सीरिया को तबाह कर देने वाले देश अब दमिश्क़ से संबंधों की बहाली चाहते हैं,

सीरिया को तबाह कर देने वाले देश अब दमिश्क़ से संबंधों की बहाली चाहते हैं,

मार्च 2011 और उसके बाद के महीनों और वर्षों का जायज़ा लिया जाए तो सऊदी अरब, इमारात, क़तर, तुर्की, जार्डन, इसी तरह अमरीका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी सहित दर्जनों देश सीरिया की बश्शार असद सरकार को गिराने के लिए लामबंद थे।

इन देशों के अधिकारी आए दिन यही बयान देते थे कि बश्शार असद की सरकार की क़ानूनी हैसियत नहीं रह गई है, बश्शार असद को अब शासन करने का अधिकार नहीं है। अरब लीग ने सीरिया की क़ानूनी सरकार की सीट विद्रोही संगठनों के हवाले कर दी। विद्रोही संगठनों को हाथों हाथ लिया जाने लगा और सीरिया के भीतर लड़ाकों को भेजा जाने लगा ताकि वह हमले तेज़ करें और सरकार गिर जाए।

इन देशों का आंकलन यह था कि कुछ दिनों कुछ हफ़्तों या कुछ महीनों के भीतर बश्शार असद सरकार गिर जाएगी।

मगर हालात का रुख़ कुछ और हो गया क्योंकि साज़िश रचने वाले देशों की सबसे बड़ी ग़लती यह थी कि उन्होंने सीरिया के ज़मीनी हालात का सही अंदाज़ा नहीं लगाया। ज़मीनी सच्चाई यह थी कि सीरियाई सरकार को जनता का समर्थन प्राप्त था और सेना व इंटेलीजेन्स सहित सरकारी संस्थाएं सरकार की वफ़ादार थीं। यही वजह थी कि सीरियाई सेना ने हिज़्बुल्लाह, ईरान और रूस की मदद से आतंकियों और उनके समर्थकों की योजनाओं पर पानी फेर दिया और विद्रोहियों और आतंकियों के क़ब्ज़े में आ जाने वाले इलाक़ों को आज़ाद करा लिया। इस समय 90 प्रतिशत भाग सीरिया की सरकार के नियंत्र में हैं दस प्रतिशत भाग पर विद्रोहियों का नियंत्रण है जो कभी भी समाप्त हो सकता है क्योंकि सीरियाई सेना इदलिब पर आप्रेशन करने वाली है।

इन हालात को देखते हुए अब उन देशों का रुख़ भी बदल गया है जो सीरिया की सरकार का तख्ता उलटने का ख़्वाब देख रहे थे। हाल ही में ख़बर आई है कि इमारात की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के उप प्रमुख अली मुहम्मद बिन हम्माद अश्शाम्सी ने जुलाई महीने में दमिश्क़ की यात्रा की और सीरिया के इंटेलीजेन्स विभाग के प्रमुख जनरल दीब ज़ैतून से मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात में दोनों देशों के संबंधों को बहाल करने के मार्गों की समीक्षा की गई।

सूत्रों का कहना है कि इमारात सरकार चाहती है कि सीरिया के साथ कूटनैतिक संबंध बहाल हो जाएं लेकिन उसे इस संदर्भ में सऊदी अरब की नाराज़गी का डर है। यही कारण है कि अबू ज़हबी ने बैरूत में अपने राजदूत हमद सईद शाम्सी को दमिश्क़ में बंद पड़े अपने दूतावास के कामों को देखने की ज़िम्मेदारी सौंपी है।

इमारात ही नहीं जार्डन भी कोशिश में है कि दमिश्क़ से उसके संबंध बहाल हो जाएं। जार्डन कोशिश कर रहा है कि दोनों देशों के बीच सीमा पर अन्नसीब पास खुल जाए जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार भी होता रहा है और लोगों की आवाजाही होती थी। आने वाले गुरुवार को अन्नसीब पास खोलने के लिए दोनों देशों के बीच एक बैठक होने वाली है।

यह सीरिया की सरकार और जनता की बड़ी कामयाबी है और यह अन्य देशों के लिए बहुत बड़ा सबक़ भी है।


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