मैं चाहता हूं कि अपनी आख़री सांस तक नजफ़ में रहूं।

हाल ही में शिया होने वाले अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर ने इमाम अली अ. के हरम की ज़ियारत की।

  • News Code : 747344
  • Source : अबना
Brief

अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर इख़्वानुल मुस्लमीन के वरिष्ठ नेता ने इमाम अली अ. के हरम की ज़ियारत करने के बाद कहाः मैं चाहता हूं कि अपनी आख़री सांस तक इमाम अली अ. के शहर नजफ़ में रहूं।

अहलेबैत समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और इख़्वानुल मुस्लमीन के वरिष्ठ नेता जिन्होंने अभी हाल ही में शिया धर्म स्वीकार किया है नजफ़ में इमाम अली अ. के रौज़े की ज़ियारत की।
73 वर्षीय डा. मिस्बाह अल-रदीनी ने जैसे इमाम अलीं अ. के हरम में प्रवेश किया उनकी आंखों से आंसूं जारी हो गए औरउन्होंने रोते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरी इच्छा है कि आख़री सांस तक इमाम अली अ. के हरम के निकट ही रहूं।
गौरतलब है कि 73 वर्षीय डा. मिस्बाह अल-रदीनी अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर, प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और इख़्वानुल मुस्लमीन के नेता जिन्होंने चार साल की रिसर्च के बाद अभी हाल ही में शिया धर्म स्वीकार किया है
वह 40 साल तक अमेरिका में इस्लाम के प्रचार में व्यस्त रहे कई मस्जिदें और धार्मिक केंद्र की बुनियाद डाली।
डा. मिस्बाह क़तर के मुफ़्ती यूसुफ़ क़रज़ावी के साथी और मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी के गुरू हैं।

अहलेबैत समाचार एजेंसी अबना की रिपोर्ट के अनुसार अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और इख़्वानुल मुस्लमीन के वरिष्ठ नेता जिन्होंने अभी हाल ही में शिया धर्म स्वीकार किया है नजफ़ में इमाम अली अ. के रौज़े की ज़ियारत की।
73 वर्षीय डा. मिस्बाह अल-रदीनी ने जैसे इमाम अलीं अ. के हरम में प्रवेश किया उनकी आंखों से आंसूं जारी हो गए औरउन्होंने रोते हुए कहा कि मैं चाहता हूं कि मेरी इच्छा है कि आख़री सांस तक इमाम अली अ. के हरम के निकट ही रहूं।
गौरतलब है कि 73 वर्षीय डा. मिस्बाह अल-रदीनी अल-अज़हर युनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर, प्रसिद्ध बुद्धिजीवी और इख़्वानुल मुस्लमीन के नेता जिन्होंने चार साल की रिसर्च के बाद अभी हाल ही में शिया धर्म स्वीकार किया है
वह 40 साल तक अमेरिका में इस्लाम के प्रचार में व्यस्त रहे कई मस्जिदें और धार्मिक केंद्र की बुनियाद डाली।
डा. मिस्बाह क़तर के मुफ़्ती यूसुफ़ क़रज़ावी के साथी और मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मुहम्मद मुर्सी के गुरू हैं।


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