज्य के समर्थन, ज़ायोनिज़्म और अमरीका के साथ दोस्ती और उनके आदेशों के पालन पर निर्भर समझते हैं और इसके लिए किसी भी तरह की ग़द्दारी में ज़रा भी संकोच नहीं करते।
इस समय मेना की भयानक त्रासदी को लगभग एक साल का समय बीत गया कि जिसमें कई हज़ार लोग ईद के दिन और हज की ख़ास लिबास में, तेज़ धूप में प्यास की हालत में असहाय होकर मारे गये थे और उससे कुछ पहले भी काबे में इबादत और तवाफ़ व नमाज़ के दौरान बहुत से हाजियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
सऊदी अधिकारी दोनों दुर्घटनाओं के ज़िम्मेदार हैं और इस वास्तविकता पर वहां मौजूद सभी लोग, सारे विशेषज्ञ और निरीक्षक एकमत हैं और कुछ विशेषज्ञों ने तो इस दुर्घटना के पीछे षड़यंत्र की आशंका भी ज़ाहिर की है। ईदुलअज़हा के अवसर पर अल्लाह के नाम और उसके संदेश का जाप करने वाले घायल व मरते हाजियों को बचाने में निश्चित रूप से लापरवाही भी बरती गई है। ज़ालिम व अपराधी सऊदी अधिकारियों ने इन घायल हाजियों को मर जाने वाले हाजियों के साथ कंटेनरों में बंद कर दिया और उनका इलाज करने और उन्हें पानी पिलाने के बजाए उन्हें शहीद कर दिया। विभिन्न देशों के कई हज़ार परिवार अपने रिश्तेदारों से महरूम हो गए और कितने राष्ट्र शोकाकुल हुए। इस्लामी रिपब्लिक ईरान के लगभग 500 हाजी शहीद हुए, उनके परिजन अब भी दुखी हैं और ईरानी राष्ट्र अब भी उनका शोक मना रहा है।
लेकिन सऊदी नेता, माफ़ी मांगने और खेद प्रकट करने तथा इस भयानक त्रासदी के सीधे ज़िम्मेदारों को सज़ा देने के बजाए, बड़ी बेशर्मी के साथ एक अंतर्राष्ट्रीय इस्लामी जांच समिति के गठन तक पर तैयार नहीं हुए और दोषी के रूप में कटघरे में खड़े होने के बजाए, दावेदार बन गये। उन्होंने इस्लामी रिपब्लिक ईरान और कुफ़्र व साम्राज्यवाद के मुकाबले में लहराने वाले हर परचम के ख़िलाफ़ अपनी पुरानी दुश्मनी को और ज़्यादा घृणित रूप में ज़ाहिर कर दिया।
ज़ायोनियों और अमरीका के प्रति अपने व्यवहार से इस्लामी दुनिया के लिए कलंक बनने वाले राजनेताओं, अल्लाह से न डरने वाले, हराम खाने वाले और क़ुरआन व हदीस के विपरीत फ़तवा देने वाले मुफ्तियों और उन मीडिया एजेन्टों सहित कि जिनकी पेशेवराना ज़िम्मेदारी भी उन्हें झूठ फैलाने और झूठ बोलने से नहीं रोक पाती, सऊदी शासकों के सभी प्रचारिक भोंपू, इस साल ईरानियों को हज से वंचित करने का ज़िम्मेदार, इस्लामी रिपब्लिक ईरान को दर्शाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। तकफ़ीरी व आतंकवादी गुटों को बना कर उन्हें सशस्त्र करने और इस्लामी दुनिया को गृहयुद्धों में फंसाने वाले, बेगुनाहों का ख़ून बहाने वाले, यमन, इराक़, सीरिया व लीबिया तथा अन्य देशों में ख़ून ख़राबा करने वाले, अल्लाह को भूल कर ज़ायोनियों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाने वाले, फ़िलिस्तीनियों के दर्दों व दुखों की अनदेखी करने वाले, बहरैन के शहरों और गांवों में अत्याचार व अन्याय फैलाने वाले, बेज़मीर, बेदीन शासक कि जिन्होंने मिना की त्रासदी को जन्म दिया और मक्का व मदीना के पवित्र स्थलों के सेवकों का रूप धार कर इन स्थलों की पवित्रता व शांति को भंग करने वाले और ईद के दिन और उससे पहले काबा में अल्लाह के मेहमानों की बलि चढ़ाने वाले सऊदी शासक अब हज को राजनीति से दूर रखने की बात कर रहे हैं और दूसरों को उन गुनाहों का ज़िम्मेदार बता रहे हैं जो उन्होंने खुद किए हैं और जिनका कारण रहे हैं। ये लोग क़ुरआने मजीद की इन आयतों को यथार्थ करते हैं कि जिनमें कहा गया हैः
«وَإِذا تَوَلّىٰ سَعىٰ فِي الْأَرْضِ لِيُفْسِدَ فِيها وَيُهْلِكَ الْحَرْثَ وَالنَّسْلَ وَاللّهُ لا يُحِبُّ الْفَسادَ»  «وَإِذا قِيلَ لَهُ اتَّقِ اللّهَ أَخَذَتْهُ الْعِزَّةُ بِالْإِثْمِ فَحَسْبُهُ جَهَنَّمُ وَلَبِئْسَ الْمِهادُ».
और जब उसे सत्ता मिलती है तो वह धरती पर भ्रष्टाचार व ख़राबी फैलाने का प्रयास करता है, खेतियां और पीढ़ियां तबाह करता है और अल्लाह फ़साद पसन्द नहीं करता। और जब उससे कहा जाता है कि अल्लाह से डर तो उसे पाप पर घमंड होता है तो उसके लिए जहन्नम काफ़ी है और वह बहुत बुरा ठिकाना है।
इस साल के हज में भी रिपोर्टों के अनुसार ईरानी और कुछ अन्य देशों के हाजियों का रास्ता रोकने के अलावा दूसरे देशों के हाजियों को अमरीका और ज़ायोनी शासन की ख़ुफिया एजेन्सियों के सहयोग से अभूतपूर्व निगरानी में रखा गया है और अल्लाह के सुरक्षित घर को सबके लिए असुरक्षित बना दिया गया है।
इस्लामी सरकारों और राष्ट्रों सहित पूरी इस्लामी दुनिया को चाहिए कि वह सऊदी शासकों को पहचाने और दीन से दूर उनकी भौतिकता से भरी मानसिकता को सही तरह से समझे, उन्होंने इस्लामी दुनिया में जो अपराध किये हैं उनके लिए उनसे सवाल करे और अल्लाह के मेहमानों के साथ उनके ज़ालिमाना व्यवहार की वजह से मक्का व मदीना के पवित्र स्थलों के मैनेजमेंट और हज के लिए कोई रास्ता खोजे। इस ज़िम्मेदारी के प्रति लापरवाही इस्लामी राष्ट्र के भविष्य को और बड़ी समस्याओं में ग्रस्त कर देगी।
मुसलमान भाइयो और बहनो! इस साल ईरान के मोमिन हाजियों की कमी महूसस की जा रही है लेकिन उनके दिल पूरी दुनिया से हज करने वालों के साथ हैं और उनके लिए चिंतित हैं और दुआ करते हैं कि दुष्ट शासकों का गिरोह उन्हें कोई नुक़सान न पहुंचा पाए। अपने ईरानी भाईयों और बहनों को अपनी दुआओं और इबादतों में याद रखिएगा और इस्लामी समाजों की चिंताओं के निवारण और इस्लामी दुनिया में साम्राज्यवादियों, ज़ायोनियों और उनके एजेन्टों के प्रभावों के अंत की दुआ कीजिए।
मैं पिछले साल मिना और काबा के शहीदों और 31 जूलाई सन 1987 को मक्का के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और अल्लाह तआला से उनके लिए क्षमा, कृपा और उनकी महानता की दुआ करता हूं और इमामे ज़माना पर सलाम भेजते हुए याचना करता हूं कि वे इस्लामी राष्ट्र की महानता और दुश्मनों की दुष्टता से मुसलमानों को छुटकारा मिलने की दुआ करें।
सैयद अली ख़ामेनेई
२ सितम्बर सन २०१६


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