शरई मसअले

आज का सवालः अहकाम जानने के तरीक़े क्या हैं?

आज का सवालः अहकाम जानने के तरीक़े क्या हैं?

तक़लीद यानि शरई हुक्म को जानने के लिए जामिउश्शराएत मुज्तहिद से सम्पर्क करना और दूसरे शब्दों में शरई अहकाम को मुज्तहिद के फ़तवे के अनुसार अंजाम देना................

दीनी अहकाम जानने और उन पर अमल करने के तीन तरीक़े हैं।
1.    इज्तेहाद।
2.    तक़लीद।
3.    एहतियात।
1.    इज्तेहाद
इज्तेहाद यानि फ़ुक़हा  के नज़दीक साबित स्रोतों (Sources) से दीनी हुक्म और इलाही क़ानून को हासिल करना।
2.    एहतियात
एहतियात यानि इस तरह इस्लामी अहकाम को अंजाम दिया जाए कि शरई ज़िम्मेदारी अदा होने का इत्मीनान हासिल हो जाए जैसे उस काम को अंजाम न दे जिसे कुछ मुज्तहिद हराम कहते हैं और दूसरे कुछ मुज्तहिद हराम नहीं मानते। और इसी तरह जिस अमल को कुछ मुज्तहिद वाजिब कहते हैं और कुछ दूसरे वाजिब नहीं जानते उसे अंजाम दे। (ताकि उसे इत्मीनान हासिल हो जाए कि उसने अपनी शरई ज़िम्मेदारी पूरी कर दी है।)
3.    तक़लीद
तक़लीद यानि शरई हुक्म को जानने के लिए जामिउश्शराएत मुज्तहिद  से सम्पर्क करना और दूसरे शब्दों में शरई अहकाम को मुज्तहिद के फ़तवे के अनुसार अंजाम देना।
•    तक़लीद जहां कुर्आन व हदीस से साबित है वही इंसान की अक़्ल भी कहती है कि जो शरीअत के अहकाम नहीं जानता है उसे जामेउश्शराएत मुज्तहिद के फ़त्वे के हिसाब से अमल करना चाहिए।
•    अगर मुकल्लफ़ ख़ुद मुज्तहिद न हो तो उसे किसी मुज्तहिद की तक़लीद या एहतियात पर अमल करना चाहिए।
•    चूंकि एहतियात पर अमल करने के लिए एहतियात के तमाम रास्तों और तरीक़ों को जानना ज़रूरी है और एहतियात पर अमल करने में वक़्त भी ज़्यादा लगता है इसलिए बेहतर यही है कि इंसान जामेउश्शराएत मुज्तहिद की तक़लीद करे।
•    जिसमें यह तीन शर्ते पाई जाती हों उस पर तक़लीद वाजिब है।
1.    मुकल्लफ़ हो।
2.    ख़ुद मुज्तहिद न हो।
3.    एहतियात पर अमल न करता हो।

(ऐसा मुज्तहिद जिसके अंदर मरजा होने की तमाम शर्तें मौजूद हों और मुज्तहिद उस इंसान को कहते हैं जिसका इल्म उस दर्जे पर पहुंच चुका हो कि वह दलीलों और तर्कों द्वारा इस्लामी अहकाम को हासिल करने की ताक़त रखता हो। और मरजा उसे कहते हैं जिसकी तक़लीद की जाती है।)


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