बहरैनी उल्मा ने ऑले खलीफा शाही सरकार को दी चेतावनी।

  • News Code : 768232
  • Source : अल-आलम
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देश के प्रमुख उल्मा द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि आयतुल्लाह ईसा कासिम के विरूद्ध मुक़दमा वास्तव में शिया सम्प्रदाय के विरूद्ध मुकदमा चलाए जाने के बराबर है। इस बयान पर अब्दुल्लाह लग़रीफ़ी, शेख अबदुल हसन और शेख़ मोहम्मद सालेह जैसे प्रमुख उल्मा ने हस्ताक्षर किए हैं।

अहलेबैत समाचार एजेंसी अबनाः बहरैन के शिया उल्मा ने बहरैनी के प्रमुख धर्मगुरू आयतुल्लाह ईसा क़ासिम के विरूद्ध मुकदमे को शिया मज़हब के खिलाफ मुकदमे के समान बताया है।
बहरैनी सूत्रों के अनुसार देश के प्रमुख उल्मा द्वारा जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि आयतुल्लाह ईसा कासिम के विरूद्ध मुक़दमा वास्तव में शिया सम्प्रदाय के विरूद्ध मुकदमा चलाए जाने के बराबर है। इस बयान पर अब्दुल्लाह लग़रीफ़ी, शेख अबदुल हसन और शेख़ मोहम्मद सालेह जैसे प्रमुख उल्मा ने हस्ताक्षर किए हैं। बहरैन की शाही सरकार की दिखावटी अदालत, बहरैन के प्रमुख मौलाना आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम के विरूद्ध बुधवार से मुकदमे की कार्यवाही शुरू करने वाली है। बहरैन की शाही सरकार के गृह मंत्रालय ने आयतुल्लाह शेख़ ईसा कासिम की ओर से ख़ुम्स जमा करने के विरूद्ध मुकदमा दायर किया है।
शिया मज़हब में ख़ुम्स एक शरई ज़िम्मेदारी है जिसके तहत हर आदमी अपनी वार्षिक बचत का पांचवां हिस्सा मराज-ए-केराम को दीन के प्रचार और जरूरतमंदों की मदद के लिए देता है। बहरैन की शाही सरकार इससे पहले आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम की नागरिकता भी रद्द कर चुकी है जिसके विरूद्ध देश की बहुसंख्यक शिया आबादी में सख्त चिंता पाई जाती है। लेकिन रविवार को सरकार की ओर से आयतुल्लाह शेख ईसा कासिम के खिलाफ मुकदमा चलाने की घोषणा पर बहरैनी जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बहरैन की जनता फ़रवरी दो हज़ार ग्यारह से देश में लोकतंत्र के लिए आंदोलन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य तानाशाही खत्म करके जनता द्वारा चुनी हुई सरकार की स्थापना है।


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