ईदे मुबाहेला:

इस्लाम व अहलेबैत की जीत का दिन।

  • News Code : 781612
  • Source : अबना
Brief

नजरान क्षेत्र के ईसाईयों के धार्मिक नेता एक चटान के ऊपर जाते हैं। बुढ़ापे के कारण उनके जबड़े और सफ़ेद दाढ़ी के बालों में कंपन है। वह कांपती हुई आवाज़ में कहते हैं कि मेरे विचार में मुबाहिला करना उचित नहीं होगा। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारी तबाही निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।

नजरान क्षेत्र के ईसाईयों के धार्मिक नेता एक चटान के ऊपर जाते हैं। बुढ़ापे के कारण उनके जबड़े और सफ़ेद दाढ़ी के बालों में कंपन है। वह कांपती हुई आवाज़ में कहते हैं कि मेरे विचार में मुबाहिला करना उचित नहीं होगा। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारी तबाही निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।
अरबी ज़बान में मुबाहिला चीज़तः बहल शब्द से बना है जिसका मतलब होता है आज़ाद कर देना अथवा किसी चीज़ से हर तरह की शर्त हटा लेना लेकिन यहां पर मुबाहला का मतलब एक दूसरे के लिए अल्लाह के दंड की दुआ करना है। सूरज पूरी सृष्टि पर अपनी चकाचौंध कर देने वाली रौशनी बिखेरे हुए है। मदीना शहर के बाहर साठ ईसाई विद्वान खड़े हुए हैं और उनकी आखें मदीना शहर के प्रवेश द्वार पर टिकी हुई हैं। सब प्रतीक्षा में हैं कि हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेह व सल्लम अपने साथियों की फ़ौज लेकर मदीना शहर से बाहर आएं और मुबाहिला में हिस्सा लें। मुसलमानों की भी एक बड़ी संख्या रास्ते में, मदीना शहर के प्रवेश द्वार के आस पास और ईसाईयों के चारो ओर खड़ी हुई थी। सब बड़े उत्साह के साथ इस सभा की प्रतीक्षा कर रहे थे। लोग दम साधे खड़े थे। सबकी आखें मदीना शहर के द्वार पर टिकी हुई थीं। प्रतीक्षा की घड़ियां एक एक करके गुज़र रही थीं। अचनाक पैग़म्बरे इस्लाम का तेज में डूबा चेहरा दिखाई पड़ा। उनकी गोद में उनके नवासे हज़रत इमाम हुसैन थे और बड़े नवासे इमाम हसन ने उनकी उंगली पकड़ी हुई है। वह मदीने के दरवाज़े से बाहर निकले। उनके पीछे एक पुरूष और एक महिला को भी देखा जा सकता है। वह पुरुष हज़रत अली और महिला हज़रत फ़ातेमा ज़हरा थीं।ईसाइयों को यह देखकर बड़ा अचम्भा हुआ और सब विचलित हो गए। नजरान के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति शरहबील ने कहाः देखो तो सही, वे केवल अपनी बेटी, दामाद और दोनों नवासों के साथ आए हैं। नजरान के बूढ़े पादरी ने कांपती हुई आवाज़ में कहा कि यही उनकी सत्यता का प्रमाण है। वे मुबाहिला के लिए अपने साथ सेना लाने के बजाए केवल अपने निकटवर्ती और प्रियतम लोगों को साथ लाए हैं। इससे साफ़ पता चलता है कि उन्हें अपने संदेश और मिशन की सच्चाई का पूर्ण विश्वास है अतः उन्होंने अपने निकटतम लोगों को अपना सहारा बनाया है। शरहबील ने कहा कि कल हज़रत मोहम्मद ने कहा कि हम अपनी संतान, अपनी महिलाओं और अपनी जान से प्यारे लोगों के साथ आएं। इससे पता चलता है कि वे हज़रत अली को जान से अधिक प्रिय मानते हैं। बिल्कुल, हज़रत अली पैग़म्बरे इस्लाम के लिए जान से अधिक प्रिय हैं। हमारी प्राचीन पुस्तकों में उनका नाम पैग़म्बरे इस्लाम के उत्तराधारी के रूप में आया है। चट्टान के ऊपर खड़े पादरी ने अपनी कांपती हुई आवाज़ में कहा कि मेरे विचार में मुबाहिला करना ठीक नहीं है। यह पांच नूरानी चेहरे जिन्हें मैं देख रहा हूं अगर दुआ कर देंगे तो धरती में धंसे पहाड़ उखड़ जाएंगे। अगर मुबाहिला हुआ तो हमारा विनाश निश्चित है और यह भी आशंका है कि अल्लाह के अज़ाब समूचे दुनिया के ईसाई समुदाय को अपनी चपेट में ले ले।मानव बृद्धि एक शक्तिशाली प्रकाश की भांति है जो सही मार्च की पहचान में मनुष्य की सहायता करती है लेकिन यही पर्याप्त नहीं है। मनुष्य को सौभाग्यपूर्ण जीवन के लिए कुछ एसी चीज़ओं की भी आवश्यकता है जो मानव विवेक की उड़ान से अधिक ऊंची हैं। यही कारण है कि पैग़म्बरे इस्लाम ने विभिन्न अवसरों पर विभिन्न शैलियों से अपने बाद के अल्लाह के मार्गदर्शकों का परिचय करवाया।पैग़म्बरे इस्लाम के परिजन एसे चमकते तारे हैं जो मनुष्य को कल्याण और सौभाग्य का मार्ग दिखाते हैं, जो क़ुरआन के रूप में अल्लाह के ज्ञान और शिक्षाओं के महासागर से ज्ञान के मोती निकालते और आम जनमानस के समक्ष पेश करते हैं। नजरान के ईसाइयों से मुबाहिला भी एसी ही एक विधि थी जिससे इस्लाम के संरक्षण तथा समाज के मार्गदर्शन के लिए पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों की योग्यता को समझा जा सकता था।पैग़म्बरे इस्लाम ने अल्लाह के संदेश पहुंचाने का अपना अभियान आरंभ किया तो उन्होंने बहुत से देशों के शासकों को पत्र लिखे या वहां अपने दूत भेजे ताकि एकेश्वरवाद और सत्य का संदेश सब तक पहुंच जाए। नजरान नामक क्षेत्र हेजाज़ जहां इस समय सऊदी अरब स्थित है और यमन के बीच एक महत्वपूर्ण शहर था जिसके अंतर्गत सत्तर गांव आते थे। जब हेजाज़ में इस्लाम का उदय हुआ तो उस समय केवल यही क्षेत्र एसा था जहां के लोगों ने मूर्ति पूजा छोड़कर ईसाई धर्म गले लगाया था। सन दस हिजरी क़मरी में पैग़म्बरे इस्लाम ने इस क्षेत्र के लोगों को इस्लाम धर्म का नियंत्रण देने के लिए पत्र भेजा। उन्होंने नजरान के पादरी अबू हारेसा के नाम पत्र में अपने मिशन के बारे में लिखा था। पैग़म्बरे इस्लाम के दूत यह पत्र लेकर नजरान पहुंचे और उसे पादरी तक पहुंचाया। पादरी ने परामर्श के लिए विद्वानों की बैठक बुलाई। इन विद्वानों में से एक ने जो अपनी तेज़ बुद्धि के लिए प्रसिद्ध था कहा कि हमने अपने पेशवाओं से कई बार सुना है कि एक दिन पैग़म्बरी हज़रत इसहाक़ पैग़म्बर के वंश से स्थानान्तरित होकर हज़रत इस्माईल पैग़म्बर के वंश में चली जाएगी तो कुछ असंभव नहीं है कि हज़रत मोहम्मद जो हज़रत इस्माईल के वंश से हैं वही पैग़म्बर हों जिनके बारे में पहले शुभसूचना दी जा चुकी है। इस आधार पर बैठक में यह फ़ैसला किया गया नजरान से एक प्रतिनिधिमंडल मदीना शहर जाए और हज़रत मोहम्मद से आमने सामने बात करे तथा उनकी पैग़म्बरी के तर्कों और साक्ष्यों के बारे में उनसे प्रश्न करे।नजरान का प्रतिनिधिमंडल मदीना शहर पहुंचा और उसने पैग़म्बरे इस्लाम से विस्तार से बातचीत की। पैग़म्बरे इस्लाम ने अनन्य ईश्वर की बंदगी का निमंत्रण दिया लेकिन प्रतिनिधिमंडल के लोगों ने तीन पूज्यों की बात पर आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर भी आग्रह किया कि हज़रत ईसा ईश्वर के सुपुत्र हैं। उन्होंने हज़रत ईसा के ईश्वर होने के प्रमाण के रूप में बिना पिता के उनके जन्म का बिंदु पेश किया। इसी बीच ईश्वर की ओर से पैग़म्बरे इस्लाम के पास फ़रिश्ता यह कुरआनी आयत लेकर आया कि निश्चित रूप से ईश्वर के निकट हज़रत ईसा की स्थिति हज़रत आदम की भांति हैं जिन्हें ईश्वर ने मिट्टी से पैदा किया। क़ुरआन की इस आयत में हज़रत ईसा और हज़रत आदम के बीच जन्म की समानता का उल्लेख करके ईश्वर ने यह समझाया है कि उसने हज़रत आदम को अपनी असीम शक्ति से पैदा किया और वे बिना माता पिता के ही अस्तित्व में आ गए। अतः अगर यह तर्क मान लिया जाए कि हज़रत ईसा चूंकि बिना पिता के जन्मे अतः वे ईश्वर हैं तो फिर हज़रत आदम जो बिना पिता और बिना माता के जन्मे वे तो ईश्वर बनने के लिए और भी योग्य हैं। यह सारे तर्क सुनने के बावजूद ईसाई प्रतिनिधिमंडल संतुष्ट न हुआ तो पैग़म्बरे इस्लाम को ईश्वर से आदेश मिला कि मुबाहिला करो ताकि सच्चाई सामने आ जाए और झूठ बोलने वाले अपमानित हों। जब नजरान के ईसाई अपनी ज़िद पर अड़े रहे और सच्चाई को स्वीकार करने पर तैयार न हुए तो ईश्वर ने क़ुरआन के सूरए आले इमरान की 61वीं आयत पैग़म्बरे इस्लाम पर उतारीः « فَمَنْ حَآجَّکَ فِیهِ مِن بَعْدِ مَا جَاءکَ مِنَ الْعِلْمِ فَقُلْ تَعَالَوْاْ نَدْعُ أَبْنَاءنَا وَأَبْنَاءکُمْ وَنِسَاءنَا وَنِسَاءکُمْ وَأَنفُسَنَا وأَنفُسَکُمْ ثُمَّ نَبْتَهِلْ فَنَجْعَل لَّعْنَةَ اللّهِ عَلَى الْکَاذِبِینَ » जब हज़रत ईसा मसीह के बारे में तुम्हारी ज्ञानपूर्ण बातों के बावजूद कुछ लोग तुमसे कठहुज्जती कर रहे हैं तो उनसे कह दो कि आइए हम अपने बेटों को बुलाएं आप अपने बेटों को बुलाएं हम अपनी महिलाओं को बुलाएं, आप अपनी महिलाओं को बुलाइए हम अपने प्राणप्रिय लोगों को बुलाएं और आप अपने प्राणप्रिय लोगों को बुलाइए फिर एक दूसरे से मुबाहिला करें और झूठों के लिए अल्लाह के अज़ाब की दुआ करें।पैग़म्बरे इस्लाम तथा नजरान के ईसाइयों के प्रतिनिधि मुबाहिला करने के लिए निर्धारित स्थान पर पहुंचे। सुन्नी समुदाय के धर्मगुरू मुबाहिला की घटना को इस तरह बयान करते हैः पैग़म्बरे इस्लाम मुबाहिले के लिए इस स्थिति में बाहर आए कि ऊन का काला कपड़ा उनके कंधे पर था, हुसैन उनकी गोद में थे और हसन उनकी उंगली पकड़े हुए थे। उनके पीछे हज़रत फ़ातेमा ज़हरा तथा इन सब के पीछे हज़रत अली चल रहे थे। पैग़म्बरे इस्लाम ने अपने साथ आए इन लोगों से कहा कि जब मैं दुआ करूं तो आप लोग आमानी कहें। यह कहकर पैग़म्बरे इस्लाम ने ऊन का काला कपड़ा ओढ़ लिया। हसन अलैहिस्सलाम पैग़म्बरे इस्लाम के निकट जाकर खड़े हो गए और पैग़म्बरे इस्लाम ने उन्हें भी कपड़े के भीतर बुला लिया। इसके बाद हुसैन अलैहिस्सलाम और फिर हज़रत फ़ातेमा और हज़रत अली अलैहिस्सलाम उस कपड़े के अंदर चले गए। जब सब उस कपड़े में एकत्रित हो गए तो पैगम्बरे इस्लाम ने ततहीर के नाम से प्रसिद्ध क़ुरआन की आयत पढ़ीः
« إِنَّمَا یُرِیدُ اللَّهُ لِیُذْهِبَ عَنکُمُ الرِّجْسَ أَهْلَ الْبَیْتِ وَیُطَهِّرَکُمْ تَطْهِیرًا » ईश्वर चाहता है कि आप घर वालों से हर अपवित्रता को दूर रखे तथा आपको उस तरह पवित्र रखे जैसा पवित्र रखने का हक़ है। इस्लामी इतिहास में आया है कि आयते ततहीर आ जाने के बाद पैग़म्बरे इस्लाम बहुत दिनों तक सुबह की नमाज़ के समय हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा के घर के द्वार पर खड़े हो जाते थे और दोनों हाथ किवाड़ पर रखकर कहते थे हे घर वालो आप पर सलाम हो। आप पर ईश्वर की कृपा और अनुकंपाएं उतरें। आप लोग नमाज़ के लिए उठ जाइए। जो आपसे युद्घ करे मैं उसके विरुद्ध युद्ध की स्थिति में हूं और जो आपसे मेल जोल रखे मैं उसके साथ मेल जोल की स्थिति में रहूंगा। नजरान के ईसाइयों ने जब पैग़म्बरे इस्लाम को अपने निकटतम लोगों के साथ मुबाहिला के लिए आते देखा तो वे समझ गए पैग़म्बरे इस्लाम का दावा पूर्णतः सत्य है। उन्होंने मुबाहिला का निर्णय बदल दिया और पैग़म्बरे इस्लाम से संधि कर ली। नजरान का ईसाई पादरी पैग़म्बरे इस्लाम के समक्ष सिर झुका कर खड़ा हो गया। पादरी ने कहा कि हमें मुबाहिला से क्षमा कर दीजिए आप जो कहेंगे हम स्वीकार करने को तैयार हैं। पैग़म्बरे इस्लाम ने बड़ी विनम्रता और शिष्टाचार का प्रदर्शन करते हुए उनकी बात मान ली। उन्होंने नजरान के ईसाइयों से कहा कि वे इस्लामी शासन में निश्चिंत होकर रह सकते हैं और कर अदा करके निःसंकोच जीवन व्यतीत कर सकते हैं तथा इस्लामी सेना शत्रुओं से उनकी रक्षा करेगी। यह घटना का समाचार जंगल की आग की भांति नजरान तथा अन्य क्षेत्रों के ईसाइयों में फैल गय। सत्य के खोजी बहुत से ईसाईयों ने इस्लाम धर्म स्वीकार कर लिया।क़ुरआन के विख्यात विवरणकर्ता अल्लामा तबातबाई सूरए आले इमरान की 61वीं आयत के विवरण में कहते हैं कि पैग़म्बरे इस्लाम ईश्वर के इस आदेश का पालन करने के लिए संतान के रूप में हज़रत इमाम हसन और हज़रत इमाम हुसैन को महिलाओं के रूप में हज़रत फ़ातेमा को और अपने प्राणप्रिय रूप में हज़रत अली अलैहिस्सलाम को लेखकर आए जिससे पता चल गया कि इन चारों के अतिरिक्त पैग़म्बरे इस्लाम की दृष्टि में कोई भी आयत का पात्र नहीं था तथा पैग़म्बरे इस्लमा के संतान, महिला और प्राणप्रिय यही लोग थे। इतिहास में कुछ स्थानों पर बताया गया है कि पैग़म्बरे इस्लाम ने इन लोगों के बारे में कहा कि हे ईश्वर यही लोग मेरे घरवाले हैं।पैग़म्बरे इस्लाम के घरवाले महानतम लोग हैं और इस्लामी विद्वानों ने विभिन्न मार्गों से लोगों को उनसे परिचित करवाने का प्रयास किया है क्योंकि उनसे परिचित होना मार्गदर्शित होने का सबसे विश्वसनीय मार्ग है।


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